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Wednesday, December 20, 2017

सोनमर्ग - जोजिला दर्रा से जीरो पॉइंट का सफर (Travel to Sonamarg, Zojila Pass, Kashmir....9)

Written By Ritesh Gupta

इस श्रंखला को प्रारम्भ से पढ़ने के लिए यहाँ पर क्लिक कीजिये । सोनमर्ग जिसे सोनामर्ग कहते है, कश्मीर घाटी में थाजिवास ग्लेशियर के साए स्थित बेहद ही सुन्दर पर्यटक स्थल है । यहाँ की यात्रा के समय हम लोगो ने यहाँ-वहां बिखरी हुई प्राकृतिक खूबसूरती भरपूर आनंद लिया । अमरनाथजी की यात्रा के लिए दूसरा प्रमुख आधार स्थल बालटाल यहाँ से कुछ ही दूरी पर स्थित है । चलिए इस पोस्ट के माध्यम से ले चलते है आप लोगो को सोनमर्ग की यात्रा पर -

सोनमर्ग से जोजिला पास के रास्ते से एक सुन्दर द्रश्य (A View From Zozila Pass Road, Sonmarg)
यात्रा छटवां  दिन (28 जून ) प्रथम पहर

कश्मीर यात्रा का हमारा ये छटवां दिन था, पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार आज हमे सोनमर्ग के लिए निकलना था, सो रात को ही निर्धारित किये समय से मोबाइल के अलार्म के साथ आज जल्दी ही उठ गये थे । जल्दी नित्यकर्म से निवृत होकर मैं तैयार हो गया और बाकि लोगो को भी जल्दी से तैयार होने का कहकर मैं हाउसबोट की बाहर वाली बैठक पर आ गया । डल झील के परिद्रश्य पर्वत के पीछे सुप्रभात की सुबगाहट शुरू हो गयी थी, जबारवान पर्वत के पीछे से निकलती सूर्य की किरणें बहुत ही सुंदर नयनाभिराम द्रश्यावली उजागर कर रही थी । हाउसबोट के ठीक सामने की सड़क पर सन्नाटा पसरा हुआ था और सुबह की वेला में डल झील का नजारा भी बहुत शानदार था ठीक सामने की सडक पर सन्नाटा पसरा हुआ था । शांत ठहरे पानी में कोई हलचल नही थी मौसम बहुत ही सुहाना था, इसी बीच दिल से गूंज उठी की "ऐ जिन्दगी अब यही थम जा, न जा कही इसे छोड़कर । ठहर जा यही इस दिल तस्सली को, कि भर लूँ इन लम्हों को अपने नैनो में

खैर कुछ देर बाद हमने अपना सारा सामान एकत्रित किया और गाडी वाले के फ़ोन करके हाउसबोट के सामने वाली सड़क पर आने को कह दिया । मुकेश भालसे जी आज हमारी इस यात्रा में नही जाने वाले थे क्योकि उन्हें यही से वापिस जम्मू के लिए निकलना था । मुकेश जी को जगाकर उनसे मिले, विदा ली और हाउसबोट के शिकारे से डल झील की सड़क पर पहुँच गये । कुछ देर बाद हमारी गाड़ी आ गयी और अपनी सोनमर्ग की यात्रा का सुभारम्भ सुबह के पौने छह बजे किया । गाड़ी डल झील के किनारे-किनारे ही दौड़ रही थी और झील के नए-नए दिखाई दे रहे थे, एक जगह तो झील के ऊपर कोहरे की पतली परत सी उठती नजर आ रही थी । कुछ देर में ही मुगल निशात बाग़ के सामने से होते हुए करीब जहाँ से चले वहां से लगभग 14 किमी झील के किनारे चलते रहे है, एक जगह आकर दाई तरफ मुड़ने के बाद झील का साथ खत्म हो गया और श्रीनगर के अंदुरनी शहर से गुजर रहे थे, इस सुबह समय बिल्कुल सन्नाटा पसरा हुआ था, गलियों में इक्का-दुक्का लोग ही नजर आ रहे थे ।  खैर हमारी मंजिल सोनमर्ग थी सो बिना रुके श्रीनगर-लेह हाइवे चलते रहे । कुछ देर बाद एक जगह सिंध नदी (Sindh River/ Nallah) को एक पुल से पार करने के बाद ये नदी हम लोगो के सफर में दाई तरफ दिखाई देती रहती है ।   करीब डेढ़ घंटे के सफर के बाद चाय-पानी के एक जगह सिंध नदी के किनारे एक ढाबे पर गाड़ी रोक दी गयी । नदी किनारे ही एक तरफ मेज और कुर्सिया रखी हुई थी, यही पर बैठ कर कल-कल तेज आवाज में बहती नदी के किनारे चाय और ब्रेड का नाश्ता किया गया । नाश्ते के बाद नदी किनारे फोटो खिचवाने का दौर चला, ये हमारे लिए प्रकृति की गोद में बिताये अव-स्मरणीय पल थे । खैर कुछ देर बाद अपने सफर को जारी रखा और साढ़े नौ बजे हम लोग सोनमर्ग पहुँच गये । श्रीनगर से सोनमर्ग का रास्ता प्राकृतिक नजारों से परिपूर्ण है, खूबसूरत पहाड़, बहती नदिया, छोटे-छोटे ग्लेशियर, बर्फ से ढके पहाड़, बहते झरने, नदी पुल, घास के मैदान और बलखाती पहाड़ी सड़क आदि कुछ आप को दीवाने करने के लिए काफी है । सोनमर्ग पहुचने के बाद गाड़ी को सोनमर्ग के एक यात्री निवास होटल के बाहर लगा दी गयी ।

सोनमर्ग कश्मीर के गंदेरबल जिले  के अंतर्गत एक छोटा सा पर्यटक पहाड़ी स्थल है और समुन्द्र तल से इसकी ऊंचाई करीब 2740 मीटर है ।  श्रीनगर से सोनमर्ग की दूरी करीब 88 किमी है । सोनमर्ग नगर श्रीनगर-लद्दाख हाइवे पर ही स्थित है, सोनमर्ग से आगे प्रसिद्ध जोजिला दर्रा पड़ता है और इसी दर्रे से होते हुए लद्दाख के लिए रास्ता निकलता है । अमरनाथजी जाने वाला दूसरा मुख्य आधार स्थल बालटाल (BALTAL) यहाँ से केवल 14 किमी दूर स्थित है । सोनमर्ग को सोने की धरती कहा जाता है क्योकि यहाँ की घाटियो और मैदानों में खिलने वाले फूल सोने के रंग जैसे सुनहरे नजर आते है । सोनमर्ग ठहरने के काफी होटल और गेस्ट हाउस है , कुछ महंगे भी तो कुछ बजट में भी उपलब्ध हो जाते है । सोनमर्ग से नजारे बहुत खूबसूरत नजर आते है जिधर भी नजर उठाओ  उधर ही प्रकृति के विराट स्वरुप और हिममंडित पर्वतश्रंखला और हरे-भरे बुग्याल नजर आते है । सोनमर्ग से  प्रसिद्ध थाजीवास पर्वत और ग्लेशियर बिल्कुल सामने नजर आता है  । इस ग्लेशियर की दूरी सोनमर्ग से करीब सात किलोमीटर है और वहां तक कुछ रास्ता गाड़ी से थाजिवास बेस तक, फिर उससे आगे ग्लेशियर तक पौनी/ खच्चर से या पैदल ही जाया जा सकता है ।

खैर अपनी यात्रा पर आते है, गाड़ी से उतरने के बाद हम तरोताजा होने लिए यात्री निवास में ही चले गये, उसके बाद आगे कहाँ देखे यही सोच रहे थे, वैसे हमारे मन में पहले से ही जोजिला पास होते हुए जीरो पौइंट तक जाने का विचार था । इसी बीच कुछ गाड़ी/टैक्सी वाले आये और कहने लगे की हम लोग आपको जीरो पॉइंट के साथ पांच और पॉइंट घुमाकर लाते है । हमने कहा की हमारे पास गाड़ी है हम लोग खुद चले जायेंगे, तो वो बोला की सोनमर्ग में घूमना है तो हमारी सोनमर्ग की ही गाड़ी जाएगी यहाँ के टैक्सी यूनियन के नियम के हिसाब से । हमने कहा कि ये तो गलत है, दोहन है पर्यटकों और घुमक्कड़ो का । हमने अपने गाड़ी के ड्राइवर से भी जानकारी ली तो वो यही बोला की यदि यहाँ से गाड़ी लेकर भी जायेंगे तो आगे जाने नही देंगे यदि गये भी तो किसी पॉइंट पर ये यूनियन वाले नही रुकने देंगे । अब टैक्सी वाले से जीरो पॉइंट जाने के लिए बात की जाने लगी,  मोलभाव करके बड़ी मुश्किल से जाने का सौदा पटा बिना गर्म कपड़े के पर बर्फ पर चलने के लिए बूट शामिल कर लिए थे । इन्नोवा गाड़ी में हम सभी लोगो को बैठा कर पहले वो एक जगह ले गया जहाँ से हम सबने अपने साइज के बूट पहने और पौने दस बजे आसपास चल दिए ZERO POINT भ्रमण पर ।

श्रीनगर-लद्दाख राजमार्ग पर सोनमर्ग से चलते हुए जोजिला दर्रा आता है, इस दर्रे को पार करने के बाद सोनमर्ग लगभग 32 किलोमीटर दूरी तय करने के बाद से जीरो पॉइंट (Latitude 34:16:38 Longitude 75:28:25 Sea Level 3510 Mtr) आता है। कश्मीर सम्भाग के जांसकर श्रेणी में जोजिला दर्रा (Zozila Pass) एक विख्यात दर्रा है जो लेह और कारगिल को श्रीनगर से आपस में एक सडक मार्ग से जोड़ता है । इस दर्रा समुन्द्रतल से करीब 3530 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और कच्चे पहाड़ पर और सड़क खिसकने का भय सदा इस दर्रे पर बना रहता है । पहाड़ी भूस्खलन के कारण ये अक्सर बंदहो जाता है और सड़क मार्ग भी सकरा और कही कही बहुत उबड खाबड़ ही है । पहाड़ी झरने इस सडक मार्ग से अक्सर बहते हुए मिल जाते है, सर्दियों में अत्यधिक हिमपात के कारण ये मार्ग बंद हो जाता है और सीमा सुरक्षा बल के सैनिक इस मार्ग को सुचारू रखने में सदा प्रत्यनशील रहते है । 

सोनमर्ग से निकलते ही एक नदी पुल पार करने के बाद एक दाई तरफ का एक रास्ता बालताल के निकल गया और बायीं तरफ का जोजिला दर्रे से होते हुए लेह को । सोनमर्ग से निकलने के बाद रास्ता काफी सही था और सड़क के दोनों तरफ से नजारे और भी खूबसूरत दिख रहे थे । सड़क एक तरफ तेजी से बहता सिंध नल्लाह और उसी के पीछे कही-कही छोटे-छोटे ग्लेशियर और झरने मार्ग के द्रश्य को अलौकिक बना रहे थे । कुछ किलोमीटर बाद जोजिला दर्रे की चढ़ाई शुरू हो गयी और कुछ देर बाद पहाड़ की ऊंचाई से गहरी घाटी में अमरनाथ यात्रा का आधार स्थल बालटाल कस्बा और मनोरम घाटी दिखनी शुरू हो गयी । जोजिला मार्ग का ये रास्ता काफी चढ़ाई वाला है और हिमस्खलन के कारण काफी ख़राब हालत में था, कही-कही बर्फ की दीवार और बहते पानी के बीच से रास्ता निकल रहा था । कई जगह रास्ता बहुत ही सकरा था की दो गाड़ी एक साथ नहीं निकल सकती थी, एक तरफ बहुत ही गहरी खाई तो दूसरे तरह पहाड़ जिन पर कही कही बर्फ जमी हुई थी और उनसे बहता पानी सड़क पर आ रहा था ।  इसी रास्ते से आगे बढ़ते हुए एक मोड़ के बाद ये बालटाल वाला नजारा गायब हो गया और कम गहरी खाई में सिंध नल्लाह पतली धारा में बह रहा था तो कही कही बर्फ के बीच में गायब हो रहा था और उसके पीछे बर्फ से ढके हुए शान से सर उठाये पहाड़ साथ - साथ ही नजर आ रहे थे ।

इसी नजारों का आनंद लेते हुए हम लोग ग्यारह बजे के आसपास जीरो पॉइंट पहुँच गये । राजमार्ग के दाई तरफ एक काफी बड़े भूभाग और चारो तरफ बर्फ से ढकी पहाड़ के बीच में ये मनोहारी स्थल स्थित है । पहाड़ की ढलान पर ऊपर से नीचे बर्फ का बड़ा ग्लेशियर था । इसी बर्फ पर निचले भाग की तरफ कई सारे टेंट और खाने पीने की अस्थाई दुकाने बनी हुई थी और सबसे ऊँचे भाग पर एक बड़ा झरना बहता हुआ दिख रहा था जो ग्लेशियर की बर्फ की नीचे जाकर गायब हो हो रहा था । मैदानी भूभाग पर एक पतली सी पानी की धारा बर्फ से निकल कर सोनमर्ग की तरफ की ढलान की तरफ जा रही थी, जी हाँ ! यही है सिंध नल्लाह/नदी जिसका उद्गम इसी स्थल मतलब जीरो पॉइंट से होता है आगे जाकर पहाड़ो और ग्लेशियरो से बहकर आये पानी की धाराओ से ये बड़ा आकार ले लेता है । पानी की एक धारा के पास गाड़ी रोक दी गयी और गाड़ी से उतरते ही जबरदस्त ठंड का सामना हुआ । गाड़ी से बाहर निकलने के बाद प्रकृति के विराट और बेहद खूबसूरत नजारों हम लोगो का मन मोह लिया ।

पानी की पतली धारा को पार करने के बाद बर्फ देखकर सभी लोग सुधबुध खोकर उसी तरफ चल दिए । यहाँ की बर्फ लगभग साफ और भुरभूरी थी मतलब रात में ही हिमपात  हुआ होगा । इसी बर्फ की ढलान से होकर उपर की तरफ चल दिए । कुछ बर्फ से खेलने में व्यस्त हो गये और ऊपर की तरफ जाने की कोशिश करने लगे । बर्फ में पैर रखते है ही आधा पैर अंदर धस रहा था और जहाँ कठोर थी वहां से फिसल जा रहे थे । खैर धीमे-धीमे करते काफी ऊंचाई तक पहुँच गये पर वो झरना अब भी हमसे दूर ही था, साथ के लोगो के वजह से मैं वहां तक नहीं गया । नीचे उतरने की कोशिश में बार बार फिसल रहे तभी एक स्लेज वाला वहां पर आ गया और बहुत ही सस्ते में  ढलान से नीचे लाने को तैयार हो गया ।  सभी लोगो ने स्लेज का खूब आनंद लिया बल्कि बार बार ऊपर जाकर नीचे आये । साथ के बच्चे बर्फ से गुड्डा बनाने में लग गये तो कुछ लोग एक दूसरे पर बर्फ से फेका फेकी शुरू कर दी ।  


बर्फ पर मस्ती करते हुए सभी लोग जब थक गये तो साढ़े बारह बजे के आसपास वापिसी की राह पकड़ ली । दोपहर का समय होने के कारन जोजिला दर्रा मार्ग पर वाहनों की आवाजाही कुछ अधिक बढ़ गयी थी । कम चौड़ाई वाले रास्ते पर जाम लग रहा था, इसी तरफ बालताल के ठीक ऊपर सकरे रास्ते पर जाम लग गया करीब बीस मिनिट हम लोग फसे रहने के बाद मार्ग सुचारू हुआ । ये मार्ग लगभग कच्चा ही था वाहनों  के कारण बहुत धूल उड़ रही थी, इसलिए खिड़की भी नहीं खोली । हम लोग सोनमर्ग की चलते हुए हिचकोले खाते हुए चले जा रहे थे, कुछ देर चलने के बाद जोजिला का क्षेत्र समाप्त हो गया और रास्ता भी अब अच्छा हो गया । रास्ते में ड्राइवर ने नदी के किनारे के एक पॉइंट "फिश आई" नाम की जगह पर गाड़ी रोक दी और कहा की देखकर आइये । यहाँ परऊपर से बहकर आये झरने के नीचे एक छोटी झील बना दी थी और अंदर प्रवेश का टिकिट 10 प्रति व्यक्ति था ।

साथ के लोग थके हुए और भूखे थे सो अंदर जाने में किसी ने रूचि नहीं दिखाई और कुछ देर वही टहलने के बाद वापिस सोनमर्ग चल दिए । दोपहर के दो बजे हम लोग सोनमर्ग पहुँच गये, गाड़ी वाले के हिसाब किया और उसे चलता किया । बाजार के ही एक शाकाहारी रेस्तरा में दोपहर का भोजन किया, खाना अच्छा और स्वादिष्ट लगा पर पानी अच्छा नही मिला, लगा की जैसे नदी में सीधे भर लाया हो । खैर प्यास बुझाने के लिए पानी की बोतल लेनी पड़ी । खाना खाने के बाद कुछ देर बाजार में चहलकदमी की और यहाँ नजारों को निहारा । यहाँ से दीखता थाजिवास ग्लेशियर बड़ा हीअच्छा लग रहा था । समय काफी व्यतीत हो रहा था और हम लोगो को अभी खीर भवानी मंदिर भी जाना था सो जल्दी ही समय न गवाते हुए साढ़े तीन बजे के आसपास अपने साथ लाये टेम्पो ट्रेवलर से वापिसी की राह पकड़ी और सोनमर्ग को अलविदा कहा ।

इस यात्रा लेख सम्बन्धित चित्रों का संकलन आप लोगो के प्रस्तुत है →
अफरावत पर्वत के उस पर सूर्योदय का द्रश्य , श्रीनगर (Sunrise at Afrawat Mountian, Srinagar)

श्रीनगर में डल झील का खूबसूरत नजारा (Dal Lake, Srinagar)
सुबह के डल से उठती वाष्प (Dal Lake, Srinagar)
मुगल बाग के पास डल झील के एक नजारा (Dal Lake near Mughal Garden, Srinagar)

मुगल बाग के पास डल झील के एक नजारा (Dal Lake near Mughal Garden, Srinagar)

सिंड या सिंध नाला सोनमर्ग जाते हुए एक ढाबे के पीछे ( Sind or Sindh River onthe way to Sonamarg)

सिंड या सिंध नाला सोनमर्ग जाते हुए एक ढाबे के पीछे ( Sind or Sindh River onthe way to Sonamarg)

सिंड या सिंध नाला सोनमर्ग जाते हुए एक ढाबे के पीछे ( Sind or Sindh River onthe way to Sonamarg)

सिंड या सिंध नाला सोनमर्ग जाते हुए एक ढाबे के पीछे ( Sind or Sindh River onthe way to Sonamarg)

एक छोटा सा ग्लेशियर सोनमर्ग जाते हुए रास्ते में नजर आया  (A Small Glacier onthe way to Sonamarg)

ये सोनमर्ग का थाजिवास ग्लेशियर और पर्वत ((Thajiwas Glacier at Sonamarg)

खूबसूरत नजारे सोनमर्ग जाते हुए (A Beautiful View on the way to Sonamarg)

खूबसूरत नजारे सोनमर्ग जाते हुए (A Beautiful View on the way to Sonamarg)

सोनमर्ग का यात्री निवास होटल (Yatri Niwas Hotel at Sonamarg)
श्रीनगर-लद्दाख लेह हाइवे पर सोनमर्ग का मुख्य बाजार (Main Market of Sonamrg, Near Yatri Niwas)
घोड़े का अस्तबल जहाँ से हमने बूट लिए थे (A Pony House at Sonamarg)
श्रीनगर-लद्दाख लेह हाइवे - सोनमर्ग से जोजिला जाते हुए (Srinagar - Laddakh Leh Highway )

श्रीनगर-लद्दाख लेह हाइवे - सोनमर्ग से जोजिला जाते हुए (Srinagar - Laddakh Leh Highway )

श्रीनगर-लद्दाख लेह हाइवे - सोनमर्ग से जोजिला जाते हुए (Srinagar - Laddakh Leh Highway )

जोजिला दर्रा की खतरनाक राहे  हुए  (Zoji la Pass Road  )

जोजिला दर्रा से गुजरते हुए इस जगह को इंडिया गेट कहते है (Called - Indiagate thru Zoji la Pass)

खूबसूरत द्रश्य जोजिला दर्रा मार्ग से (Beautiful View from the Zoji la Pass Road, Kashmir)

खूबसूरत द्रश्य जोजिला दर्रा मार्ग से (Beautiful View from the Zoji la Pass Road, Kashmir)
Beautiful with snow "Zero Point", through Zozila Pass, Sonamarg, Kashmir 

जीरो पॉइंट स्थल जोजिला दर्रा के पास (A Zero Point spot through Zoji la Pass)

जीरो पॉइंट पर बर्फ का ग्लेशियर (Snow at Zero Point, Kashmir)

जीरो पॉइंट से खूबसूरत नजारा (A View From Zero Point)

जीरो पॉइंट से खूबसूरत नजारा (A View From Zero Point)

जीरो पॉइंट से खूबसूरत नजारा और सबसे ऊपर झरना जो गायब हो रहा था  (A View From Zero Point)

जीरो पॉइंट से खूबसूरत नजारा और पानी की पतली धारा  (A View From Zero Point)

जीरो पॉइंट की ऊंचाई पर गिरता झरना बर्फ के नीचे गायब हो जाता है (A Waterfall at Zero Point)

यही बहता झरना का पानी आगे जाकर सिंध नदी का रूप ले लेता है (A Waterfall at Zero Point)


बालताल - जोजिलादर्रा मार्ग से (Baltal from Zojila )

दरकते पहाड़ो पर जोजिला दर्रा मार्ग  (Zojila Pass Road)

(बर्फ की दीवार के मध्य जोजिला मार्ग )Zojila Road in between Ice Wall

बालताल - जोजिलादर्रा मार्ग से (Baltal from Zojila )

सिंध नदी / नल्लाह - फिश आई झील के पास  (Sindh Nallah/ River Near Fish Eye Point, Sonmarg) लेह की तरफ

सिंध नदी / नल्लाह - फिश आई झील के पास (Sindh Nallah/ River Near Fish Eye Point, Sonmarg) -सोनमर्ग की तरफ

फिश आई झील और झरना , सोनमर्ग (Fish Eye Point, Sonmarg)

फिश आई झील और झरना , सोनमर्ग (Fish Eye Point, Sonmarg)
फिश आई झील और झरना, सोनमर्ग के पास (Near Fish Eye Point, Sonmarg)
थासिवास ग्लेशियर का पास से चित्र (Closeup View of Thasiwas Glacier, Sonmarg, Kashmir)

थासिवास ग्लेशियर का चित्र - सोनमर्ग ( View of Thasiwas Glacier, Sonmarg, Kashmir)


सिंध नदी / नल्लाह - सोनमर्ग रोड से श्रीनगर   (Sindh Nallah/ River, Sonmarg to Srinagar )

सिंध नदी / नल्लाह - सोनमर्ग रोड से श्रीनगर  (Sindh Nallah/ River, Sonmarg to Srinagar )

रास्ते के नजारे - सोनमर्ग वापिसी के समय

सिंध नदी / नल्लाह - सोनमर्ग रोड से श्रीनगर  (Sindh Nallah/ River, Sonmarg to Srinagar )

रास्ते के नजारे - सोनमर्ग वापिसी के समय


ये थे हमारे कश्मीर यात्रा के छटवे दिन के पहले पहर के सोनमर्ग यात्रा का लेखा जोखा, अब इस लेख को यही समाप्त करते है मिलते कश्मीर यात्रा के एक नये लेख साथ और चलेंगे खीर भवानी मंदिर के दर्शन के लिए ।  आप लोगो यह लेख अवश्य पसंद आया होगा, जल्द ही मिलते है, इस श्रृंखला के अगले लेख के साथ, तब तक के लिए आपका सभी का दिल से धन्यवाद  !
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कश्मीर यात्रा  श्रृंखला के लेखो की सूची : 

4. कुछ सुनहरे पल पहलगाम से, कश्मीर (Local Travel to Pahalgam - Kashmir..4)
5. पहलगाम से श्रीनगर, कश्मीर का यादगार सफर (Pahalgam to Srinagar - Kashmir..5)
6. हिमालय की गोद में बसे श्रीनगर, कश्मीर की सैर(Local Sight Seen to Srinagar, Kashmir.6)
7. गुलमर्ग - विश्वप्रसिद्ध पर्वतीय स्थल की सैर (Travel to Gulmarg, Kashmir...7)
8. श्रीनगर की सैर - कश्मीर (Local Tour to Srinagar, Kashmir... 8)
9. सोनमर्ग - जोजिला दर्रा से जीरो पॉइंट का सफर (Travel to Sonamarg, Zojila Pass, Kashmir....9)
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17 comments:

  1. पहले तो इतने अच्छे विवरण के लिए धन्यवाद। आपने तो हमें दिल्ली में बैठे बैठे सोनमर्ग और जोजिला दर्रा का सफर करवा दिया। बच्चों का बर्फ से गुडि़या बनाकर खेलना भी बहुत अच्छा लगा। शांत और ठहरे पानी में हलचल न हो तो ये वाला गाना याद कीजिए ‘‘ठहरे हुए पानी में कंकड़ न मार सांवरी हो, मन में हलचल सी मच जाएगी बावरी हो’’। बर्फ देखकर हर पर्यटक पता नहीं क्यों अपनी सुध-बुध खो देता है आज तक समझ नहीं पाया, ऐसा क्या आकर्षण है बर्फ में।

    पोस्ट में लगाए गए तसवीरों तो आपके विवरण को पूर्णतः जीवंत कर दिया है। बहुत बढि़या जी!!!!

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  2. पहले तो इतने अच्छे विवरण के लिए धन्यवाद। आपने तो हमें दिल्ली में बैठे बैठे सोनमर्ग और जोजिला दर्रा का सफर करवा दिया। बच्चों का बर्फ से गुडि़या बनाकर खेलना भी बहुत अच्छा लगा। शांत और ठहरे पानी में हलचल न हो तो ये वाला गाना याद कीजिए ‘‘ठहरे हुए पानी में कंकड़ न मार सांवरी हो, मन में हलचल सी मच जाएगी बावरी हो’’। बर्फ देखकर हर पर्यटक पता नहीं क्यों अपनी सुध-बुध खो देता है आज तक समझ नहीं पाया, ऐसा क्या आकर्षण है बर्फ में।

    पोस्ट में लगाए गए तसवीरों ने तो आपके विवरण को पूर्णतः जीवंत कर दिया है। बहुत बढि़या जी!!!!

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    1. धन्यवाद अभय भाई जी ....

      लगता है आपके मन में हलचल पैदा हो गयी | बर्फ का आकर्षण तो मैदानी इलाको वाले ही समझा सकते है ....

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  3. बहुत ही विस्तृत और अच्छा लिखा आपने और खाद बात यह कि 2 3 साल पहले की बाद आपको इतने अच्छे से याद है...मुकेश भालसे जी क्यो नही आये सोनमर्ग ?....

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    1. धन्यवाद प्रतीक भाई जी .... ये भूलने वाली कोई बात ही नहीं है सब याद रहता है |

      भालसे जी की जम्मू से ट्रेन थी सो उन्हें उस दिन वापिस जाना था ..इसलिए सोनमर्ग नही गये

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  4. चलो ये शृंखला खत्म हुई ।काफी इंतजार करवाया। शानदार कश्मीर और जानदार तुम्हारा लेखन ।दोनो ही प्रभवशाली है। कभी मौका मिला तो मैं भी कश्मीर की सैर करना चाहूंगी। जोजिला पास ओर सोनमर्ग का विवरण लाजवाब 👌

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    1. अभी खत्म न हुई ये श्रृंखला बुआ जी..... धन्यवाद आपका टिप्पणी के लिए....

      आप जरुर जाइए ..... आपकी हर संभव साहयता और मार्गदर्शन करने को तत्पर बैठे है |

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  5. कश्मीर से लेह व मनाली की यात्रा में दिनभर की यात्रा में एक या दो दर्रे अवश्य पार करने पडते है।
    किसी भी दर्रे को देख ले तो उसके दोनों छोर के नजारे अलग ही दिखाई देते है।

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    1. जी बिल्कुल सही कहा आपने संदीप भाई | वातावरण और स्थल बदल जाते है तो नजारे भी बदले नजर ही आते है ...

      धन्यवाद जी

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  6. बहुत बढ़िया सर आपका यात्रा लेख पढ़कर मजा आ गया।
    सोनमर्ग से zozila paas तक के सफर में ऐसा लगा मानो हम भी आपके साथ हो, साथ ही इस वहम को आपकी जिवंत फोटोग्राफी ने हक़ीक़त में बदल दिया।
    बधाई हो सर।💐💐💐

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    1. आपका दिल से धन्वावाद मनोज भाई जी.... आपके दिल लगाकर पढ़ा और समझा भी ...
      मेरा लेखन सफल हुआ जब कोई कहता ही की "ऐसा लगा मानो हम आपके साथ ही हो"

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  7. बहुत बढिया भाईसाहब...

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    1. धन्यवाद घुमक्कड़ भाई ...

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  8. Replies
    1. धन्यवाद शैलेन्द्र भाई जी

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  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    आपको जन्मदिन-सह नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाएं!

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    1. धन्यवाद कविता जी .... आपको भी शुभकामनाएं !

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