Search This Blog

Tuesday, April 23, 2019

सफ़र देहरादून का (गढ़वाल संस्मरण)→ Traveling to Dehradun (Garwal Glory) ..1

 Written by → Ritesh Gupta
 
हमारे देश भारत का एक बहुत ही खूबसूरत पहाड़ी राज्य है देवभूमि उत्तराखंड । देवभूमि इसलिये कहते है क्योकि इस राज्य के कण-कण में देवताओं का वास है । इस राज्य में प्रसिद्ध चार धाम तीर्थ स्थल है तो पवित्र गंगा और यमुना नदी का उद्गम भी यही से होता है । इस राज्य में देश के प्रमुख धार्मिक स्थल है और साथ ही साथ विश्व विख्यात पर्यटक स्थल भी है ।  इस खूबसूरत राज्य को मंडल के आधार पर दो भागो में विभक्त किया गया हैं, पहला गढ़वाल और दूसरा कुमाऊँ । गढ़वाल मंडल में सात और कुमाऊँ मंडल में छह  जिले आते हैं । उत्तराखंड के दूसरे भाग "कुमाऊँ" की काफी स्थलों की यात्रा कर चुका हूँ  और यहाँ की यात्रा के बारे में अपने ब्लॉग पर सचित्र वर्णन भी कर चुका हूँ । अब बात आती है गढ़वाल भाग की और इस बार हमने अपना यात्रा कार्यक्रम भी सपरिवार गढ़वाल की काफी जगहों को घूमने के लिए बनाया । आगे ये श्रंखला मेरी गढ़वाल यात्रा से ही प्रेरित है और आप लोगो अपनी इस यात्रा के बारे में काफी कुछ जानने को मिलेगा । चलिये आज आप लोगो को ले चलते देहरादून की यात्रा पर -

गुड़गाँव में दिल्ली के रास्ते एयरपोर्ट के पास सूर्योदय ( Sunrise on the way near Delhi Airport)

यात्रा का पहला दिन (21 जून ) →

मेरी इस पारिवारिक यात्रा का शुभारम्भ उत्तरप्रदेश के आगरा से होता है क्योकि मैं आगरा का ही मूल निवासी हूँ । गढ़वाल की इस यात्रा में मेरा छोटा भाई अनुज भी मेरे साथ ही परिवार सहित जा रहे थे सो सबसे पहले हम लोगो को आगरा से गुड़गाँव (गुरुग्राम तो अब हुआ है, जब हम लोग गये थे गुड़गाँव नाम ही था), हरियाणा में स्थित छोटे भाई के घर पहुँचना था, वही से दूसरे दिन सुबह तड़के ही किराए की एक टैक्सी गाड़ी "इन्नोवा" से अपनी यात्रा परिवार सहित आरम्भ करनी थी । आगरा में मंगलवार के दिन दोपहर तीन बजे हम लोग अपने स्थानीय साधन ऑटो से आगरा के अंतर्राज्यीय बस स्नाथक (ISBT, Agra) पर पहुँच गये गये। बस अड्डे पर  गुड़गाँव (गुरुग्राम) वाली हरियाणा रोडवेज की बस कुछ लेट आई तो इस कारण से चार बजे के आसपास आगरा से हम लोगो का  निकलना हो पाया । आगरा से मथुरा, पलवल, सोहना गाँव होते हुए रात के नौ बजे गुड़गाँव (गुरुग्राम) के बस अड्डे पर पहुँच गये । वैसे गुड़गाँव में प्रवेश करते ही एक बड़े शहर वाली बीमारी चारो तरफ नजर आई, वो है रास्ता जाम मिलना, सबसे ज्यादा जाम हौंडा चौक पर मिला था इस कारण से हम लोग और अधिक लेट हो गये  थे । खैर गुडगाँव के बस अड्डे पर अनुज लेने आ पहुँचा था सो उसी के कार से घर पहुँच गये । रात का खाना घर आते समय ही बाजार से ही पैक करवाकर ले आये थे, सो साथ मिलकर खाना खाया और अगले दिन के लिए टैक्सी गाड़ी के बारे में और आगे देहरादून से कहाँ - कहाँ घूमना है इस योजना पर बातचीत हुई । दूसरे दिन हम लोगो सुबह तड़के निकलना था सो अब बातचीत बन्द करके सोना पड़ा । इस तरह से आगरा से गुरुग्राम, हरियाणा तक की हमारी यात्रा का पहला दिन समाप्त हुआ  ।

यात्रा का दूसरा दिन (22 जून) →

दूसरे दिन सुबह जल्दी उठने के पश्चात सबसे पहले टैक्सी वाले को फोन करके उसके आने के बारे में पूछा कि "कितनी देर में आ रहे हो" तो उसने हम लोगो आधा घंटे आने का समय दे दिया । इस बीच हम सभी लोग तैयार हो गए और अपना सारा सामान और नास्ता पैक कर लिया गया । गाड़ी वाला भी अपनी इन्नोवा लेकर अपने दिए निर्धारित समय पर आ गया, जल्द ही गाड़ी में हम लोगो ने अपना सारा सामान व्यवस्थित किया, बड़ा समान छत पर बांध दिया और छोटे बैग गाड़ी के अंदर रख लिए । करीब पौने छह बजे हम लोग अपनी यात्रा पर निकल लिए । सुबह के समय शहर की सड़के खाली पड़ी हुई थी और दुकाने भी बंद थी । सुबह के समय जल्दी निकलने का यही फायदा होता की जाम नही मिलता है । हमारी गाड़ी सड़क पर तेजी से दौड़ी चली जा रही थी और भौर का सूर्यदेव भी अब एक ऊँची ईमारत के पीछे से झाँकते नजर आ रहे थे । दिल्ली के हवाई अड्डे के पास से निकलते हुए आराम से दिल्ली को पार करके अब गाजियाबाद क्षेत्र में आ गये थे। हमारी इस यात्रा में गुरुग्राम से देहरादून की दूरी गाजियाबाद, मेरठ बायपास, खतौली बायपास , मुजफ्फरनगर बायपास और सहारनपुर बायपास होते हुए करीब 280 किमी की है जिसमे करीब पांच से छह घण्टे लगने थे । गाजियाबाद से निकलने के बाद सुबह के साढ़े आठ बजे के आसपास नाश्ते के लिये हम लोग देहरादून मार्ग पर खतौली बायपास पर स्थित  'झिलमिल फूड कोर्ट" नाम के एक प्रसिद्ध जलपानगृह पर रुके । यहाँ पर आलू के पराँठे और चाय से सुबह का नाश्ता करके अपनी हल्की भूँख को मिटाया गया । इस  का नाश्ता और खाना पीना काफी स्वादिष्ट लगा । ये झिलमिल फूड कोर्ट भी अच्छे सजाया- सँवारा गया था, एक छोटा सा बगीचा, खूबसूरत फूलों के पेड़-पौधे, घास का छोटा सा लॉन आदि जिसमे हमारे बच्चे लोग अपनी फोटो खिंचवाने में रम गये । यहाँ से नाश्ता-पानी के उपरांत अपनी यात्रा को अनवरत जारी रखा, एक जगह इकबालपुर के पास रेलवे का सड़क फाटक बंद मिला, जहाँ से काफी देर बाद एक मालगाड़ी गुजर जाने के बाद ही निकलना हो पाया । रेलवे लाइन के पास टहलते समय फाटक से गुजरती हुई मॉल गाड़ी का एक फोटो तो हमने ले ही लिया था ।

सहारनपुर के बायपास से निकलते हुए कुछ देर बाद ही  कुछ हल्का-फुल्का पहाड़ी और जंगली एरिया शुरू हो गया और हम लोग उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड की सीमा के अंदर प्रवेश कर गये, ये जंगली क्षेत्र "राजा जी नेशनल पार्क" का ही हिस्सा है जो अपने जंगली हाथियों के लिए प्रसिद्ध है । सड़क के दोनों तरफ काफी हरियाली फैली हुई थी और आकाश बादलो से भरे होने के कारण बारिश आने का पूरा अंदेशा बना हुआ था । ये नेशनल पार्क का ये क्षेत्र पार करने के बाद हम लो देहरादून शहर में बारह बजे के आसपास प्रवेश कर गये और तभी जोर से झमाझम बारिश शुरू हो गयी । गाड़ी के उपर कैरियर पर लगा हमारा समान भी भीग गया, तेज बारिश की वजह से हम लोग एक जगह रुक गये । जब कुछ देर बाद बारिश बंद हुई तो एक बजट होटल की तलाश शुरू हुई, वैसे हम लोगो ने सोचा था की ऑनलाइन कमरा बुक कर लेंगे पर किसी कारणवश न कर पाए । देहरादून शहर में कई जगह होटल तलाश किये, कुछ जगह बिल्कुल भरी हुई थी कुछ जगह बहुत महंगी मतलब बजट से बाहर । लगभग देहरादून शहर का एक चक्कर पूरा ही लगा लिया उसके बादहम लोगो को प्रिंस चौक के पास एक होटल में दो कमरे अपनी रेट में मिल ही गये , उस होटल का नाम है "होटल दून रेजेन्सी" Hotel Doon Regency, Near Prince Chowk, Dehradun । ये होटल और इसके कमरे हम लोगो को सही लगे, होटल नीचे एक रेस्तरा और कुछ स्थानीय दुकाने थी और होटल के कमरे ऊपर बने हुए थे । होटल मै ही कार पार्किंग की सुविधा भी है सो गाड़ी को अंदर के तरफ लगवा दिया और अपने ड्राइवर से कह दिया था की अभी आप खाना खा लो और हम भी खाना खा लेते है फिर उसके बाद "गुच्चू पानी  (Robber's Cave)" घूमने जायेगे, जो की देहरादून का एक प्रसिद्ध जगह है । 

दोपहर के तीन बज रहे थे और सभी लोगो को भूँख भी लग रही थी, कमरे में अपना सामान रखने के बाद खाने के लिए एक रेस्तरा ढूढूने निकल गये क्योकि उस समय होटल का रेस्तरा बंद था । होटल के आसपास ही एक रेस्तरा  मिल गया, उस समय यहाँ पर गर्म खाना बन भी रहा था सो यही पर दोपहर का खाना खाया गया, खाना यहाँ का हम लोगो को अच्छा और स्वादिष्ट लगा । खाना खाने के उपरांत हम लोग तैयार होने अपने कमरों में चले गये । शाम के चार बजे हम लोग तैयार होकर चलने के लिए नीचे आ गये पर उस समय हमारी गाड़ी का ड्राइवर गाड़ी पर नहीं था और न ही उसका फोन लग रहा था । काफी देर इन्तजार के करने के बाद वो आया तो उसने बताया की चौराहे के पार वो किसी काम से चला गया है और  कहा कि "रात को आपको आगे ले जाने के लिए हरिद्वार से हमारा एक दूसरा ड्राइवर आएगा और ये गाड़ी उसके देखरेख में देकर मै उसकी गाड़ी से वापिस दिल्ली लौट जाऊंगा "। हमने कहा, "ठीक है", फिलहाल हम लोगो को अभी "गुच्चू पानी गुफा" ले चलो "।


जहाँ हम लोग ठहरे थे वहां से इस जगह की दूरी केवल दस किलोमीटर थी, सो  जायदा समय नहीं लगना था । सभी लोगो के गाड़ी में बैठते ही हम लोग अपनी मंजिल की तरफ चल पड़े और देहरादून के बाजारों और बाहर के नजारों को देखते हुए करीब बीस मिनिट के बाद हम लोग "गुच्चू पान" पहुँच गये, पार्किंग में प्रवेश करने से पहले पार्किंग शुल्क चुकाया गया और गाड़ी खड़ी करने के लिए जगह देखने लगे तभी तेज गड़गड़हाट के साथ तेज बारिश शुरू हो गयी, हम लोग जहाँ थे वही रुक गये । बारिश इतनी तेज थी की हम लोग गाड़ी से उतर भी न सके ।  करीब आधा घंटा तक तेज बारिश होती रही और हम लोग कैदियों की तरह गाड़ी में बैठे रहे, बारिश बंद होने के पश्चात्  टिकिट खिड़की पर जाकर रोबर्स केव ( गुच्चू पानी ) की टिकिट के लिए मालूम किया तो पता चला कि तेज बारिश के कारण गुफा में कमर से ऊपर पानी आ गया है और कुछ लोग अंदर ही फँसे है सो अब अंदर जाने के लिए टिकिट नही दी जा रही है । ओहो - "हमारा यहाँ पर आना बेकार गया", अब कर भी क्या सकते थे सो अगले दिन फिर से आना तय किया गया । बारिश के कारण पार्किंग के बगल से बह रही छोटी सी नदी, जो की गुफा के अंदर के झरने से ही बहकर बाहर आ रही थी, उस समय  उसमे  काफी पानी था, पानी का रंग मटमैला हो रखा था । वैसे सैलानियों के लिए इस जगह के पास में ही स्विमिंग पूल की भी व्यवस्था थी जो निर्धारित शुल्क पर उसमे नहाने और तैरने देते है । खैर हम लोग अब वापिस होटल आ गये क्योकि बूंदा-बांदी  यदा-कदा अब भी पड़ रही थी सो अन्य जगह भी नही जा सकते थे ।

होटल वापिस आकर हम लोगो ने देहरादून के पलटन बाजार जाने का निर्णय लिया क्योकि किसी से सुना था था की यहाँ पर एक चाट वाली गली है जो अपने चाट के मशहूर है । गूगल मैप का सहारा लिया गया और पैदल ही चल पड़े पलटन बाजार की तरफ । गूगल मैप पर पलटन बाजार केवल एक किमी दूर बता रहा था । प्रिंस चौक पार करके देहरादून की गलियों से होते हुए पलटन बाजार कुछ देर में ही पहुँच गये पर यहाँ तो हमे सब्जी मंडी ही नजर आई और बाजार भी कोई और नाम का था । खैर पलटन बाजार की चाट वाली गली के बारे में किसी से पूछकर हम लोग आगे के बाजार की तरफ चल दिए पर काफी ढूढने पर हम लोगो को चाट वाली गली नही मिली हो सकता है सड़क के चौडीकरण के कारण ये समाप्त कर दी गयी हो । खैर वही पर टहलते हुए एक चौराहे पर आलू की टिक्की से बर्गर बनाकर दे रहे एक छोटी सी दुकान दिख गयी उस सम्स्य उस पर काफी भीड़ थी । सो हम लोग वही रुक गये और स्वादिष्ट बर्गर का स्वाद लिया गया । कई साल पहले जब देहरादून आया था तब शायद यही पर मैंने इस तरह के बर्गर खाए थे, अब यहाँ पर काफी कुछ बदल चुका का था । पलटन बाजार देहरादून का काफी बड़ा बाजार है जो स्थानीय सभी प्रकार की जरुरतो की पूर्ति करने वाली दुकानो से भरा पड़ा है । यहाँ से निपटने के बाद हम अपने होटल वाली जगह पर वापिस आ गये, बारिश की वजह से मौसम अच्छा हो गया था, हवा में नमी थी और यहाँ पर टहलने में बड़ा अच्छा लग रहा था क्योकि अंजान जगह, अंजान शहर और कुछ नयापन था हमारी रोजमर्रा की जिन्दगी से । अब रात हो चुकी थी सब लोगो को अब भूँख भी लग रही थी और बच्चे लोग थक भी गये थे सो करीब साढ़े नौ बजे  के आसपास हम लोगो ने पास के ही एक रेस्तरा में खाना खाया । रात का खाना खाने के उपरान्त हम लोग अपने होटल के कमरे वापिस आ गये और अगले दिन देहरादून में क्या घूमना ? उसकी योजना बनाकर सो गये ।

इस यात्रा लेख सम्बन्धित चित्रों का संकलन आप लोगो के प्रस्तुत है →
अंतरराज्जीय बस स्नाथक, आगरा (I.S.B.T. Bus  Stand, Agra)
अंतरराज्जीय बस स्नाथक, आगरा (I.S.B.T. Bus  Stand, Agra)


रास्ते का एक खूबसूरत द्रश्य (A Road View on the way )

मेरठ से मुज्जफरनगर रोड पर खतौली बायपास पर झिलमिल फ़ूड कोर्ट (A Jhilmil Food Court at Khatoli Baypass )
स्वयंझिलमिल फ़ूड कोर्ट पर पेड़ो ले साए में

इकबालपुर रेलवे फाटक क्रोसिंग के पास (Iqwalpur Railways Crossing )

इकबालपुर रेलवे फाटक क्रोसिंग के पास गुजरती माल गाड़ी  (A Train at Iqwalpur Railways Crossing )

देहरादून सीमा में प्रवेश करते ही राजाजी नेशनल पार्क का घना और हराभरा जंगल (A Green forest at Rajaji National Park, Dehradun)

Hotel Doon Regency near Prince Chowk  (होटल दून रेजेन्सी प्रिंस चौक के पास, देहरादून)
होटल के पास ही एक छोटे रेस्तरा पर भोजन की थाली


A Small River near Rovers Cave (गुच्चु पानी गुफा से निकलती एक छोटी नदी )

A Small River near Rovers Cave (गुच्चु पानी गुफा से निकलती एक छोटी नदी )

Hotel Doon Regency near Prince Chowk  (होटल दून रेजेन्सी प्रिंस चौक के पास, देहरादून)


ये थी हमारे गढ़वाल यात्रा के पहले व् दूसरे दिन की आगरा से देहरादून की यात्रा का लेखा जोखा, अब इस लेख इस भाग को यही  समाप्त करते है मिलते श्रंखला के अगले भाग के लेख के साथ । आप लोगो यह लेख अवश्य पसंद आया होगा, जल्द ही मिलते है,  तब तक के लिए आपका सभी का दिल से धन्यवाद  !
▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬    
गढ़वाल यात्रा  श्रृंखला के लेखो की सूची : 
1. सफ़र देहरादून का (गढ़वाल संस्मरण)→ Traveling to Dehradun (Garwal Glory) ..1
2. देहरादून की सैर (गढ़वाल संस्मरण)→ Dehradun City (Garwal Glory) ..2

▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬   

12 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (24-04-2019) को "किताबें झाँकती हैं" (चर्चा अंक-3315) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    पुस्तक दिवस की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  2. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 23/04/2019 की बुलेटिन, " 23 अप्रैल - विश्व पुस्तक दिवस - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    ReplyDelete
  3. बढ़िया पोस्ट. अगली पोस्ट का इंतजार रहेगा . नीचे वाली लाइन में सुधार कर लें . पहला पर फालतू है .
    इस राज्य में पर जगह - जगह पर देश के प्रमुख धार्मिक स्थल है तो

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद जी आपका दिल से ........... गलती सुधार दी ...शुक्रिया जी

      Delete
  4. Aapki post bahut hi achchhi lagi.thanks

    ReplyDelete
  5. Aap aksar yatra karte rahte hai.

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी अक्सर यात्रा करता ही रहता हूँ ...

      Delete
  6. aapka post mujhe bahut accha laga,mai bhi dehradun 2 bar ja chuka lekin aap ka post padhne ke baad ek phir se jane ka man kar raha hai

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपको लेख अच्छा लगा इसके लिया आपको दिल से धन्यवाद | देहरादून एक अच्छा शहर जरुर जाइए फिर से

      Delete

ब्लॉग पोस्ट पर आपके सुझावों और टिप्पणियों का सदैव स्वागत है | आपकी टिप्पणी हमारे लिए उत्साहबर्धन का काम करती है | कृपया अपनी बहुमूल्य टिप्पणी से लेख की समीक्षा कीजिये |

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Ad.

Popular Posts