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Tuesday, September 21, 2021

हिमालय में स्थित लद्दाख की रोमांचक यात्रा (Mission Laddhakh By Kishan Bahety..1 )

 Guest Post Written by Kishan Bahety

हमारे भारत देश के उत्तरी दिशा में एक महत्वपूर्ण और खूबसूरत  राज्य "जम्मू और कश्मीर" । सम्पूर्ण राज्य हिमालय पर्वत की गोद में ही बसा हुआ है । इस राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी है श्रीनगर और शीतकालीन राजधानी है "जम्मू " । सम्पूर्ण राज्य इन संभाग में बटा हुआ,पहला जम्मू सम्भाग जिसका मुख्य नगर है "जम्मू", दूसरा कश्मीर संभाग जिसका मुख्य नगर है "श्रीनगर" अंतिम और तीसरा संभाग है लद्दाख जिसका मुख्य नगर है "लेह" । इसी राज्य के लद्दाख संभाग की यात्रा का सौभाग्य मूझे मिला तो चलते है लद्दाख की यात्रा पर मेरी जुबानी इस लेख के माध्यम से -




लद्दाख जाना मेरे लिए किसी सपने के पूरे होने से कम न था । कई सालो से यहाँ जाने की कोशिश कर रहा था पर कोई लंबी छुट्टियों न होने के कारण कार्यक्रम न बन सका । इस साल 2016 में दुर्गा पूजा और मोहर्रम और लखि पूजा  मिलाकर  हमारे  कोलकाता में अच्छी छुट्टिया पड़ रही थी । तो इस बार लद्दाख जाने का तय कर लिया गया । हम बंगाली लोग साल के शुरुआत में कैलेंडर आते ही लाल दाग यानि छुट्टियों को देखना शुरू कर देते है । और साल भर के कार्यक्रम उसी अनुसार तय भी कर लेते है । चूँकि हम एक दो लोग तो जाते नहीं करीबन 35 से 40 लोग जाते है तो तैयारी भी पूरी करनी पड़ती है चाहे वो टिकट बुकिंग की हो या होटल की । पर इस बार किन्ही कारणों से सिर्फ 20 लोग ही जा रहे थे ।

अपनी यात्रा सम्बंधित जानकारी के लिए हमारे व्हाट्सऐप समूह घुम्मकड़ी दिल से में कई बार इसके बारे में चर्चा हुई । "घुमक्कड़ी दिल से (GDS)" ग्रुप से  से कोई साइकिल से लद्दाख जा चूका है तो  कोई बाइक कोई  हवाई जहाज से  और कोई लिफ्ट  लेकर । सबका अपना अपना अनुभव था । सबसे ज्यादा मुझे प्रकाश जी , देवेन्द्र कोठारी जी और राम भाई के अनुभवो से फायदा मिला । ग्रुप में चर्चा करने का लाभ ये भी हुआ की  हम खरदुंगला से वापिस लेह आकर पेंगोंग जाने वाले थे पर उन्होंने जो अगम से होकर जो रास्ता बताया उससे मुझे पूरे एक दिन का फायदा मिला साथ ही साथ एक नयी जगह देखने को भी मिल गयी ।

हम लोगो ने कोलकाता से दिल्ली ट्रेन में और दिल्ली से लद्दाख हवाई जहाज में जाने का कार्यक्रम तय किया  और आते समय लेह कारगिल से  श्रीनगर  होते हुए  दिल्ली हवाई जहाज से वापिसी का और दिल्ली से कोलकाता ट्रेन से । अप्रैल मध्य तक इसकी टिकट भी ले ली हवाई जहाज की क्योंकी इस समय सही किराया मिल रहा था, बाकि ट्रेन की  चार महीने पहले  राजधानी  एक्सप्रेस टिकिट बनवा ली ।  इसके दौरान ही कश्मीर में  कर्फ्यू और लग गए । कई लोगो ने अपने स्तर पर सलाह दी । उन्होंने भी सलाह दी जो ये नहीं जानते  थे लद्दाख और श्रीनगर कितनी दूरी पर है । खैर हम आपने तय कार्यक्रम पर अडिग थे और ये मन बना लिया की अगर उस समय माहौल सही न होगा तो लद्दाख से नयी टिकट ले लेगे ।

लद्दाख के होटल बुकिंग और गाड़ी की बुकिंग में हमारे ही समूह दिल से के रमेश जी  ने बड़ी मदद की । उनके परिचित जो लद्दाख में ही किसी सरकारी नौकरी पर नियुक्त थे उन्होंने ये काम बड़े सही दाम में करवा दिया ।
लद्दाख जाने से पहले हमने सभी मित्रो को वहां होने वाली असुविधा से अवगत करना उचित समझा , वो ये थी अनुकूलता (Acclimatization)  की । चूँकि लद्दाख समुद्री तल से करीबन 13000 फिट की ऊँचाई पर स्थित है और  खरदुंगला 14500 फिट करीबन, इसलिए यहाँ इस तरह की समस्या आम बात है । कई मित्रो से इसके बारे में चर्चा हुई , मेरे बाबा जो डाक्टर है उनसे भी सलाह ली और  गूगल बाबा से भी सर्च करके पूछा गया । 

लद्दाख के पहले दिन से सफ़र में हॉल ऑफ़ फेम घुमने के बाद हम स्पितुक मोनेस्ट्री ,जिसे काली माता मन्दिर और पेथुब गलदन गुम्पा के नाम से भी जाना जाता है ,की तरफ रुख लिए / ये मोनेस्ट्री या मन्दिर लेह से करीबन 8 km की दुरी पर स्थित है । इसके करीब ही सेना का हवाई बेस कैंप भी है ,जो मोनेस्ट्री से दिखाई पड़ता है। मोनेस्ट्री तक पहुचने के लिए करीबन २५० से ३०० सीडिया चढ़नी पड़ती है ,पर इसे आप आराम से रुक चढ़ सकते है  ।पहले मोनेस्ट्री आती है फिर काली माता मंदिर । मन्दिर के प्रांगन जो ऊचाई पर स्थित है वहा से लेह के खूबसूरत नज़ारे देखने को मिलते है । जब ठंडी हवा के झोके आपको छुकर जाती है तो एक अलग ही आनंद अनुभूति होती है । मोनेस्ट्री के अंदर की प्रतिमा के फोटो लेना वर्जित है ,इसलिए आप सिर्फ बाहर और बहार के ही खूबसूरत चित्र ले सकते है

स्पितुक मोनेस्ट्री ;का निर्माण महाराजा ग्रास- पा- बूम -लदे ने १४वी सदी के अंत में कराया था  यहाँ मन्दिर में करीबन १० फूट की माँ काली की विशालकाय मूर्ति है ,जिसका चेहरा साल भर ढका रहता  । इसे सिर्फ स्पितुक त्यौहार के दिन ,जो हर तिब्बती ११ वे महीने के २६ और तारीख को खोला जाता है /इसके साथ दलाई लामा , बाकुला रिन्पोचे और शाक्यमुनि की भी प्रतिमा है ।


स्पितुक गुम्पा या काली माता मन्दिर देखने में जितना सुंदर है ,उतना ही सुंदर वहा से लेह का नजारा दिखाई देता है । मेरे साथ जो मित्र गए वो तो मैगी खाने में मस्त थे और में अपनी आदत अनुसार प्रकृति की सुन्दरता देखने में मस्त था । अब लेह आकर भी खाना ही खाना है तो भाई घर में बैठे रहो । यही फर्क होता है घुम्मकड़ और सैलानी में ,कुछ तो ३०० सीडी चढने के डर से नीचे ही रह गए । अब उन्हें क्या पता की उन्होंने क्या खोया । चलो वहा न सही अब यहाँ फोटो देखकर ही संतुष्टि कर लो भाई 

लद्दाख यात्रा के पहले दिन के सफ़र में मेरा तीसरा पड़ाव(हाल ओफ फेम और स्पितुक मोनेस्ट्री के बाद) था ,स्तोक पैलेस या मोनेस्टरी , इसके बारे में बताने से पहले एक जरुरी बात बताना चाहुगा ।
लद्दाख में घुमने के लिए जो भाड़े की गाड़ी मिलती है ,वो km या दिन के हिसाब से नहीं चलती । यहाँ टूरिज्म ऑफिस ने एक किताब प्रेषित कर रखी है , जिसमे उन्होंने जगह के हिसाब से दर तय कर रखी है ।
उदाहरण के तौर पर लद्दाख से खरदुंगला आना और जाना 4500 रुपये । लद्दाख लोकल 6 जगह घुमने का 2200 रुपये आदि । इसमें लद्दाख से श्रीनगर तक के सभी जगह के भाड़े को तय कर दिया गया है । सीजन( अप्रैल से अगस्त) में तो वाहन चालक इस दर में कोई छुट नहीं देते । पर ऑफ सीजन में इसपर अच्छी रियायत मिल जाती है ।ये पुस्तक आपको वहा के हर वाहन चालक के पास और टूरिज्म ऑफिस में मिल जायेगी । लद्दाख यातायात की दृस्टि से थोडा महंगा है , बेहतर यही होता की आप अगर दो लोग है तो बाइक भाड़े में कर सकते है ।  तो बापस आते है स्तोक  पैलेस  की  यात्रा  पर
स्पितिक मोनेस्टरी से करीबन 6km दुरी पर स्तोक प्लेस स्थित है । ये शहर से बाहर मनाली लद्दाख हाईवे वाले रस्ते में पड़ती है । इसे 1820 में नंग्याल राजबंश ने बनाया गया था । इसमें यहाँ के वर्तमान
  रहते है । और वही एक अजायबघर बना है जिसमे पुराने राजाओ से जुडी चीजे रखी है ।संग्रहालय में जाने के लिए टिकट लगती है।अब जब राजस्थान में राजा लोग अपने महल को होटल बना चुके है तो ये साहब क्यों पीछे रहे ।एक दिन रहने का लिद्य
किराया 6000 रुपये है । पर शहर से दूर होने के कारण लोग कम रुकते है सो संग्रहालय पर टिकट लगा कर रख रखाव का खर्च उठाया जा रहा है । चुकी ओक्ट में भीड़ नहीं होती और मेरे प्रेस कार्ड के कारण वहा हमे ऐसी ही जाने का मौका मिल गया

चलिए अब देखते इस सुन्दर स्थल को चित्रों की जुबानी →












































चलिए उपरोक्त जानकारी के साथ इस पोस्ट को यही खत्म करते है, आशा करता हूँ , आपको इस नई जगह के बारे पढ़कर अच्छा लगा होगा । इसी के साथ आप सभी बहुत बहुत धन्यवाद  ।
(C) किसन बाहेती

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1. रींचेनपोंग- सिक्किम... Rinchenpong, Sikkim → A Hidden Place, Information by Kishan Bahety. 
2. 108 शिव मंदिर समूह, वर्धमान (108 Shiva Temple at Nawab hat, Bardhaman, West Bengal)
3. कोलकाता का एक छुपा स्थल → तेरेत्ति बाजार (About Tiretti Bazar, Kolkata by Kishan Bahety )

Tuesday, April 23, 2019

सफ़र देहरादून का (गढ़वाल संस्मरण)→ Traveling to Dehradun (Garwal Glory) ..1

 Written by → Ritesh Gupta
 
हमारे देश भारत का एक बहुत ही खूबसूरत पहाड़ी राज्य है देवभूमि उत्तराखंड । देवभूमि इसलिये कहते है क्योकि इस राज्य के कण-कण में देवताओं का वास है । इस राज्य में प्रसिद्ध चार धाम तीर्थ स्थल है तो पवित्र गंगा और यमुना नदी का उद्गम भी यही से होता है । इस राज्य में देश के प्रमुख धार्मिक स्थल है और साथ ही साथ विश्व विख्यात पर्यटक स्थल भी है ।  इस खूबसूरत राज्य को मंडल के आधार पर दो भागो में विभक्त किया गया हैं, पहला गढ़वाल और दूसरा कुमाऊँ । गढ़वाल मंडल में सात और कुमाऊँ मंडल में छह  जिले आते हैं । उत्तराखंड के दूसरे भाग "कुमाऊँ" की काफी स्थलों की यात्रा कर चुका हूँ  और यहाँ की यात्रा के बारे में अपने ब्लॉग पर सचित्र वर्णन भी कर चुका हूँ । अब बात आती है गढ़वाल भाग की और इस बार हमने अपना यात्रा कार्यक्रम भी सपरिवार गढ़वाल की काफी जगहों को घूमने के लिए बनाया । आगे ये श्रंखला मेरी गढ़वाल यात्रा से ही प्रेरित है और आप लोगो अपनी इस यात्रा के बारे में काफी कुछ जानने को मिलेगा । चलिये आज आप लोगो को ले चलते देहरादून की यात्रा पर -

गुड़गाँव में दिल्ली के रास्ते एयरपोर्ट के पास सूर्योदय ( Sunrise on the way near Delhi Airport)

Thursday, April 4, 2019

कात्यायनी देवी मंदिर, छतरपुर, दिल्ली (Katyayani Devi Temple,Chhatarpur, Delhi)

 Written by → Ritesh Gupta 

हमारे शहर आगरा के नजदीक है देश की राजधानी दिल्ली, नजदीक इसलिए क्योकि अब छह लाइन का यमुना एक्सप्रेसवे आगरा से दिल्ली को जोड़ता है और कम समय में आगरा से दिल्ली पहुंचा जा सकता है । कई बार अपने कार्य से दिल्ली जाना हुआ है पर आज तक कभी अच्छे से दिल्ली और यहाँ को पर्यटक स्थलों को सही से नहीं घूम पाया है, कभी कुछ घूम लिया तो कभी कुछ । वैसे दिल्ली में कुतुबमीनार ,अक्षरधाम, इंडियागेट, लाल किला आदि का भ्रमण किया हुआ है । अब दिल्ली में पहले की अपेक्षा काफी अच्छे आधुनिक और एतिहासिक पर्यटक स्थल बन गये है और वो काफी प्रसिद्ध भी हो रहे है । एक बार एक विवाह समारोह में शामिल होने के लिए बस के द्वारा दिल्ली के छतरपुर जाना हुआ उसी दौरान पास में स्थित श्री कात्यायनी देवी मंदिर के दर्शनों का सौभाग्य प्राप्त हुआ ।

श्री आध्य माँ कात्यायनी देवी मंदिर (Maa Katyayani Devi Temple,  Chhatarpur, Delhi)

Friday, February 8, 2019

कश्मीर का सुहाना सफर - अंतिम भाग ( Return from Kashmir via Road.. 11)

Written By Ritesh Gupta

इस श्रंखला को प्रारम्भ से पढ़ने के लिए यहाँ पर क्लिक कीजिये । कश्मीर की यात्रा हम लोगो के लिए बहुत अच्छी रही  । जितना सम्भव हो सका कश्मीर की उतनी जगह को हम लोगो ने अपनी इस यात्रा में जोड़ा और उस जगह का भ्रमण भी किया । कश्मीर की ये यात्रा हम लोगो के लिए बहुत अच्छी रही और कही अधिक परेशानी नही उठानी पड़ी , एक तरह से यह यात्रा हम लोगो के लिए बिल्कुल सफल रही और खूबसूरत यांदो के समेट भी लिया । अब प्रस्तुत है इस श्रंखला का अंतिम लेख - जिसमे हम लोगो ने कश्मीर से वापिसी की यात्रा का वर्णन किया है :-


चिनाब नदी पर बना बगलिहार डैम का नजारा कारमील नाम की जगह के एक रेस्तरा से (Baglihar dam from A Restra onthe way to Jammu)

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