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Thursday, May 14, 2015

गंगटोक शहर के स्थानीय स्थलों का भ्रमण, सिक्किम (Sight Seen to Gangtok City, Sikkim)

Written by → Ritesh Gupta 
दिनांक 24जून2014
पिछले लेख में अब तक आपने पढ़ा कि गंगटोक पहुँचने के बाद हमने एक होटल में कुछ कमरे लिए और उसके बाद छोटी टैक्सिया किराए पर लेकर गंगटोक नगर का भ्रमण करने निकल पड़े। हम लोग नमग्याल तिब्बतोलोजी संस्थान (Namgyal Institute of Tibetology), दो-द्रुल-चोर्टेन स्तूप (Do-Drul-Chorten Stupa) और सेल्स एम्पोरियम (Sales Emporium, Gangtok Handicraft Center) का अवलोकन कर चुके थे । अब प्रस्तुत है कुछ और नये स्थलों के साथ आगे का यात्रा वर्णन -

गंगटोक शहर की आवोहवा यहाँ की वनस्पति, पेड़ और फूलो के पौधों के पूर्णत उपयुक्त है । गंगटोक नगर की गलियों या सड़को से गुजरते हुए सफाई तो मिलती ही है, साथ ही साथ होटलों और घरो के बाहर सजावट के लिए बड़ी संख्या में गमले लगाकर एक छोटे से बगीचे का रूप दे दिया जाता है। इन गमलो में लगे कई किस्म के विविध रंगों के सुन्दर पुष्प और पौधे अनायास ही आकर्षित करते नजर आ जाते है ।
रिज पार्क में नारंगी रंग का एक सुन्दर पुष्प (Double Lilium - Orange Color's shade Flower at Ridge Park, Gangtok)
गंगटोक आकाश में इस समय घनघोर बादल छाये हुए थी, बारिश कभी भी हो सकती थी । सेल्स एम्पोरियम से निकलने का बाद हम लोग इसी तरह गंगटोक नगर का अवलोकन करते हुए रिज पार्क (Ridge Park) पहुँच गये। हमारे टैक्सी के ड्राइवर ने कहा कि आप यह पार्क देखने के बाद नीचे फूलो के प्रदर्शनी देखने चले जाना। रिज पार्क गंगटोक के उंचाई पर समतल जगह पर रिज रोड के किनारे बना यहाँ का मशहूर पार्क है, यह पार्क विविध प्रकार के फूलो, पौधे और झाड़ियों से भरा पड़ा है । पार्क के बीचो-बीच एक फुव्वारा और बैठने के लिए काफी संख्या में बैंचे लगी हुई है । रिज पार्क गंगटोक के मुख्य बाजार एम.जी. मार्ग से करीब बीस मिनिट के पैदल दूरी पर स्थित है । हम लोगो को पार्क में अभी प्रवेश किये अभी पांच मिनिट भी नहीं हुए थे, की बादलो की मेहरबानी शुरू हो गयी और बारिश की बूंदो ने हम लोगो के भिगोना शुरू कर दिया। बारिश से बचने के लिए पार्क में बनी एक शेड में शरण लेनी पड़ी। कुछ देर बाद बारिश बंद हो गयी तो पार्क और यहाँ के बगीचे में लगे सुन्दर फूलो को निहारा और उनके कुछ फोटो भी लिया, उसके बाद पार्क के अंत तक चले जाने के बाद बायीं तरफ नीचे उतर गये। नीचे उतरने के बाद हम लोग यहाँ के प्रसिद्ध पुष्प प्रदर्शनी केंद्र (Flower Exhibition Center / Flower Show Center) के हॉल तक पहुँच गये

यहाँ पर प्रवेश करने के लिए टिकिट लेना पड़ता है और टिकिट का मूल्य केवल दस रूपये प्रति व्यक्ति है। प्रदर्शनी का समय सुबह 8:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक है। टिकिट लेने के बाद हम लोग प्रदर्शनी में दाखिल हो गये। पुष्प प्रदर्शनी केंद्र एक बड़े से प्रकाशयुक्त हॉल में व्यवस्थित है यह जगह बहुत बड़ी नहीं है, पर यहाँ पर सिक्किम के विभिन्न प्रजातियों के पुष्पों के आलावा सिक्किम का मुख्य पुष्प आर्किड की विभिन्न प्रजातियों के दर्शन हो जाते है। यहाँ पर फूलो के पौधों को क्रमबद्ध तरीके से गमलो, जमीन की मिट्टी में और पानी के छोटे-छोटे तालाब के साथ बड़ी खूबसूरती से लगाया गया है। यहाँ पर हर साल मार्च से जून के बीच एक सालाना आर्किड शो भी आयोजित किया जाता है। केंद्र में लगे विभिन्न आकार और खूबसूरत रंगों के फूल, देखने वालो को मन्त्रमुग्ध कर एक अलग ही दुनिया में ले जाते है। फूलो के इस संसार में आकार हम भी मन्त्र मुग्ध हो गये, जी भर के उन्हें निहारा, समझा और फोटो भी लिए, जो इसी पोस्ट में नीचे लगा दिए गये है।

पुष्प प्रदर्शनी देखने के बाद हम लोग टैक्सी में बैठकर गंगटोक शहर से बाहर सवा चार बजे के आसपास अपने अगले स्थल हनुमान टोक (Hanuman Tok) पहुँच गये। यहाँ की स्थानीय भाषा में "टोक" का मतलब होता है, एक ऊँचा स्थान या ऊँची पहाड़ी। ऐसे ही यहाँ पर भगवान श्री हनुमान जी को समर्पित पवित्र मंदिर एक ऊँची पहाड़ी स्थित है। गंगटोक का यह मंदिर प्रदूषण रहित वातावरण में सबसे शांत और पवित्र स्थलो में से एक है, जोकि एक मनोकामना पूर्ण करने वाला मंदिर माना जाता है। समुद्र सतह से लगभग 7200 फुट की ऊंचाई पर स्थित यह स्थल गंगटोक से लगभग ग्यारह किलोमीटर (11 KM) दूर है। ऐसा माना जाता है की लक्ष्मण जी को जीवित करने के लिए भगवान श्री हनुमानजी से हिमालय से जब संजीवनी बूटी लेकर लंका जा रहे थे तब कुछ देर आराम करने के लिए इसी स्थान पर रुके थे। इस मंदिर का रखरखाव् भारतीय सेना और स्थानीय लोगो के द्वारा रखा जाता है। 

पार्किग के समीप से ही पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक जाने के लिए सीढ़ियों वाला रास्ता है, जो ऊपर से प्लास्टिक सीट से ढका हुआ है, साथ-साथ रास्ते के दोनों तरफ घास और फूलो के पौधो से खूबसूरत सजावट की गयी है। इसी रास्ते हम लोग भी मंदिर पहुँच गये, मंदिर का प्रांगण साफ सुधरा और यहाँ का माहौल बिल्कुल शांत, चित्त प्रसन्न करने वाला था। अपितु मंदिर जनशून्य होने के कारण हम लोगो ने मुख्य मंदिर में बैठी हुई अवस्था में भगवान श्री हनुमानजी की लाल रंग की प्रतिमा के दर्शन बड़े आराम से कर उनका आशीर्वाद लिया। मंदिर में दर्शन करने पश्चात्, हम लोग मंदिर के पास ही स्थित व्यू पॉइंट पर पहुँच गये। यहाँ से कंचनजंघा पर्वत श्रृंखला और गंगटोक शहर नजर आता है, पर हमें कुछ नजर नहीं आया क्योकि मौसम और बादलो की मेहरबानी चारो तरफ घनी धुंध छाई हुई थी। खैर कुछ देर इसी रूमानी मौसम में फोटोग्राफी करके वापिस हो लिए और कार में बैठ चल दिए अपने अगले दर्शनीय स्थल गणेश टोक पर ।

दो तीन किलोमीटर का पहाड़ी सफ़र के बाद हम लोग पांच बजे के आसपास गणेश टोक (Ganesh Tok) पहुँच गये।  गंगटोक-नाथुला मार्ग पर मुख्य गंगटोक शहर से गणेश टोक लगभग सात किलोमीटर (7 KM ) दूर हैं। यहाँ पर छोटी पहाड़ी पर हमारे प्रथम पूजनीय भगवान श्री गणेश जी एक मंदिर स्थापित है। जब हम लोग यहाँ पर पहुंचे तो बादलो की धुंध ने इस स्थान को अपने आगोश में लेकर यहाँ की शाम को मदहोश सा कर दिया था। पहाड़ और हरियाली के बीच ठंडी हवा के झोंके और बारिश की बूंदों से एक रूमानी सा अहसास चारो तरफ बिखरा हुआ था।

यहाँ पार्किग के पास से मंदिर तक जाने का रास्ता एक सुन्दर द्वार से होकर जाता है, जो संभवतह सिक्किम शैली में निर्मित किया गया हैं। द्वार से कुछ सीढ़िया चढ़ने के बाद गणेश जी मंदिर में पहुँच जाते है। षठकोणीय आकार का यह एक छोटा मंदिर है, जहाँ कुछ लोग ही एक साथ मंदिर में प्रवेश करके दर्शन लाभ ले सकते है। हम लोगो ने भी बारी-बारी से भगवान श्री गणेश जी दर्शन लाभ प्राप्त किया। मंदिर के चारो तरफ बालकनी बनी हुई है, जो एक व्यू पॉइंट के तरह से काम करती है। यदि मौसम साफ़ रहा तो यहाँ से मंदिर परिक्रमा करते हुए कंचनजंघा पर्वत और गंगटोक शहर के दूर तक नजारों का आनंद लिया जा सकता है। हमारे समय पर तो यहाँ पर धुंध छाई हुई थी, सो हमें तो कुछ नजर नहीं आया पर ठन्डे मौसम का आनंद खूब लिया । खैर दर्शन करने के पश्चात् हम लोगो को भूंख सताने लगी तो पार्किग में बने एक रेस्तरा से नाश्ता, मैगी, चाय, काफी अदि का सेवन कर यहाँ से वापिस चल दिए। 

कुछ किलोमीटर बाद रास्ते में ताशी व्यू पॉइंट (Tashi View Point) भी पड़ा, पर समय अधिक हो जाने और कोहरे से पूर्णत: घिरे होने के कारण इस पॉइंट हम लोगो ने न जाने  फैसला लिया। ताशी व्यू पॉइंट गंगटोक का मुख्य दर्शनीय स्थल है, जो शहर से लगभग आठ-दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह भी यहाँ का खूबसूरत पॉइंट है, यदि मौसम साफ़ रहा तो यहाँ से बर्फ में डूबी कंचनजंघा पर्वत साफ तौर से दिखाई देता है। कंचनजंघा पर्वत श्रृंखला के साथ सूर्योदय का न भुलाये जाने वाला शानदार नजारा देखने को मिलता है।

खैर छः बजे के आसपास गंगटोक की  तरफ चलते हुये, हम लोग शहर से तीन किलोमीटर पहले; सड़क किनारे बहते हुए बेहद ही सुन्दर बकथांग झरने (Bakthang Waterfall) पर पहुँच गये। वैसे तो बारिश के मौसम में सिक्किम में जगह-जगह झरने नजर आ जाते है, पर इस झरने की ऊंचाई और इसकी बनावट इसको खास बना देता है। हरियाली के बीच पहाड़ की काफी उंचाई से पानी के अधिक मात्रा के साथ गिरता ये झरना और चारो ओर उड़ती पानी की बूंदे मंत्रमुग्ध कर देती है। जब हम लोग झरने के देखने और फोटोग्राफी का आनंद ले रहे थे बारिश शुरू हो गयी और हम लोग भागकर अपनी-अपनी कर में बैठ गये। कुछ देर बाद ड्राइवर के आते ही सात बजे के आसपास वापिस अपने होटल पहुँच गये।

एक-डेढ़ घंटा आराम करने के बाद हम लोग खाना खाने के लिए यहाँ के प्रसिद्ध एम.जी. मार्ग बाजार (M.G. Marg Market) पहुँच गये। करीब पौन किलोमीटर लम्बा यह बाजार यहाँ का बहुत ही सुन्दर और सरकार के द्वारा पूर्णत व्यवस्थित बाजार है। यहाँ पर किसी भी प्रकार के वाहन लाने पर प्रतिबन्ध है, सो इस मार्ग पर अपने पैरो पर ही घूमना पड़ता है। मार्ग के बीच में छोटे -बड़े गमलो में फूल-पौधे और सुन्दर लैम्प पोस्ट लगाकर सजावट की गयी है। बैठने के लिए जगह कुर्सिया बनवाई गयी है, जहाँ पर सैलानी/ राहगीर बैठकर आराम कर सकता है । इस मार्ग पर शहर के अच्छे होटल, विविध समानो की दुकानों के साथ खाने-पीने के अच्छे रेस्तरा है। आठ बजे के आसपास यह बाजार बंद होने लगता है। एम.जी. मार्ग के अधिकतर रेस्तरा अधबंद की हालत में थे,  साथ ही साथ उन भीड़ भी बहुत अधिक थी । हम लोग भी समय अधिक हो जाने के कारण मुश्किल से एक सीढ़ियों पर बने एक माड़वाडी रेस्तरा खुला मिला जहाँ अधिक भीड़ नहीं थी, कुछ देर में नम्बर आ जाने के बाद खाना खाकर वापिस होटल पहुँच गये।  

अब आपके लिए प्रस्तुत है, इस यात्रा के दौरान खींचे गए कुछ चित्रों  और चलचित्र  का संकलन → 
रिज पार्क में व्यवस्थित एक सुन्दर फुव्वारा (A Fountain at Ridge Park, Ridge Road, Gangtok, Sikkim)
रिज पार्क में लगा बेहद ही सुंदर नीले रंग का फूल (Blue Shade Color 's Beautiful Flower at Ridge Park, Gangtok)
रिज पार्क में लगा सफ़ेद और गुलाबी रंग का फूल (Beautiful Flower at Ridge Park, Gangtok)
पुष्प प्रदर्शनी केंद्र का आन्तरिक द्रश्य (Inside Flower Exhibition Center, Gangtok)
पुष्प प्रदर्शनी केंद्र का आन्तरिक द्रश्य (Inside Flower Exhibition Center, Gangtok)
पुष्प प्रदर्शनी केंद्र का आन्तरिक द्रश्य (Yellow color Flower Inside Flower Exhibition Center, Gangtok)
लाल रंग का अजीब फुटबाल लिली नाम का फूल  (Football Lilly Inside Flower Exhibition Center, Gangtok)
पुष्प प्रदर्शनी केंद्र का आन्तरिक द्रश्य, गंगटोक  (Inside Flower Exhibition Center, Gangtok)
पुष्प प्रदर्शनी केंद्र का आन्तरिक द्रश्य, गंगटोक  (Inside Flower Exhibition Center, Gangtok)
पुष्प प्रदर्शनी केंद्र का आन्तरिक द्रश्य, गंगटोक  (Inside Flower Exhibition Center, Gangtok)
पुष्प प्रदर्शनी केंद्र का आन्तरिक द्रश्य, गंगटोक  (Inside Flower Exhibition Center, Gangtok)
तीन रंग वाले गुलाब के फूल का संगम, पुष्प प्रदर्शनी केंद्र , गंगटोक  (Three Color Roses at Center, Gangtok)
हनुमान टोक मंदिर तक जाने वाला सीढ़ियों का रास्ता (Way to Hanuman Tok Temple, Gangtok)
सीढ़ियों के पास लगा मंदिर के बारे जानकारी देता बोर्ड (A Information Board at Hanuman Tok Temple's Way )
पहाड़ी पर स्थित हनुमान जी का मंदिर (Hanuman Temple at Hanuman Tok, Gangtok)
मंदिर में श्री हनुमान जी की प्रतिमा, गंगटोक (Shri Hanuman Statue inside Temple, Gangtok)
टोक पर दूसरा मंदिर , हनुमान टोक, गंगटोक (An another temple at the Hanuman Tok, Gangtok)
टोक पर बने व्यू पॉइंट से मंदिर का नजारा (At Hanuman Tok View point, Gangtok)
Take Rest in the Lap of The Nature .... लीजिये आनंद ठंडी हवाओं का ..... Hanuman Tok View Point, Gangtok
गणेश टोक पर जाने का रास्ता और सुन्दर द्वार (A Gate, Way to Ganesha Tok, Gangtok)
गणेश टोक पर श्री गणेश जी का सुन्दर, गणेश टोक, गंगटोक  (A Temple at Ganesha Tok, Gangtok)
मंदिर में श्री गणेश जी की प्रतिमा, गंगटोक (Shri Ganesha Statue inside Temple, Ganesh Tok, Gangtok)
गणेश टोक से कोहरे में डूबी पार्किंग का नजारा, गणेश टोक , गंगटोक (Ganesh Tok parking steeped in fog, Gangtok)
सड़क किनारे एक बहुत ही सुन्दर बकथांग झरना  (Beautiful Bakthang Water fall at the Road Side, Gangtok, Sikkim)
बकथांग झरना का नीचे के तरफ का दूसरे तरफ का हिस्सा  (Second side of Bakthang Water fall, Gangtok, Sikkim)
रात की रंगीन रोशनी में नहाया गंगटोक प्रसिद्ध एम.जी. मार्ग (Famous M.G. Road at Night, Gangtok, Sikkim)
होटल से रात के समय शहर का नजारा (In Night view of the City, Gangtok )

यह बाते हुई गंगटोक और उसके कुछ आसपास के स्थलों की अगले लेख में आप लोगो को ले चलेंगे गंगटोक से कुछ दूर के स्थलों की सैर पर आशा करता हूँ, आपको यह लेख बहुत पसंद आया होगा, यदि अच्छा लगे तो टिप्पणी के माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत करे। अब जल्द ही मिलते है, इस श्रृंखला के अगले लेख के साथ, तब तक के लिए आपका सभी का बहुत बहुत धन्यवाद  !

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गंगटोक (सिक्किम), दार्जिलिंग श्रृंखला के लेखो की सूची :  
3. एक नजर, गंगटोक शहर, सिक्किम (Sight Seen to Gangtok City, Sikkim) 
4. गंगटोक शहर के स्थानीय स्थलों का भ्रमण, सिक्किम (Sight Seen to Gangtok City, Sikkim)
5. बाबा हरभजनसिंह मंदिर, सिक्किम-Baba HarbhajanSingh Temple (Travel to East Sikkim, Gangtok) 
6. छंगू झील का सफ़र, सिक्किम - Tsomgo Lake (Travel to East Sikkim, Gangtok)
7. गंगटोक से दार्जिलिंग का सफ़र (Travel to Darjeeling, West Bengal )
8. पर्वतीय नगर दार्जीलिंग की सैर (Sight Seen of Darjeeling Hill Station, West Bengal)  
9. प्रकृति से मुलाकात - दार्जीलिंग नगर की सैर में  (Sight Seen of Darjeeling, West Bengal)   
10. दार्जीलिंग नगर की सैर - नये स्थलों के साथ  (Siight Seen of Darjeeling 2, West Bengal)  
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26 comments:

  1. रितेश जी राम राम, गंगटोक के बारे में बहुत सुन्दर चित्रण किया हैं आपने, सुन्दर चित्र, सुन्दर लेखन...बहुत खूब, अगली पोस्ट का इन्तेजार रहेगा....

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    1. प्रवीण जी, राम राम .... ब्लॉग पर आपके कम्मेंट को देखकर बहुत ख़ुशी हुई |
      टिप्पणी के लिए धन्यवाद |

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  2. Pictures hai lajawab lekin aapke vivaran ki baat hi kuch aur hai ..

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    1. Dhnyavad Vishal ji, khubsurat comment ke liye .

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (16-05-2015) को "झुकी पलकें...हिन्दी-चीनी भाई-भाई" {चर्चा अंक - 1977} पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
    ---------------

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    1. आपका बहुत - बहुत शुक्रिया |

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  4. बहुत ही सुन्देर और सरल शब्दों में गंगटोक शहर के बारे में पढ़कर अच्छा लगा। फूलो की कई किस्मे तो मैंने देखि भी नहीं है। तुमको रिज़ पार्क शाम को देखना था और हनुमान बी गणेश टोंक सुबह जल्दी ताकि वहां की छटा दिन में देख सको सूरज की रौशनी में सबकुछ बढ़िया दीखता और हम भी देख पाते ।क्योकि 3 बजे के बाद पहाड़ो पर शाम धिर आती है और बादल और बरसात तो कभीभी होती है । हमुमान जी का मन्दिर और गणेश का मन्दिर लाजबाब थे।

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    1. नमस्कार दर्शन जी....
      अपनी मन की बात रखने और हौसला बढ़ाने के लिए धन्यवाद | दर्शन जी.... हमारे पास समय का बहुत ज्यादा आभाव था वरना हम ऐसा ही करते हैं.... दूसरी बात उस समय गंगटोक में बारिश के मौसम था सो ऐसा करना वैसे भी संभव नहीं था....
      धन्यवाद

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  5. बहुत ही सुन्देर और सरल शब्दों में गंगटोक शहर के बारे में पढ़कर अच्छा लगा। फूलो की कई किस्मे तो मैंने देखि भी नहीं है। तुमको रिज़ पार्क शाम को देखना था और हनुमान बी गणेश टोंक सुबह जल्दी ताकि वहां की छटा दिन में देख सको सूरज की रौशनी में सबकुछ बढ़िया दीखता और हम भी देख पाते ।क्योकि 3 बजे के बाद पहाड़ो पर शाम धिर आती है और बादल और बरसात तो कभीभी होती है । हमुमान जी का मन्दिर और गणेश का मन्दिर लाजबाब थे।

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  6. रितेश जी आप फोटोग्राफ बहुत अच्छे लगाते हैं ​बहुत सुन्दर दृश्यों से भरा हुआ यात्रा वर्णन :))

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    1. धन्यवाद भास्कर जी....इस सुन्दर कम्मेंट के लिए...

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  7. गंगटोक शहर की बेहतरीन सैर,अकसर हनुमान जी के मंदिर शायद से काफी ऊंचाई में ही होते हैं,चाहें शिमला के जाखू मंदिर की बात करें या फिर नैनीताल के हनुमान गढ़ी की, भगवान अपने भक्तजनो की काफी परीक्षा लेते हैं दर्शन देने को

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    1. धन्यवाद हर्षिता जी... वैसे भी पहाड़ी शहरो में किसी भी भगवान के मंदिर पहाड़ो की उंचाई पर ही मिलते है ....

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  8. बेहद सुन्दर चित्र

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    1. धन्यवाद आपका जी...

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  9. हरियाली के बीच से झरते बकथांग झरने की फोटो मंत्रमुग्ध कर रही है तथा फूलों की खुशबू, ठण्डी हवाओं के झोंके का अहसास आपने घर बैठे दिलवा दिया.....! देव दर्शन के साथ साफ-सुथरे गंगटोक की यात्रा लेख का सुन्दर चित्रण.........!

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    1. मनोहारी शब्दों से युक्त टिप्पणी के लिए आपका दिल से आभार |

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  10. Ritesh Ji ram ram, bhut sunder yatra warnen,jankari aur sunder photo

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    1. राम राम अशोक जी | उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिए शुक्रिया... |

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  11. zabardast photography.. flowers are so beautiful

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    1. धन्यवाद तिवारी जी ..... हौसलाअफजाई के लिए

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  12. आपका ब्लाग बहुत सुंदर है मैं गणेश जी की तरह इसे पढ़कर ही पूरे भारत की परिक्रमा कर लेता हूँ।

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    1. आपका सुंदर टिप्पणी पढकर मन प्रसन्न हो गया सौरभ जी | आगे भी पढ़ते रहिये और टिप्पणी करके हौसला बढाते रहिये |

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  13. हनुमान जी टॉक , गणेश टॉक और गंगटोक ! दो समझ में आते हैं कि भगवान को समर्पित हैं लेकिन फिर गंग ? गंग भी कोई उधर स्थानीय भगवान तो नही रहे ? कभी कभी हिन्दू देवी देवताओं में स्थापित नामों के अलावा भी स्थानीय स्तर पर कुछ देवी देवता हो जाते हैं , इसलिए संभव है ऐसा रहा हो ! दोनों ही मंदिर बहुत शांत और सुन्दर लग रहे हैं और आपकी यात्रा मनोरंजक के साथ साथ ज्ञानवर्धक भी !

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