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Wednesday, October 28, 2015

पर्वतीय नगर दार्जीलिंग की सैर (Sight Seen of Darjeeling Hill Station, West Bengal)

Written by → Ritesh Gupta 
यात्रा दिनांक 26जून2014
दार्जीलिंग (Darjeeling) एक विश्व विख्यात पर्वतीय नगर जो हमारे देश के पश्चिम बंगाल राज्य के उत्तरी दिशा में और सिक्किम राज्य की ठीक सीमा के नीचे पर्वतराज कंचनजंघा के साये में बसा हुआ है । जिसे प्रकृति ने हमे खुले हाथो से भरपूर प्राकृतिक संसाधनो से सजाया-संवारा है, यहाँ के  मनोरम प्राकृतिक वातावरण और शीतल जलवायू के कारण हजारो की संख्या में पर्यटक स्वयं खिंचे चले आते है । पिछले पोस्ट में आपने पढ़ा के हम लोग गंगटोक, सिक्किम से टैक्सी के माध्यम दार्जीलिंग पहुँच गये । चलिए अब आपको भी ले चलते है, पश्चिम बंगाल के महत्वपूर्ण स्थल दार्जिलिंग की स्थानीय स्थलों की यात्रा पर -
A beautiful temple seen from Darjeeling station (स्टेशन से नजर आता एक मंदिर )
हिमालय के शिवालिक पर्वतमाला की वादियों में सागर सतह से 6700 फिट (करीब 2042 मीटर) की उंचाई पर बसा पर्वतीय नगर दार्जीलिंग पश्चिम बंगाल के मुख्य शहर सिलीगुड़ी से 80 किमी०, न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन से 90 किमी० और गंगटोक से 97 किमी० दूर स्थित है । दार्जीलिंग के सबसे निकटम बड़ी लाइन का (Broad Gauge Line) रेलवे स्टेशन न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन है, जो देश के प्रमुख शहरो जैसे दिल्ली, कानपुर, पटना, कोलकाता, गुवाहटी आदि से भलीभाति नियमित रेल सेवाओ के माध्यम से जुड़ा हुआ है। यहाँ की समशितोष्ण जलवायू के कारण ब्रिटिश अधिकारियो के आरामगाह के रूप में इस दार्जीलिंग पर्वतीय नगर को बसाया गया था । ब्रिटिशकाल में मैदानी इलाको से इस नगर तक आवागमन के लिए असमान पहाड़ी रास्ते और घाटियों के बीच अंग्रेजो ने एक छोटी लाइन की खिलौना गाड़ी का निर्माण भी कराया जो आज यहाँ का मुख्य आकर्षण है । अन्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त "दार्जीलिंग चाय" का नाम तो सुना ही होगा जो यहाँ के ठन्डे इलाके में बहुतायत से पैदा और तैयार की जाती है ।

कंचनजंघा पर्वत के छाया में बसे दार्जिलिंग का मुख्य आकर्षण है, यहाँ की (Toy Train) पर्वतीय खिलौना गाड़ी । जो यहाँ यात्रियों को रोमांचक और अनूठे पहाड़ी सफर का लुफ्त तो देती है, साथ ही साथ एक स्थान से दूसरे पहाड़ी कस्बो में लाने और ले जाने का काम भी करती है । दार्जीलिंग रेलवे स्टेशन दो फुट चौड़ी नैरोगेज की लाइन से सीधे न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन को दार्जीलिंग हिमालयन रेलवे द्वारा संचालित किया जाता है । रेल से न्यू जलपाईगुड़ी से दार्जीलिंग की दूरी करीब 78 किमी० है, और इस बीच ट्रेन 13 स्टेशनो (न्यू जलपाईगुड़ी, सिलीगुड़ी टाउन, सिलीगुड़ी जंक्शन, सुकना, रोंगतोंग, तीन, धारिया, गयाबरी, महानदी, कुर्सियांग, तुंग, सोनाडा, घूम और दार्जीलिंग) रूकती है। घूम स्टेशन भारत का सबसे ऊंचाई पर स्थित रेलवे स्टेशन है विश्व विरासत स्थल संस्था ने "दार्जीलिंग हिमालयन रेलवे" को सम्मान सहित अपनी सूची में शामिल किया हुआ है । हमारी यात्रा के दौरान रास्ते में कही पहाड़ गिर जाने के कारण इस खिलौना गाड़ी का संचालन न्यू जलपाईगुड़ी से काफी लम्बे समय से बंद पड़ा हुआ था । इस समय केवल दार्जिलिंग से कुर्सियांग तक ही रेलों का अवागमन अपनी नये समय सारिणी के अनुसार सुचारू था ।

उपरोक्त जानकारी हुयी दार्जीलिंग के बारे में । अब चलते है अपने यात्रा वृतांत पर । समय दोपहर के बारह बज रहे थे और हम लोग सामान सहित दार्जीलिंग के रेलवे स्टेशन पर खड़े हुए थे और इस समय जरूरत सर पर एक छत की सो बाकि लोगो को वाही छोड़कर मैं और अनुज कमरे ढूढने के लिए चल दिए । स्टेशन के पास कुछ होटल देखे भी पर सभी कमरों से सीलन और अजीब से बदबू आ रही थी और कमरों के हिसाब मूल्य भी अधिक था । खैर कुछ देर इधर-उधर देखते हुए एक होटल पास ही के पेट्रोल पम्प के पीछे मिल गया । ये होटल भी कुछ खास नहीं था पर जो कमरे पहले देखे उनकी अपेक्षाकृत काम चलाऊ था । होटल का नाम था "होटल ग्रोव हिल" पर इसका मालिक या मैनेजर कुछ खडूस किस्म का था, एक रूपये की भी छूट न दी इसने | खैर हमारे पास समय की बहुत कमी थी सो जल्दी में इसे लेना पड़ा, कुल पांच परिवार के हिसाब से पांच कमरे किराये पर लिए गये । कुछ देर आराम करने व व्यवस्थित होने के बाद स्थानीय दार्जीलिंग शहर को घूमने के लिए उसी टैक्सी चालक को फ़ोन किया, जो हमे गंगटोक से दार्जीलिंग लेकर आया था ।

ठीक दो बजे के आसपास टैक्सी आ गयी और हम लोग चल दिए दार्जीलिंग शहर घूमने । वैसे यहाँ पर घूमने हुए हमने देखा की यहाँ के लोगो में अपनी दुकान पर शहर के नाम के साथ राज्य का "गोरखालैंड" लिख रखा था । मालूम किया तो पता चला की यहाँ के लोग कई सालो से उत्तरी पश्चिमी बंगाल को अलग कर नये राज्य गोरखालैंड की मांग कर रहे है और उनका ये आन्दोलन लगातार जारी भी है, इसलिए यहाँ के स्थानीय लोगो अपने आप को नये राज्य गोरखालैंड में मानते है । खैर हम लोग टैक्सी से सबसे पहले पहुंचे एक चाय बगान (Tea Garden) में, जो पर्यटकों के दर्शन हेतु खोल रखा था । वैसे अधिकतर चाय बगान यहाँ के लोगो की निजी सम्पत्ति होती है और उन्हें मालिक से आज्ञा लेकर ही देखा जा सकता है । पहाड़ी ढलानों पर बने ये बगान बेहद ही खूबसूरत नजर आ रहे थे और सामान ऊँचाई के चाय के पौधे दूर तक एक सामान हरियाली का द्रश्य प्रस्तुत कर रहे थे । हम लोगो भी बगान के ढलानों पर जा पहुंचे और कैमरे से फोटोग्राफी शुरू हो गये । कुछ देर बाद ही बारिश शुरू हो गये, जोर-जोर से बिजली कड़कने लगी । साथ लाये छातो से कुछ बचाव करने की कोशिश की तो खुले में जाते है, आसमानी बिजली कड़कने से हाथ में जोर से करंट का झटका लगा । खैर जल्दी से सड़क तक एक पहुँचकर एक चाय वाले दुकान में शरण ली । वही से दार्जीलिंग की ताजा पत्तियों की चाय पी और कुछ पैकेट चायपत्ती के घर ले जाने के लिए खरीदे ।

कुछ देर बाद बारिश बंद हुई तो यहाँ से निकलकर हम लोग अपने अगले दर्शनीय स्थल तेनजिंग रॉक (Tenzing Rock HMI) पहुंचे । यहाँ पर एक बड़ी चट्टान पर जिस पर प्राम्भिक छात्रो को प्रशिक्षण दिया जाता है और साथ ही साथ पर्यटकों को रस्सी के सहारे इस चट्टान पर चढ़ने (Rock Climbing) का रोमांचक अनुभव प्रशिक्षित लोगो द्वारा दिया जाता है । यहाँ पर भी एक स्थानीय वस्तुओ और खाने-पीने का एक अस्थाई छोटा सा बाज़ार विकसित है । छुट-पुट बारिश के बीच तेनजिंग रॉक के घूमने के बाद हम लोग यहाँ के शहर से 3 किमी० दूर सिंगामरी नाम के स्थान पर पहुँच जाते है, जहाँ पर भारत लम्बी रोपवे है ।

दार्जीलिंग उड़नखटोले (Darjeeling Roapway Cable Car)  को रंगीत वैली केविल कार के नाम से भी जानते है । ये रोपवे सिंगामरी (Altitude 7000 Ft) से सिंगला बाज़ार (Altitude 800 Ft) तक आठ किमी० की दूरी लगभग 45 मिनिट में पूरी करती है । इस 45 मिनिट के सफर में दार्जिलिंग के बेहद खूबसूरत पहाड़ो, नदियां और घाटियों के लुभावने द्रश्यो से मन विभोर हो जाता है । पर हमारी किस्मत आज गुरुवार होने के कारण केविलकार परिचालन बंद था, सो बाहर से ही देखकर हम लोग उसी रास्ते पर कुछ दूर स्थित सेंट जोसेफ स्कूल (Famous St. Joseph's School of Darjeeling) देखने पहुँच गये । यह दार्जीलिंग का सबसे प्रसिद्ध और महंगा स्कुल है । इस स्कुल की खासियत है, इसकी की शानदार और खूबसूरत बनाबट । हमारे टैक्सी चालक ने बताया की यहाँ पर यारियां फ्लिम की शूटिंग हुई थी ।

कुछ देर बाद यहाँ से निकलने के बाद हम अपने अगले दर्शनीय स्थल जापानी बौद्ध मंदिर  (Japanese Buddha Temple)  और शांति स्तूप (Peace Pagoda) पहुँच गये । ये दोनों जगह एक ही स्थान पर है और शहर से केवल दस से पन्द्रह किमी० दूरी पर स्थित है । मुख्य गेट से करीब 5-6 मिनिट के पैदल चलने के बाद मुख्य मंदिर परिसर में पहुँच जाते है । जापानी बौद्ध मंदिर एक दो मंजिला भवन है, जहाँ पर मुख्य प्राथर्ना कक्ष प्रथम मंजिल पर है । इस मंदिर का निर्माण फूजी गुरुजी द्वारा सन 1972 पूर्णत जापानी शैली में किया था, इसलिए इसे जापानी बौद्ध मंदिर या Nipponzan Myohoji Buddhist Temple भी कहते है । समय शाम के पांच बजे का रहा होगा और मंदिर की प्रथम मंजिल से प्राथर्ना की स्वर ध्वनियां प्रसारित हो रही थी ।  हम लोग भी मंदिर के प्रथम तल पर पहुँच गये । वहां पर कुछ पुजारी प्राथर्ना में लीन थे और एक अजीब से चमड़े के वाध्य यंत्र को एक छोटी से डंडी से एक स्वर में पीटकर और उच्च स्वर में "ना मू मयो हो रेन गे क्यो" मन्त्र का उच्चारण कर रहे थे । हम लोगो को देखकर उन्होंने पीछे फर्श पर बैठने और प्राथर्ना में सम्मिलित होने का इशारा किया । हम लोगो ने भी सामने पड़े वाध्य यंत्र को लेकर बजाने लगे और पुजारी जी के साथ मन्त्र का उच्चारण करने लगे । करीब पंद्रह मिनिट के बाद हम लोग बोर होने लगे तो एक- एक करके वहां से वापिस हो लिए ।

मंदिर परिसर के चारो तरफ ऊँचे-ऊँचे पहाड़ी वृक्षों की भरपूर हरियाली से यहाँ का शमा बहुत खूबसूरत नजर आ रहा था । जापानी बौद्ध मंदिर दांये तरफ कुछ दूर स्वेत रंग का शांति स्तूप नजर आ रहा है, गोल गुम्बद और अपनी अनूठी सरंचना के कारण ये स्तूप दूर ही शानदार नजर रहा था । मंदिर से निकलने के बाद हम लोग शांति स्तूप पहुँच गये । शांति स्तूप पर महात्मा बुद्ध के चार अवतारों को दर्शाया गया है । ये दार्जीलिंग का सबसे ऊँचा स्वतंत्र निर्माण है और इस स्तूप की ऊँचाई 28.5 मीटर और परिधि 23 मीटर है । जापान के नागासाकी और हिरोशिमा में भीषण परमाणु बम विस्फोट के बाद फूजी गुरूजी ने विश्वभर शांति फ़ैलाने के विश्वभर में शांति स्तूपो के निर्माण का संकल्प लिया था । इसी संकल्प में इस शांति स्तूप का भी निर्माण फूजी गुरूजी के प्रधान शिष्य निप्पोजान म्योहोजी ने सन 1992 करवाया था । इसी तरह के सामान आकृति और डिजायन और भी  कई स्तूप देश और विदेश में बने हुए है ।

कुछ सीढ़िया चढ़ने के बाद हम लोग स्तूप के सबसे उपरी भाग में पहुँच जाते है । स्तूप के गोल गुम्बद पर एक बड़े से आले में चारो दिशाओ में बुद्ध के चारो अवतारो की स्वर्ण रंग के प्रतिमाये विराजमान थी तथा बाकि बीच की खाली जगह में लकड़ी पर कलाकारी (काष्ठ कला) कर महात्मा बुद्ध की जीवन रचनाओ को दर्शाया प्रस्तुत गया था । स्तूप के जी ऊंचाई पर हम लोग खड़े हुए ये काफी ऊंचाई थी , यदि मौसम साफ़ रहे तो यहाँ से कंचनजंघा पर्वत के दर्शन हो जाते है । वैसे भी इतनी ऊंचाई से दिखने वाले द्रश्य कम नयनाभिराम नहीं थी । दूर तक की फैली घाटियाँ, चारो तरफ की हरियाली और स्वच्छ मंदिर परिसर अपनी अलौकिक छटा बिखेर रहे थे । समय काफी हो चुका था, शाम के छह बज जाने के कारण अब चारो और अंधकार फ़ैल रहा था सो इस स्थान से विदा लेकर कर हम लोग  वापिस चल दिए ।

लगभग आज के सारे घूमने वाले हमारे स्थल पूरे हो चुके थे, सो कार  चालक से कहा की अब आप हमे मॉल रोड पर छोड़ देना तो उसने कहा की शाम के समय वहां पर गाड़िया नहीं जाने देते, फिर भी आप लोगो को मैं मॉल रोड के सबसे नजदीक छोड़ दूंगा । इतनी बाते कर हम लोग टैक्सी बैठकर अपने अगले गन्तव्य स्थल की तरफ रवाना हो गये ।

अब आपके लिए प्रस्तुत है, इस यात्रा के दौरान खींचे गए कुछ चित्रों  और चलचित्र  का संकलन →   

स्टेशन के पास के होटल से नजर आता पेट्रोल पम्प (A Petrol Pump Near by Railway Station)
एक चाय का बगान (A Tea Garden, Darjeeling)
हरी चाय की पत्तियां (Tea Leaves at Tea Garden)
 चाय बगान से नजर आता दार्जीलिंग का एक रेस कोर्स (A Race Course view from Tea Garden)
पहाड़ो पर पाई जाने विशेष फर्न के पत्तियां
तेनजिंग रॉक - एक सैलानी पॉइंट (Tenzing Rock HMI tourist point)
दार्जीलिंग का प्रसिद्ध सेंट जोसेफ स्कूल (Famous St. Joseph's School of Darjeeling)
दार्जीलिंग का प्रसिद्ध सेंट जोसेफ स्कूल (Famous St. Joseph's School of Darjeeling)
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स्वेत रंग का बौद्ध शांति स्तूप (Peace Pagoda, Darjeeling)
बौद्ध शांति स्तूप (Peace Pagoda, Darjeeling)
जापानी बौद्ध मंदिर (Japaneses Buddha Temple, Darjeeling)
जापानी बौद्ध मंदिर अन्दर का द्रश्य (Inside Japanese  Buddha Temple, Darjeeling)
मंदिर के बगीचे में एक सुन्दर सफेद पुष्प (White beauty - A Flower at Temple Garden)
बौद्ध शांति स्तूप (Peace Pagoda, Darjeeling)
 शांति स्तूप जानकारी देता एक बोर्ड  (Information board at Peace Pagoda, Darjeeling)
गौतम बुद्ध की स्वर्ण वर्ण की एक प्रतिमा शांति स्तूप पर (Golden Color Statue of Buddha at Peace Pagoda)
गौतम बुद्ध की स्वर्ण वर्ण की आराम मुद्रा में प्रतिमा शांति स्तूप पर (Golden Color Statue of Buddha in Rest Mode at Peace Pagoda)
शांति स्तूप पर एक अन्य प्रतिमा (Another Statue at Stupa)
शांति स्तूप के पिछले हिस्से में स्थापित ध्यानमग्न बुद्ध की प्रतिमा (A Buddha Statue at back side of the Stupa)
लकड़ी पर कारीगरी से दर्शायी बुद्ध का एक संस्मरण (wooden Carving at stupa)
स्तूप से नजर आता जापानी मंदिर (A View from Peace Pagoda, Darjeeling)
स्तूप से नजर आता एक सुन्दर द्रश्य  (A View from Peace Pagoda, Darjeeling)
स्तूप से नजर आता एक सुन्दर द्रश्य  (A View from Peace Pagoda, Darjeeling)
रात के समय दार्जीलिंग का मॉल रोड और बाज़ार, जो की आज (गुरुवार) बंद था (A Mall Road at Darjeeling at Night)

चलिए अब इस लेख को यही समाप्त करते है, अगले लेख में आप लोगो को ले चलेंगे दार्जिलिंग और भी खूबसूरत स्थलों की सैर पर  आशा करता हूँ, आपको यह लेख पसंद आया होगा, यदि अच्छा लगे तो टिप्पणी के माध्यम से विवेचना जरुर करे। जल्द ही मिलते है, इस श्रृंखला के अगले लेख के साथ, तब तक के लिए आपका सभी का धन्यवाद  !
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गंगटोक (सिक्किम), दार्जिलिंग श्रृंखला के लेखो की सूची :  
3. एक नजर, गंगटोक शहर, सिक्किम (Sight Seen to Gangtok City, Sikkim) 
4. गंगटोक शहर के स्थानीय स्थलों का भ्रमण, सिक्किम (Sight Seen to Gangtok City, Sikkim) 
5. बाबाबा हरभजनसिंह मंदिर, सिक्किम-Baba HarbhajanSingh Temple (Travel to East Sikkim, Gangtok) 
6. छंगू झील का सफ़र, सिक्किम - Tsomgo Lake (Travel to East Sikkim, Gangtok)
7. गंगटोक से दार्जिलिंग का सफ़र (Travel to Darjeeling, West Bengal )
8. पर्वतीय नगर दार्जीलिंग की सैर (Sight Seen of Darjeeling Hill Station, West Bengal)
9. प्रकृति से मुलाकात - दार्जीलिंग नगर की सैर में  (Sight Seen of Darjeeling, West Bengal)   
10. दार्जीलिंग नगर की सैर - नये स्थलों के साथ  (Siight Seen of Darjeeling 2, West Bengal)  
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Darjeeling City on the Map

18 comments:

  1. बला की खूबसूरती पायी है दार्जिलिंग ने,हरे रंग का आकर्षण गजब ढा रहा है,कड़कती हुई बिजली के बीच हाथ में करंट लगने की घटना ने यात्रा में रोमांच ल दिया

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    1. धन्यवाद हर्षिता जी...... सही कहा आपने दार्जीलिंग ने बाला की खूबसूरती पाई है |

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  2. दार्जिलिंग के बेहतरीन नजारे दिखा दिए आपने, खिलौना रेल गाड़ी तो कई फिल्मों मे दिखाई देती रही है।
    बहुत सुंदर पोस्ट।

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    1. धन्यवाद सचिन भाई..... | खिलौना रेल ही दार्जीलिंग की पहचान है

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  3. चित्र इतने सुन्दर है की सोच रही हूँ की दार्जलिंग कितना सुंदर होगा। केबल कार न घूमने का मुझे अफ़सोस है वरना वहां के भी चित्र देखने को मिल जाते।

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    1. बुआ जी.... अब आप भी हो ही आओ दार्जीलिंग | वैसे हमे केबिल कार में घूमने का कोई शौक नही है और होती भी कुछ जायदा महगी है | धन्यवाद

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  4. कुछ तो खाश बात है दार्जलिंग क तभी अंग्रेजो ने इसे ग्रीष्मकाल के आरामगाह के लिए चुना होगा ।
    वो खाश बाते आपके पोस्ट पढ़कर समझ आ रही ।
    आपकी पोस्ट पढ़ने में इसीलिए मजा आता है क्योकि यात्रा की विस्तृत जानकारी के साथ उस स्थान की भी बिस्तृत जानकारी आप लिखते है ।
    अगली पोस्ट का इन्तजार रहेगा ।


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    1. आपका बहुत बहुत शुक्रिया किशन जी....| यह मेरी यहाँ की दूसरी यात्रा थी |

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  5. Nice post Ritesh ji. It tempted me to go there as soon as possible. Let's see when this dream comes true. Pictures are really alluring and the description is equally interesting as usual.

    Thanks.

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    1. Thanks a Lot Mukesh ji. You must go to darjeling. It is wonderful & beautiful Hill Station.

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  6. बढिया सैर, शुभकामनाएं।

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    1. आपका बहुत धन्यवाद जी.....

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  7. लगभग 10 वर्ष पहले गया था दार्जिलिंग लेकिन न तब ब्लॉग लिखने का कोई इरादा था न पता था ब्लॉग के बारे में ! बस गुवाहाटी से आते समय कुछ जापानी लोगों से , जापानी भाषा जानने के कारण मित्रता हुई और उनके साथ निकल गया था ! ज्यादा नही घूम पाया था लेकिन जापानी मंदिर देखा था ! बहुत खूबसूरत जगह है दार्जिलिंग और उतनी ही खूबसूरती से आपने इसका वृतांत भी लिखा है मित्रवर रितेश जी !!

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    1. धन्यवाद योगी जी...

      ये मेरी इस प्रदेश की दूसरी यात्रा थी | दार्जीलिंग अब भी पहले जैसा ही खूबसूरत है |
      जापानी भाषा आपने कही सीखी हुई है क्या ?
      धन्यवाद

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  8. तीन वर्षों पहले मैंने भी दार्जिलिंग की यात्रा की थी, यादें ताजा हो गयी। सचमुच अद्भुत जगह है और अद्भुत तरीके से आपने लिखा भी है।

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