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Tuesday, December 16, 2014

श्री अहिक्षेत्र अतिशय तीर्थ क्षेत्र दिगम्बर जैन मंदिर, रामनगर गाँव, आमला, बरेली (Parshvnath Jain Temple)

Written by → Ritesh Gupta 
पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा नैनीताल शहर के यात्रा के बारे में । अब इस श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए आप लोगो के चलते है, रामनगर गाँव, आमला, बरेली में स्थित श्री अहिक्षेत्र पार्श्वनाथ अतिशय तीर्थ क्षेत्र दिगम्बर जैन मंदिर (श्री अहिच्छत्र ) के यात्रा वृतांत पर ।

नैनीताल से वापिसी के बाद शाम के साढ़े सात बजे के आसपास भीमताल स्थित होटल ताल पैराडाईज पहुँचने  के बाद कमरे में आराम किया । साढ़े आठ बजे के आसपास होटल के रेस्टोरेंट से रात के खाने के बुलावा आ गया । खाना कल की तरह बुफे तरीके से होटल के पूर्व नियोजित मेन्यू के हिसाब से रेस्तरा में लगाया गया था, खाना खाकर अपने-अपने कमरे में सोने के लिए चल दिए । अगले दिन सुबह नींद जल्दी ही खुल गयी, कमरे की बालकनी से भीमताल और उसके पीछे के पहाड़ी से सूर्योदय का शानदार नजारा सम्मोहित कर रहा था, और प्रात काल के वेला में झील का नजारा बड़ा ही सुन्दर लग रहा था ।  सामने के पहाड़ों के मध्य से आती मंत्रो की ध्वनि मन को पुलकित कर रही थी, शायद यह आवाज यहाँ पर बसे ओशो के आश्रम से आ रही थी । खैर आज हमारी यहाँ से वापिसी थी, सो अपनी दैनिक कार्य-कलापों से निपट कर होटल के रेस्तरा से नाश्ता करके वापिस जाने के लिए तैयार हो गए ।

श्री अहिक्षेत्र पार्श्वनाथ अतिशय तीर्थ क्षेत्र दिगम्बर जैन मंदिर, रामनगर गाँव, आमला, बरेली (Parshvnath Jain Temple, Amla)

साढ़े नौ बजे के आसपास अपनी कार में बैठकर वापिसी के राह पर चल दिए । एक घंटे बाद हम लोग हल्द्वानी पहुँच गए, हल्द्वानी के बाज़ार में अच्छी सी मिठाई की दुकान देखकर घर ले जाने के लिए उत्तराखंड की प्रसिद्ध "बाल मिठाई" खरीदी । दोपहर डेढ़ बजे के आसपास हम लोग बरेली पहुँच गए । यहाँ पर हमने अपने साथ की दूसरी टैक्सी वाले व उसके सहयात्री को छोड़ दिया, क्योंकि उनकी वापिसी की ट्रेन टिकिट बरेली जंक्शन से ही थी ।

बरेली में ही हम लोगो ने सोच लिया था की बरेली-अलीगढ़-आगरा के रास्ते में बदाऊं से पहले एक रास्ता अहिक्षेत्र पार्श्वनाथ अतिशय तीर्थ क्षेत्र दिगम्बर जैन मंदिर को जाता है, तो उस मंदिर के दर्शन का मन बनाकर अपनी आगे की यात्रा प्रारम्भ कर दी । बरेली से लगभग 23 किमी० चलने के बाद भमोरा (Bhamora) कस्बे के पास दाई तरफ हाइवे का एक साइनबोर्ड नजर आया, जिसमे आमला (Aonla) कस्बे में जाने का रास्ता दर्शाया गया था । हम लोग इसी दाई तरफ के रास्ते पर मुड़ कर आमला-बरेली लिंक (Aonla Barelliy Link Road) रोड पर आ गए । ये रास्ता बहुत ही खराब हालत में था, एक लाइन की सड़क पर कई छोटे-बड़े गड्डे थे जिससे गाड़ी की चाल काफी धीमे पड़ गयी थी । वास्तव में हमे मंदिर का रास्ता नहीं मालूम था,  लगभग बीस किमी चलने के बाद आमला (Aonla) कस्बे में जाकर किसी से रास्ता पूछा तो उसने आगे रामनगर गाँव के पास मंदिर होने का रास्ता बता दिया । अमला कस्बे एक मुस्लिम बाहुल क्षेत्र है, जहाँ पर हम लोगो कई मस्जिदे नजर आई । आमला का एक अपना रेलवे स्टेशन भी है, जहाँ से अहिक्षेत्र पार्श्वनाथ जैन मंदिर जाने के लिए साधन उपलब्ध हो जाते है । आमला से आगे का ये रास्ता बिल्कुल नया और अच्छी हालत में था, लगभग दस किमी० चलने के बाद हम लोग रामनगर गाँव की समीप स्थित अहिक्षेत्र जैन मंदिर पर पहुँच जाते है । इस प्रकार उस मोड़ (भमोरा कस्बे) से इस मंदिर के दूरी लगभग तीस किमी० हुई और खराब रास्ते के कारण समय भी अधिक लगा । खैर हम लोगो को मंदिर पहुँच कर काफी सुकुन मिला कि आखिर पहुँच ही गए, पर यहाँ पर गर्मी अपने पूरे चरम पर थी ।

भगवान पार्श्वनाथ , अहिक्षेत्र  मंदिर का परिचय  एवं पौराणिक महत्व 
श्री अहिक्षेत्र पार्श्वनाथ अतिशय तीर्थ क्षेत्र दिगम्बर जैन मंदिर, बरेली जिले अंतर्गत आमला कस्बे के एक छोटे से गाँव राम नगर के समीप के क्षेत्र में है । जैन धर्म के 23वे तीर्थकर भगवान पार्श्वनाथजी का जन्म पौष कृष्ण दशमी तिथि को तीर्थकर महावीर से 250 वर्ष पहले ईसा-पूर्व नौवी शताब्दी में वाराणसी में हुआ था । पार्श्वनाथ का चिन्ह सर्प, यक्ष, मातंग, चैत्यवृक्ष, धव, यक्षिणी- कुष्माडी है । काशी देश की नगरी वाराणसी के नरेश अश्वसेन इनके पिता थे और उनकी माता का नाम वामा देवी था । भगवान पार्श्वनाथ जी ने जिस धर्म का उपदेश दिया, वह किसी भी विशेष धर्म के लिए न था, बल्कि मानव हित में एक विशुद्ध धर्म था जो किसी कुल, जाती या वर्ण में सिमटा नहीं था ।

भगवान पार्श्वनाथजी ने आज से लगभग अठ्ठाईस सौ वर्ष पूर्व तपस्या करके इस स्थान पर केवल ज्ञान को प्राप्त किया था । जब भगवान पार्श्वनाथ मुनि अवस्था में तपस्या कर रहे थे, उस समय उनके दस भव के बैरी कमठ के जीव जो व्यन्तर वासी संबर देव के रूप में अपना विमान तपस्या में लीन प्रभु पार्श्वनाथ के ऊपर से नहीं निकाल सका और रुक गया चूँकि उत्तम संहनन और चरण शरीरी के ऊपर से गमन नही हो सकता और कमठ का जीव पूर्व भव के बैर का स्मरण कर क्रोध से तिलमिला उठा और अपने मायामयी भेष उत्पन्न कर घोर वर्षा की, भीषण पवन को  चलाया, अनेका-अनेक अस्त्र-शस्त्रों, ओलो-शोलो से प्रहार किया पर पार्श्व प्रभु क्षुब्ध नहीं हुए और अपने ध्यान में लीन रहे । प्रभु के ऊपर कमठ के जीव का उपसर्ग देख कर धरणेन्द्र और पद्मावती ने फण मण्डप रचाकर अपनी भक्ति प्रदर्शित की और उपसर्ग निवारण किया । धरणेन्द्र ने अपना फड़क वजमय तान दिया और पद्मावती ने भगवान को मस्तक पर  धारण कर उपसर्ग निवारण किया । धरणेन्द्र ने भगवान को सब ओर से घेरकर अपने फणों को ऊपर उठा लिया और देवी पद्मावती वज्रमय छत्र तानकर खड़ी हो गयी । इस प्रकार अपना सारा प्रयास विफल हुआ जानकर असुर संबर देव का साहस टूट गया और समस्त माया समेटकर प्रभु के शरण में आ गया और सच्चे मन से अपने दुष्कृत के प्रति पश्चाताप करता हुआ नमन हुआ । अहिक्षेत्र मंदिर की और अधिक जानकारी आप लेख के सबसे नीचे के लगाए गए चित्र से प्राप्त कर सकते जो वहाँ के मंदिर के दीवार पर लिखी हुई थी ।

अहिक्षेत्र  मंदिर के दर्शन
जैन मंदिर का प्रवेश द्वार पर एक लोहे का बड़ा दरवाजा लगा हुआ है । यहाँ से आगे प्रवेश करने पर मंदिर के  एक खुले हुए बड़े प्रांगण में पहुँच जाते है । पूरा प्रांगण लाल पत्थर का बना हुआ है जो की सूरज की धूप पड़ने के कारण किसी गर्म तवे के सामान गर्म था । प्रवेश द्वार के सामने मंदिर परिसर का मुख्य मंदिर श्री पार्श्वनाथ स्वामी का नजर आ आता है । अपने जूते-चप्पल उतार कर मुख्य मंदिर के दर्शन करने पहुँच जाते है । मंदिर के अंदर सामने ही एक काँच के एक बॉक्स में स्वामी पार्श्वनाथ जी के ध्यान अवस्था में श्यामवर्ण की प्रतिमा के दर्शन होते है । मंदिर के अंदर ही जैन धर्म के अन्य देवी-देवताओ के भी दर्शन होते है । मुख्य मंदिर से बाहर आने पर प्रांगण की दाई तरफ यहाँ का दूसरे मंदिर श्री अहिक्षेत्र पार्श्वनाथ तीस चौबीसी मंदिर में चल दिए  है । प्रवेश करते ही मंदिर के अंदर एक अनोखा ही रूप नजर आता है । मंदिर के दस कमल के फूल बने हुए है और हर कमल का फूल तीन भागो में विभाजित है, और हर भाग के कमल के चौबीस पत्तों में हर पत्ते पर स्वामी की श्वेत वर्ण की मूर्ति  विराजमान है । मंदिर के अंदर सामने भगवान पार्श्वनाथ जी की खड़े अवस्था में श्यामवर्ण की आदमकद प्रतिमा विराजमान है और उनके ऊपर नाग फन छत्र के रूप में बना हुआ है । इस मंदिर के दर्शन करने के बाद हम लोग क्षेत्र तीसरे मंदिर में चल दिए । इस मंदिर में भगवान पार्श्वनाथ जी की श्यामवर्ण की मूर्ति के साथ धरणेन्द्र देव व माता पद्मावती देवी के दर्शन किये ।


अब आपके लिए प्रस्तुत है, इस यात्रा के दौरान खींचे गए कुछ चित्रों  और चलचित्र  का संकलन →

भीमताल में सूर्योदय (Sunrise as Bhimtal )
सुबह के समय भीमताल झील का नजारा (Bhimtal Lake at time of Sun Rise)

श्री अहिक्षेत्र पार्श्वनाथ अतिशय तीर्थ क्षेत्र दिगम्बर जैन मंदिर का मुख्य द्वार (Main gate of The Jain Temple)

मुख्य मंदिर में भगवान पार्श्वनाथ जी मूर्ति  (Lord Shri ParsvNath ji )

मुख्य मंदिर की के अंदर की अन्य झलक (Misc. Picture of Main Tample Parsvnath ji)

मुख्य मंदिर की के अंदर की अन्य झलक (Misc. Picture of Main Tample Parsvnath ji)

मुख्य मंदिर की के अंदर की अन्य झलक (Misc. Picture of Main Tample Parsvnath ji)

मुख्य मंदिर की के अंदर की अन्य झलक (Misc. Picture of Main Tample Parsvnath ji)

अहिक्षेत्र का तीस चौबीसी मंदिर (Tees Chobisi Temple)

अहिक्षेत्र का तीस चौबीसी मंदिर में भगवान श्री पार्श्वनाथ जी (Lord Shri Parsvnath ji at Tees Chobisi Temple)

अहिक्षेत्र का तीस चौबीसी मंदिर (Tees Chobisi Temple)

अहिक्षेत्र का तीस चौबीसी मंदिर (Tees Chobisi Temple)

अहिक्षेत्र का तीस चौबीसी मंदिर में कमल के फूलों पर विराजमान भगवन (Lord Parsvnath at Tees Chobisi Temple )

अहिक्षेत्र का तीसरा मंदिर (Third Temple of Jain Tample Ahikshetra)
अहिक्षेत्र का तीसरे मंदिर में भगवान पार्श्वनाथ जी (Lord Shri Parsvnath Ji)

अहिक्षेत्र का तीसरे मंदिर में भगवान धरणेन्द्र जी (Lord Shri Dharendra ji)

अहिक्षेत्र का तीसरे मंदिर में श्री पद्मावती माता जी (Shri Padmavati Mata Ji)

परिसर में मंदिर जानकारी देता एक लेख

इस प्रकार अपने अहिक्षेत्र के दर्शन पूर्ण करके लगभग चार बजे के आसपास  उसी रास्ते से वापिस चल दिए । लगभग तीस किमी० चलने का बाद बरेली-अलीगढ़ वाले मार्ग पर आ गए । इस बार हम लोग आगरा वाया एटा से न होकर बल्कि वाया हाथरस से जाना उचित समझा । कासगंज से ही हम लोगो ने एटा जाने रास्ते को छोड़कर, हाथरस वाले रास्ते पर चल दिए यह रास्ता एटा वाले रास्ते के अपेक्षाकृत काफी अच्छा और सुरक्षित है । रात के करीब नौ बजे के आसपास हम लोग आगरा पहुँच गए । 

चलिए अब इस लेख और इस यात्रा श्रृंखला को यही विराम देते है। आशा करता हूँ आपको यह लेख पसंद आया होगा, आप की टिप्पणी की प्रतीक्षा रहेगी। जल्द ही मिलते है एक नई श्रृंखला के साथ, तब तक के लिए आपका सभी मित्रों एवं पाठकगण का धन्यवाद ! 
Written by → Ritesh Gupta 
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भीमताल-नैनीताल  से श्रृंखला के लेखो की सूची :
1. आगरा से भीमताल वाया बरेली (Agra to Bhimtal Via Bareilly → Road Review )
2. भीमताल झील →  प्रकृति से एक मुलाक़ात (Bhimtal Lake in Nainital Region)
3. नौकुचियाताल → प्रकृति का स्पर्श (NaukuchiyaTal Lake in Nainital Region )
4. नैनीताल दर्शन → (A Quick Tour to Lake City, Nainital)
5. श्री अहिक्षेत्र पार्श्वनाथ अतिशय तीर्थ क्षेत्र दिगम्बर जैन मंदिर, रामनगर गाँव, आमला, बरेली (Parshvnath Jain Temple)
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16 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (17-12-2014) को तालिबान चच्चा करे, क्योंकि उन्हें हलाल ; चर्चा मंच 1829 पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. ब्लॉग पोस्ट को चर्चा मंच में सम्मलित करने के लिए धन्यवाद

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  2. बहुत सुन्दर ...
    रामनगर से होकर हम अपने गांव जाते है वहां की बालू शाही मिठाई मुझे बहुत पसंद है ...

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    1. कम्मेंट के लिए धन्यवाद |

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  3. रितेश जी,

    बहुत सुन्दर चित्रों तथा जानकारी से परिपूर्ण यह पोस्ट मनमोहक लगी. आपकी यह नैनीताल श्रंखला बहुत मनोरंजक तथा रुचिकर थी. अगली श्रंखला का इंतज़ार.............।

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    1. मुकेश जी, नमस्कार !

      सुन्दर और प्रेरणादायक टिप्पणी के माध्यम आपका सहयोग और उत्साहवर्धन हमेशा रहता है उसके लिए आपका धन्यवाद !

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  4. बहुत रोचक चित्रमय यात्रा वृतांत...

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    1. टिप्पणी के धन्यवाद कैलाश शर्मा ! :)

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  5. रितेश जी,
    एक बात कहे आपकी पोस्ट पढ़ने का फायदा हमे तब बहुत मिलेगा जब कही यहाँ जाना होगा क्योंकि तब हमे रितेश जी ही याद आएंगे ..... सुन्दर चित्र और बढ़िया जानकारी से पोर्न पोस्ट बहुत पसंद आई........... झकास

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    1. धन्यवाद संजय जी....

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  6. एक अच्छी जानकारी के साथ बढ़िया यात्रा । ये बहुत ही बढ़िया है की समय बचा और उस समय का कही भी सदुपयोग कर लिया ।फोटो तो भोत ही सुन्दर है।

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    1. पोस्ट पसंद करने के लिए धन्यवाद सचिन जी.....

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  7. बढ़ियाँ जानकारी ।जैन मन्दिर कारीगरी का उत्कृष्ठ नमूना होते है।

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    1. धन्यवाद बुआ जी... सही कहा आपने

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  8. रितेश जी बहुत ही बढ़िया जानकारी...

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    1. धन्यवाद सचिन जी

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