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Friday, February 1, 2013

बैजनाथ (उत्तराखंड) Baijnath →भगवान शिव को समर्पित प्राचीन मंदिर (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....10)

Written By→ Ritesh Gupta

अपने पिछले लेख (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..9) में मैंने प्रसिद्ध पर्वतीय स्थल रानीखेत और वहाँ के विभिन्न स्थानों का उल्लेख किया था । इस कुमाऊँ श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए अब रानीखेत से निकलकर चलते हैं, कुमाऊँ का स्वर्ग कहा जाने वाला छोटा पर प्रसिद्ध पर्वतीय नगर “कौसानी का सूर्योदय और प्राचीन बैजनाथ मंदिर” की यात्रा पर ।

बैजनाथ (उत्तराखंड) Baijnath Temple , भगवान शिव को समर्पित अति-प्राचीन मंदिर

अगले दिन (27-जून) हम लोग सुबह पांच बजे के आसपास उठ गए । कौसानी की यह सुबह काफी ठंडी थी, हम लोग अपने कमरे से बाहर आकार सूर्योदय (Kausani Sunrise) देखने आश्रम के प्राथर्ना कक्ष के तरफ कौसानी घाटी देखने के लिए बने एक खाली स्थान (Anasakti Mountain View Point) पर आ गए । जब हमलोग इस यहाँ पहुंचे उससे पहले ही यहाँ पर प्रकृति का अदभुत नजारा मतलब कौसानी का सूर्योदय देखने के लिए काफी लोग पहले से ही अपना डेरा जमाये बैठे थे । सूर्यदेव की आने की आहट से धीरे-धीरे दूर घाटी में उजाला होना लगा पर बादलों और धुंध के कारण हिमान्छदित हिमालय की चोटियों को देखने की हमारी आशा धूमिल सी पड़ गयी केवल दूर हिमालय श्रृंखला की छाया का आभास सा हो रहा था । समय की निरंतरता के साथ सूर्यदेव ने पहाड़ों के बीच एक छोटे बच्चे की तरह से झांकना शुरू कर दिया । दूर पहाड़ों बीच उगता सूरज पल-पल एक अदभुत नजारा उजागर प्रस्तुत कर रहा था और अवस्मरणीय छाप हमारे दिल और मस्तिष्क पर छोड़ रहा था । धीरे-धीरे प्रभाकर की रश्मियों ने कौसानी की घाटी को अपने आगोश में ले शुरू कर दिया और चहुओर का सुबह का नजारा हमारे लिए एक न भुलने वाली याद बन गया । हमने सोचा यदि मौसम साफ़ होता तो सूर्य की लालिमा जब हिमालय के बर्फीले पर्वतों पर पड़ती तो यह नजारा ओर भी अदभुत और आकर्षक होता । खैर अब आप लोग भी नीचे दिए गए चित्रों और चलचित्र में सूर्योदय और सुबह के हरे-भरे पहाड़ों का नजारा लीजिए ।
Sunrise view from Ashram (सूर्य की पहली किरण से सरोबार होता कौसानी )
2
Stunning Sunrise view from Ashram (पहाडो के बीच उगते सूरज का रूप ही निराला )

कौसानी से बर्फीले पर्वत का एक खूबसूरत नजारा 
(Ice Captured Mountain View from Anasakti Asram “Photo Courtesy@Hari Ji,Jaipur”)
Another mountain view from Anasakti Ashram (आश्रम से दूसरी तरफ का सुन्दर पहाड़ी द्रश्य)
   अनासक्ति आश्रम,कौसानी में कैमरे में कैद किया गया एक चलचित्र 
A building with many rooms of Anasakti Ashram for Guest / Member
 (आश्रम का एक और भवन जहाँ सदस्यों और पर्यटको को ठहरने की सुविधा हैं )
कौसानी की यह सुबह बड़ी ही खूबसूरत थी । उगते सूरज की गुनगुनाती धूप में ठन्डे मौसम के साथ दूर तक घाटी के नज़ारे, चिड़ियों और सरसराती हवा का मधुर संगीत, लॉन की घास में ओस की बूंदे आदि के बीच काफी देर तक खोने के बाद सुध आई की अब हमे अपना बोरिया-बिस्तर समेट अपनी आगे की यात्रा पर भी निकलना हैं । अपने कमरे में पहुँचकर नित्यकर्म से निवृत होकर हम लोग लगभग पौने आठ बजे तक तैयार हो गए । आश्रम में नाश्ते का समय आठ बजे का हैं और सही आठ बजे के आसपास आश्रम की रसोईघर से नाश्ते करने के लिए बुलावा आ गया । रसोई घर में नास्ते के लिए हम लोग प्रवेश करने पहले सबसे पहले व्यक्ति थे । हम लोगो को जाने की जल्दी थी सो हमने उनसे बिना किसी के इन्तजार किये ही हमे सबसे पहले नाश्ता परोसने कहा । हमारा आग्रह स्वीकार करते ही वहाँ के रसोईया ने हमे एक प्लेट में गर्म-गर्म पूड़ी और सब्जी परोस दिया । सुबह का यह पूड़ी-सब्जी का देशी नाश्ता हमे बड़ा ही स्वादिष्ट लगा ।
A Kitchen a Anasakti Ashram (आश्रम का रसोईघर जहाँ आगंतुक खाना और नाश्ता ग्रहण करते हैं )

नाश्ता करने के पश्चात हम लोगो ने आश्रम के संचालक के कमरे में जाकर अपने एक दिन के रहने और खाने का हिसाब बनबाया । भुगतान करने के बाद दान/सहयोग राशि की रसीद भी ले ली । साढ़े आठ बजे के आसपास हमने कौसानी से विदा ली और अपने अगले अगले गंतव्य स्थल बाबा शिव के धाम “बैजनाथ मंदिर” चल दिए ।

अभी भी हमारी कार की समस्या जस की तस थी, वोही चढ़ाई पर चलते समय अटक-अटक कर चलना । अब गनीमत यह थी की आगे का सारा रास्ता बैजनाथ मंदिर तक ढलान वाला ही था । कौसानी से निकलने के बाद आगे का रास्ता बहुत सुन्दर प्राकृतिक सुंदरता से भरा पड़ा था । हमे रास्ते में कौसानी के चाय के बगान भी नजर आये जो पहाड़ की ढलान पर हरितमा लिए बड़े ही सुन्दर और व्यवस्थित लग रहे थे । बैजनाथ पहुँचने से पहले एक पहाड़ी मोड़ से नदी के किनारे स्थित बैजनाथ मंदिर की ऋंखला बड़ा ही सुन्दर नजारा दिखाई देता हैं । लगभग पौन घंटे में हम लोग गोमती नदी के एक पुल को पार करने के बाद बैजनाथ पहुँच गए । हमारे कार चालक ने हमें पुल खत्म होते ही हमें उतार दिया और सामने नीचे जा रहे सीढ़ियों वाले रास्ता की तरफ इशारा करते हुए कहा की इन सीढ़ियों वाला रास्ता उतरते हुए मंदिर पहुँच जाओगे और मैं आपको लोगो को अब इसी रास्ते पर आगे किसी खाली जगह पर मिल जाऊँगा पर आप लोगो जल्दी आईएगा, अभी हमारा सफ़र काफी लंबा हैं । हम लोग पुल के बगल से ही नदी के किनारे पेड़-पौधे बगीचे के साथ-साथ बने सीढ़ियों वाले रास्ते से उतरते हुए मंदिर की तरफ चल दिए, इस रास्ते से बहती हुई नदी का द्रश्य बड़ा मनोरम था, कुछ स्थानीय महिलाये नदी से पानी भर रही थी तो कुछ कपड़े धो रही थी । कुछ ही मिनिटो में हम लोग इसी रास्ते से मंदिर पहुँच गए । 
A Stone Board at Baijnath Temple 
(बैजनाथ मंदिर के इतिहास को दर्शता एक शिलालेख )
पहाड़ की अधिकतम ऊँचाई पर बसे कौसानी से पहले के समतल घाटी में सोमेश्वर और कौसानी के बाद गोमती नदी घाटी की समतल तलहटी में बैजनाथ आता हैं । भारत के प्राचीनतम मंदिरों में से एक प्राचीन बैजनाथ मंदिर समूह उत्तराखंड राज्य के अंतर्गत बागेश्वर जिले में छोटे कस्बे में स्थित हैं, बैजनाथ मंदिर के कारण इस कस्बे का नाम भी बैजनाथ ही हैं । बैजनाथ की दूरी कौसानी से 17किमी०, अल्मोड़ा से 53किमी और बागेश्वर से 22किमी० हैं । बैजनाथ से निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम हैं, जो यहाँ से लगभग 148 किमी० दूर हैं । इस नगर की समुंद्रतल से ऊँचाई लगभग 1126 मीटर हैं । बैजनाथ मंदिर की स्थिति (Location) बहुत ही खूबसूरत हैं, पुल के नीचे से निकलने के बाद गोमती नदी एक यू आकार का मोड़ (U Turn) लेती हैं और इस आकार के बीच के स्थान पर एक कुछ ऊँचे मंडप पर नागर स्थापत्य कला शैली में निर्मित बैजनाथ मंदिर समूह के कई छोटे, बड़े मंदिर स्थापित हैं । 
Beautiful Lord Shiva Temple of Baijnath Dham Temple
(गोमती नदी तट पर बसा भगवान शिव को समर्पित सुन्दर मंदिर समूह)
Lord Shiva Temple at Baijnath 
(मंदिर समूह के बीच भगवान शिव का मुख्य मंदिर )


कहा जाता हैं की यह मंदिर समूह का निर्माण 1150ई. के आसपास कुमाऊँ के कार्तिकेयपुर के कत्यूरी राजाओ के द्वारा बनवाया गया था और बाद में यह बारहवी और तेरहवी सदी के बीच कुमाऊँ कत्यूरी राजबंश के शासनकाल में राजधानी भी रहा था । बारहवी सदी में निर्मित यह बैजनाथ मंदिर अति प्राचीन होने के साथ-साथ ऐतहासिक और धार्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण हैं । मंदिर समूह में छोटे-बड़े मंदिर मिलाकर सत्रह गौण मंदिर हैं और यह सभी मंदिर पत्थरों से एक विशेष प्रकार के नागर शैली में बने हुए हैं । इन समूह में हर मंदिर का अपना एक ऊँचा शिखर और गर्भगृह हैं । कुछ मंदिरों के गर्भगृह में कोई भी भगवान की प्रतिमा नहीं हैं, इसका मतलब उनके देवस्थल देव विहीन हैं । इन मंदिर समूह में मुख्य मंदिर भगवान शिव का और बाकी मंदिरों में केदारेश्वर, लक्ष्मीनारायण, ब्राम्हणी देवी, गणेश, पार्वती, चंडिका, कुबेर सूर्य आदि के मंदिर हैं । वैसे तो यहाँ पर सभी मंदिरों के शिखर सुरक्षित हैं पर मुख्य मंदिर के शिखर पूर्व में नष्ट हो चुका था और वर्तमान में इस मंदिर की छत चौकोर ढलवा आकार में लोहे की टिन निर्मित हैं । मंदिर परिसर में देखो तो कई जगह प्राचीन मूर्तियां व उनके अवशेष देखे जा सकते हैं । 
A Statue at Temple Wall 
(मंदिर के दीवार पर उकेरी गई एक प्रतिमा)
हम लोगो ने मंदिर परिसर में कदम रखते ही सबसे पहले अपने पादुकाए एक तरफ उतार दी और हाथपैर धोने के बाद बाद दर्शन हेतु चल दिए । मंदिर परिसर में कई-छोटे बड़े मंदिर और निर्माण शैली देखकर हमे इन मंदिरों की खूबसूरती का सुखद अहसास हुआ । मंदिर परिसर बिल्कुल साफ सुधरा और गन्दगी का नामोनिशान भी नहीं था । एक बात और वैसे अधिकतर मंदिरों और देवस्थलों के आसपास काफी दुकाने होती है, पर यहाँ पर ऐसा कुछ नहीं था । जो भी एकाद दुकाने थी वो भी मुख्य सड़क पर ही थी । एक-एक करके हमने मंदिरों में दर्शन आरंभ कर दिया, कुछ मंदिरों के अंदर प्रतिमाये थी और कुछ मंदिरों के अंदर से खाली थे संभवतः यहाँ पर स्थापित प्रतिमाये कभी नष्ट हो गयी होगी । कुछ मंदिरों के शिखर काफी छोटे तो कुछ के शिखर काफी ऊँचे थे, हर शिखर के ऊपर एक चक्र जैसी पत्थर से निर्मित गोल आकृति थी । मंदिरों के द्वार के आसपास और दीवारों के पत्थरो पर कुछ मूर्तिया उकेरी गयी थी जिनमे से कुछ की स्पष्टता समय के कालचक्र के साथ हल्की धूमिल सी हो गयी थी । इसी तरह से मंदिरों के दर्शन करते हुए और मंदिरों का अवलोकन करते हुए हम लोग परिसर के बीच बने मुख्य मंदिर पहुचँ गए, इस मंदिर पर अन्य मंदिरो की तरह शिखर नहीं था और द्वार पर कई सारी घंटिया बंधी हुई थी । अब मुझे यह याद तो नहीं की कौन सा मंदिर कौन से देवता या देवी जी का था पर परिसर में हमने कई आराध्य देवो के साथ-साथ भगवान शिव, माँ पार्वती और मुख्य मंदिर में ब्राम्हणी देवी दर्शन किये । 
Free Flowing Gomti River at Baijnath  (सुन्दर द्रश्य प्रस्तुत करती बहती हुई 
गोमती नदी और पार्श्व में नजर आता बैजनाथ नगर)


बैजनाथ मंदिरों में दर्शन करने के बाद हमने रुख नदी की तरफ कर दिया । मंदिर के सामने एक ऊँचाई वाले चबूतरे से छूकर बहती नदी के कुछ गहरे पानी में हमने मछलियों को तैरता देखा । यहाँ पर पानी में मछलियों की अधिकता कुछ ज्यादा ही थी । इनमे से कुछ का आकार तो काफी बड़ा भी था, इतनी सारी मछलियों को स्वछंद रूप से तैरते देखकर मन प्रसन्न हो गए उन्हें खाना खिलाने के वही पर बैठे एक व्यक्ति से कुछ दाने (भुने चने इत्यादि) ख़रीदे । पानी में दाने डालते ही मछलिया में बड़ी तेजी से दाने पर झप्पटा मारने लगी, ऐसा लगा कि जैसे पानी में कोई भूचाल सा आ गया हो । वैसे कहते है की पानी में तैरती हुई मछलियों को देखने और उन्हें खाना खिलाने से पुण्य और सकारात्मक उर्जा का संचालन होता हैं, ठीक वैसा ही अनुभव हमको इस समय भी हो रहा था । 
Fishes In the Gomati River near Baijnath Temple 
(मंदिर के बराबर बहती गोमती नदी में स्वछंद विचरण करती मछलियाँ)
Lovely Fishes in the Clear Water of Gomti River (नदी के साफ़ पानी में मछलिया )
यहाँ से मछलियो का अवलोकन करने के बाद हमने कुछ और दाने ख़रीदे और मुख्य मंदिर के सामने बने सीढ़ियों से उतरकर गोमती नदी के तट पर पहुँच गए । यहाँ पर नदी के पानी का बहाव बिल्कुल संतुलित था न ज्यादा तेज और न ही ज्यादा हल्का । पानी की गहराई भी करीब घुटनों तक ही थी और पानी इतना स्वच्छ था कि पानी के तल की बालू, छोटे पत्थर और तैरती मछलियाँ बिल्कुल साफ नजर आ रही थी । नदी के एक तरफ और बीच-बीच में काफी बड़े-बड़े पड़े हुए थे, हम लोग इन्ही पत्थरो के ऊपर से होते हुए नदी के उस पार जा पहुँच गए । अपने जूते-चप्पल उतारकर और अपने कपड़े सिमटाकर नदी के पानी उतर गए और वही से मछलियों के दाना डालने लगे । दाने डालते ही मछलियाँ उन दानो को लपकने के आगे बढ़ती और फ़टाफ़ट से मुहँ में दबाकर पीछे हट जाती थी, उन तैरती मछलियों के करीब जाने हमारी सारी कोशिश बेकार हो रही थी, क्योंकि हम लोग जितना करीब जाते वो उतने ही दूर हो जाती थी । खैर जैसे-तैसे उनका एक फोटो लिया । नदी का पानी काफी ठंडा था पर मन एक असीम सुकुन पंहुचा रहा था । सूर्ये की तेज रौशनी ने तल में साफ़-साफ नजर आती तैरती मछलियों और उनकी अठखेलियो ने हमें और हमारे बच्चो को बहुत आकर्षित किया । हम लोगो को यहाँ पर पानी में टहलते हुए आभास ही नहीं हुआ की कितना समय बीत गया । जब हम लोग पानी में अठखेलिया कर रहे थे तभी हमे लगा की जैसे कोई हमे आवाज दे रहा हैं, मुड़कर देखा तो मंदिर से हमारा कार चालक हमे पुकार रहा था और समय की दुहाई देता हुआ हमसे चलने का अनुग्रह कर रहा था । 
Lord Shiva’s Temple of Baijnath Dham Temple (नदी के पार से नजर आता बैजनाथ मंदिर )
My Brother “Anuj” & Family at Baijnath Temple (चलो एक चित्र मंदिर के सामने भी हो जाए )

सुबह के करीब दस बजे का समय हो रहा था और हमे अपनी खराब कार को भी बागेश्वर में सर्विस सेंटर ढूंढकर सही कराना था, सो समय को महत्व को समझते हुए हमने सबसे वापिस चलने को कहा । मैंने एक यहाँ पर चलचित्र भी बनाया था जिसे आप लोग नीचे दिए गए लिंक (YouTube Video Link) पर क्लीक करके देख सकते हैं । इस चलचित्र से आपको बैजनाथ मंदिर और गोमती नदी की स्थिति का काफी हद तक पता लग जाएगा । हमने कुछ फोटो नदी के और वही से नजर आते बैजनाथ मंदिर के लिए और अपने पादुकाए पहनी और वापिस चल दिए ।
 उत्तराखंड के बैजनाथ मंदिर में दर्शाया गया एक चलचित्र , आप भी आनंद ले इस चलचित्र का


हम लोग मंदिर से निकलने के बाद सीढ़ियों से होते हुए मुख्य सड़क पर पहुँच गए देखा तो कार और कार चालक का अतापता नहीं था । थोड़ा इधर-उधर देखा तो काफी दूर कार नजर आ गयी । तेज कदमो से पहुँचकर कार में बैठे और अपनी आगे की यात्रा प्रारम्भ कर दी । अभी भी कार की तबियत नासाज ही थी, जब भी पहाड़ी ढलान आती तो किसी जवान व्यक्ति की तरह दौड़ती चली जा रही और पहाड़ी चढ़ाई आते ही किसी बूढ़े व्यक्ति की तरह खड़ाखड़ाकर धीमे गति से चलना शुरू कर देती । गोमती नदी के साथ-साथ सड़क मार्ग से होते हुए करीब पौन घंटे में हम लोग बैजनाथ से करीब 22 किमी० दूर बागेश्वर जिला पहुँच गए । सरयू और गोमती नदी के संगम किनारे बसा बागेश्वर उत्तराखंड राज्य के प्रमुख जिलो में से एक प्रसिद्ध नगर हैं । 

बागेश्वर के प्रमुख चौराहे पर काफी जाम लगा हुआ था, इस जाम से निकलते हुए हम लोग मारुती सर्विस सेंटर के नेट पर दर्शाये पते के हिसाब से केपकोट रोड पर चल दिए । करीब एक-दो किमी० आगे निकलने के बाद वही के किसी स्थानीय मारुती कार वाले से सर्विस सेंटर का मालूम किया तो पता चला की सेंटर यहाँ से बदलकर अब महिर्षि विध्यामंदिर के सामने, अल्मोड़ा मार्ग पर पहुँच गया । अब हमारे कार चालक ने कार वापिस शहर की तरफ मोड़ दिया, चौराहे पर जाकर अल्मोड़ा मार्ग के लिए किसी पूछा । उसके बाद गोमती नदी के पुल को पार करने के नदी के साथ-साथ अल्मोड़ा मार्ग SH-37 पर चलते रहे । कुछ किलोमीटर चलने के बाद दाए तरफ एक स्कूल के सामने एक मारुती का सर्विस सेंटर नजर आया । यहाँ पर हमारे कार चालक ने गाड़ी की समस्या को वहाँ के इंजिनियर को समझाया । हम लोग कार के शो रूम में बैठकर कार के सही होने की प्रतीक्षा करने लगे । बागेश्वर का मौसम इस समय कुछ गर्म था और सेंटर में पंखे सल रहे थे । लगभग पन्द्रह मिनिट के बाद कार ठीक हो गयी, हमने कार चालक से खराबी के बारे में मालूम किया तो पता चला की कार के प्लग में परेशानी थी और उसमे करंट नहीं बन रहा था । हमने कहा कि नई कार में इस तरह की खराबी तो नहीं आनी चाहिये तो कार चालक ने बताया की जब यह कार शोरूम से आई थी तभी किसी अनाड़ी कार चालक ने गाड़ी को पहाड़ की दुर्घटना कर दी थी और हो सकता हैं यह समस्या उसी कारण से आज आई हो । खैर जो भी हो हमे खुशी इस बात की थी, हमारी टैक्सी कार अब बिल्कुल सही हो गयी थी और अब आगे के सफ़र में चलने के लिए बिल्कुल तैयार थी । नीचे मैंने बागेश्वर के सर्विस सेंटर का फोटो पता सहित लगाने मेरा उद्धेश्य केवल आप लोगो तक इस सेंटर के बारे केवल जानकारी पहुँचाना न कि किसी का विज्ञापन करना । कार चालक के द्वारा कुछ कागजी कार्यवाही करने के बाद हम लोग अपने अगले पड़ाव भगवान शिव की नगरी “पाताल भुवनेश्वर” चल दिए । 

Maruti Suzuki Nainital Motors & Service Center, Opp. Mahrishi Vidhya Mandir, 
Almora Road , Bageshwar (बागेश्वर का मारुती सर्विस सेंटर)
चलिए कुमाऊँ श्रृंखला के इस बैजनाथ वाले लेख और सफ़र यही विश्राम दे देते है । जल्द ही अपनी इस “कुमाऊँ श्रृंखला” के अगले यात्रा लेख के नई कड़ी में “पाताल भुवनेश्वर” यात्रा की बारे अपने अनुभव आपके समक्ष प्रस्तुत करूँगा । अगले लेख तक के लिए आप सभी पाठकों को धन्यवाद और राम -राम ! वन्देमातरम       क्रमशः ………..
▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬       Table of Contents  कुमाऊँ यात्रा श्रृंखला के लेखो की सूची :      
4. भीमताल → सुन्दर टापू वाली कुमायूं की सबसे बड़ी झील (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..4)  
5. नौकुचियाताल→ नौ कोने वाली सुन्दर झील ( (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..5)   
6. सातताल → कुमाऊँ की सबसे सुन्दर झील  (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..6)
7. नैनीताल → माँ नैनादेवी मंदिर और श्री कैंची धाम (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..7)   
8. रानीखेत → हिमालय का खूबसूरत पर्वतीय नगर (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..8) 
9.  कौसानी → प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पर्वतीय नगर (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....9)
10. बैजनाथ (उत्तराखंड)→भगवान शिव को समर्पित अति-प्राचीन मंदिर (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....10) 
11. पाताल भुवनेश्वर → हिमालय की गोद में एक अद्भुत पवित्र गुफा (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....11) 
12. जागेश्वर धाम → पाताल भुवनेश्वर से जागेश्वर धाम यात्रा (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....12) 
13. जागेश्वर (ज्योतिर्लिंग)→कुमाऊं स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध धाम के दर्शन (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....13) 
14. नैनीताल → खूबसूरत नैनी झील और सम्पूर्ण यात्रा सार (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....14) ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬  

35 comments:

  1. रितेश भाई इस जगह का फ़ोटो के साथ विवरण अपनी यात्रा की याद करा गया।

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  2. सुंदर सचित्र यात्रा विवरण प्रस्तुति के लिए बहुत२ बधाई रीतेश जी,,,

    RECENT POST शहीदों की याद में,

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  3. बहुत सुन्दर लेखन व चित्रांकन, धन्यवाद, वन्देमातरम...

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  4. बढिया यात्रा चल रही है……… शुभकामनाएं

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    Replies
    1. @जाटदेवता जी.. टिप्पणी के लिए धन्यवाद |
      @धीरेन्द्र जी.. धन्यवाद !
      @प्रवीण जी... धन्यवाद !
      @ललित जी.. आपका ब्लॉग पर स्वागत हैं | टिप्पणी के लिए धन्यावाद

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  5. ham bhi aapke piche piche hithe aapke is yatra vratant me ...............bahut accha laga, bahut acchijankari di aapne, ab to mera manbhihorha haiki ekbaar jakar ghoomhi aau.................

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  6. कौसानी के दृश्य दोबारा देखकर आनंद आ गया।
    सुन्दर प्रस्तुति ।

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    1. @Amrendra Ji... जरुर जाइए..बहुत अच्छी जगह हैं...| धन्यवाद !

      @दराल जी.. धन्यवाद !

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  7. thanks ! I have been to all 12 jyotirlingas and four dhams if someone needs any info you can contact me . Bam Bam bhole nath!

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    1. Thanks ! Sure! when needed, I'll be connected for 12 jyotirlingas and four dhams details.
      जय भोले नाथ की...!

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  8. अनाशक्ति आश्रम न देखने का बहुत अफ़सोस था ..पर तुम्हारे विडिओ ने वो कमी पूरी कर दी रितेश .बहुत ही खूबसूरती से वहाँ की तस्वीरे ली है और मछलियों का सीन तो बहुत ही बढ़िया लगा ...मुझे बहुत अफ़सोस रहा की हम बैजनाथ भी न देख सके ..हमारे ड्राइवर ने कहा की वहाँ कुछ नहीं है ..खेर, फिर कभी इस सुंदर जगह के दर्शन करेगे ..जल्दी ही पातळ भुवनेश्वर के भी दर्शन करवा दो ...जहाँ से हम वापस लौट आये थे ..

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    1. धन्यवाद दर्शन जी....
      मुझे लगता हैं की आपको ड्राइवर अच्छा नहीं मिला..जिसने आपको ढंग से घुमाया भी नहीं और आधे रास्ते से वापिस ले आया...| खैर अगली बार इस कमी को भी पूरा कर देना..|
      धन्यवाद

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  9. कौसानी की मनोरम खूबसूरती को कैमरे में बाखूबी उतारा है आपने ...
    शिव भोले के मंदिर अनुपम क्षटा बीकर रहा है ...

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  10. बहुत सुन्दर ब्लॉग और दिलचस्प यात्रा .. नैनीताल और कौसानी तो घूम चुका हूँ ... दरअसल नैनीताल मुझे बहुत ज्यादा पसंद है ..

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  11. विस्‍तृत, सुस्‍पष्‍ट जानकारियॉं, रोचक विवरण और नयनाभिरात चित्र। आनन्‍द ही आनन्‍द।

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  12. bahut sundar yatra vernan..nainital kosani ki sundarta kabhi bhulayee nahi ja sakti..chitro se is yatra vernan me char chand lag gaye..

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  13. @Dr. Nisha Maharana ji: धन्यावाद.....आपका स्वागत हैं |

    @Shalini Kaushik ji : प्रशंसायुक टिप्पणी के लिए आपका आभार...आपका स्वागत हैं |

    @Digambar Nasba ji : प्रशंसायुक टिप्पणी के लिए आपका आभार...आपका स्वागत हैं |

    @Rahul Dil Se ji : नैनीताल तो अच्छा है ही, पर उसके आसपास और भी सुन्दरता बिखरी पड़ी हैं..धन्यवाद |

    @Vishnu Bairagi ji : प्रशंसायुक टिप्पणी के लिए आपका आभार ...आपका स्वागत हैं |

    @Kavita Verma ji : प्रशंसायुक टिप्पणी के लिए आपका आभार...आपका स्वागत हैं |

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  14. आपकी पोस्ट 14 - 02- 2013 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें ।

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  15. बैजनाथ मंदिर की अपनी यात्रा याद आ गई।

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  16. @दिलबाग विर्क जी... धन्यवाद |
    @मनीष कुमार जी.... धन्यवाद |

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  17. अच्छा यात्रा-विवरण चल रहा है और ये लेख भी उसी सुन्दर श्रंखला की गरिमा को बढाता ही है | इस लेख की एक खास बात इसकी शुरूआती तस्वीरें भी हैं |

    सादर

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  19. वैसे तो उत्तराखंड कई बार जाना हो चुका है, लेकिन लग ये रहा है कि आज पहली बार होकर आया हूं।
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  20. @Akas Mishra ji: लेख और उसकी तस्वीरों को पसंद करने के लिए धन्यवाद...

    @बेनामी : You are Most welcome....Thanks for Liking & Reading my Post.

    @महेंद्र श्रीवास्तव जी...: आपका ब्लॉग पर स्वागत हैं | लेख तक पहुचने और उस को दिल से सराहने के लिए धन्यवाद...

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    1. आपका हार्दिक अभिनन्दन और धन्यवाद

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  27. रितेश जी आपने बैजनाथ धाम का व वहा के वातावरण का सजीव चित्रण किया है...ऐसे यात्राव्तंत लेखों को अब आप शब्दनगरी जो की एक ब्लॉगिंग साईट है पर लिखकर अन्य पाठकों को अपनी रचना से अवगत कराएं..... आपकी सुन्दर रचनाओं का हमें बेसब्री से इंतज़ार रहेगा

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