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Friday, November 23, 2012

सातताल ( Sattal) → कुमाऊँ की सबसे सुन्दर झील (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..6)


प्रिय मित्रों और पाठकगणों को नमस्कार !

आप लोगो ने मेरा पिछला लेख (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..5) तो पढ़ा ही होगा, जिसमे मैंने नैनीताल क्षेत्र की दो प्रमुख झील, भीमताल और नौकुचियाताल की सैर का वर्णन किया था । अब अपनी इस कुमाऊँ की श्रृंखला को आगे तरफ अग्रसर करते हुए इस लेख में आपको ले चलता हूँ, भीमताल के पास स्थित “हनुमानगढ़ मंदिर” और प्रकृति की गोद में शांत वातावण में स्थित सरोवर नगरी नैनीताल की सबसे सुन्दर झील “सातताल झील”
नौकुचिया झील पर काफी समय व्यतीत हो जाने के बाद समय को महत्व को समझते हुए अब हमारा यहाँ से चलने को समय हो गया था । हमारा टैक्सी चालक भी हमे ढूंढते हुए हमे बुलाने आ पंहुचा था । नौकुचिया झील की स्मृतियों को ह्रदय में कैद कर हम लोग अपनी टैक्सी में बैठ जिस रास्ते से आये तो उसी रास्ते से वापिस चल दिए । लगभग पांच किलीमीटर सफ़र करने के बाद हम लोग भीमताल के उसी स्थान पर पहुँच गए जहाँ से हम भीमताल से चले थे । भीमताल पर रुकने का हमारा कोई मतलब नहीं था, सो हम लोग झील के किनारे-किनारे झील का अवलोकन करते हुए और फिर उसके बाद भीमताल के बायपास वाले रास्ते से न होकर पुराने वाले रास्ते पर चलते रहे । कुछ देर चलने के बाद दूर से ही एक श्री हनुमान जी आदमकद मूर्ति नजर आने लगी । धीरे-धीरे हम लोग उस मूर्ति के पास तक पहुँच गए, यह आदमकद मूर्ति एक मंदिर के प्रांगण स्थापित थी । हमारे कार चालक ने कार को सड़क के किनारे लगा दिया और कहा कि आप लोग जल्दी से दर्शन करके आ जाओ, इस समय छह बज रहे और हम लोगो को अभी सातताल भी जाना हैं ।

हनुमानगढ़  मंदिर (Hanumangarh Temple) के दर्शन :→

A large statue of Sri Hanuman jI at Hanumangarh Temple Near Bhimtal (भीमताल के पास हनुमानगढ़ मंदिर में स्थापित श्री हनुमानजी की मूर्ति)
A View of Inside Hanumangarh Temple (मंदिर में फोटो खीचनें की आज्ञा नहीं थी सो ऊपर से लिया गया एक फोटो )
यह मंदिर भीमताल के रास्ते में हल्की-फुल्की पहाड़ियों के बीच पड़ता हैं और भीमताल से काफी समीप (कुछ किलोमीटर) भी हैं । यहाँ पर यह मंदिर हनुमानगढ़ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हैं । आप लोग भ्रमित न हो इसलिए बता देता हूँ की नैनीताल के पास जो मंदिर उसका नाम हनुमानगढ़ी मंदिर हैं और भीमताल वाले इस मंदिर का नाम हनुमानगढ़ मंदिर हैं । हम लोगो ने मंदिर में प्रवेश करने से पहले हाथ धोए और मंदिर के प्रवेश द्वार से मंदिर में प्रवेश किया । प्रवेश द्वार कुछ गुफा जैसा बनाया गया था । इस रास्ते से होते हुए मंदिर के खुले प्रांगण में जा पहुंचे, यहाँ पर पानी का एक छोटा सा सुन्दर तालाब बनाया गया था जिसे पार करने के लिए एक छोटे से पुल से होकर गुजरना होता हैं । यही पर भगवान श्री हनुमान जी की एक आदमकद मंगलमय मूर्ति स्थापित की हुई थी । यहाँ से श्री हनुमान जी की चेहरे के दर्शन करने के लिए सर को पीछे कंधे तक झुकना पड़ रहा था, वैसे सीधे दर्शन तो सड़क मार्ग से ही हो जाते हैं । छोटे से पुल से होते हुए हम लोगो एक गुफा में माता श्री वैष्णो देवी जी का दर्शन लाभ प्राप्त हुआ । उसके बाद मंदिर के अंदर ही चलते रहे, अंदर से मंदिर परिसर काफी बड़ा था, लगता था जैसे यह कोई आश्रम है । मंदिर के अंदर चलते हुए वहाँ स्थापित कई सारे पूजनीय देवी-देवताओं मंदिर में दर्शन करते हुए मंदिर के दूसरे रास्ते बाहर आ गए ।


Lord Shri Hanuman ji Statue at Hanumangarh Temple (मंदिर में भगवान श्री हनुमान जी का एक अन्य द्रश्य)
जब हमने मंदिर में प्रवेश किया था उस समय कोई भीड़भाड़ नहीं थी न ही किसी भगवान के पास कोई पुजारी बैठा हुआ मिला था पर हमारे मंदिर से बाहर आते-आते मंदिर में काफी भीड़ बढ़ गयी थी और पुजारी लोगो ने भी अपने-अपने नियत स्थान पर बैठ गए थे । बाहर आने के बाद मंदिर परिसर के ही सड़क किनारे के मंदिर में दर्शन किये और प्रसाद भी ग्रहण किया । चलने से पहले मैंने सड़क से ही श्री हनुमान जी की आदमकद मूर्ति का अपने कैमरे से चित्र लेने का प्रयास किया तो सफलता नहीं मिली फिर सड़क के उस पार की छोटी से पहाड़ी से चढ़कर श्री हनुमान जी (इस लेख का पहला चित्र) फोटो खीचा गया । लगभग आधा घंटा यहाँ पर बिताने के बाद हम लोग टैक्सी में बैठकर अपने अगले गंतव्य स्थल सातताल तरफ प्रस्थान कर गए ।
Road Map from Bhimtal to Saattal….about 12.50KM away from Bhimtal
सातताल  झील (SATTAL LAKE) की सैर  :→

हनुमानगढ़ मंदिर से कुछ किलोमीटर भोवाली वाले रास्ते पर चलने के बाद बाये तरफ के एक रास्ता आता हैं, जो कि सातताल की तरफ जाता हैं । हम लोग मुख्य रास्ते से इस बायीं तरफ वाले रास्ते पर मुड़ कर चलते रहे । थोड़ी देर चलते रहने के बाद सड़क के किनारे और पहाड़ की ऊँचाई और गहराई में घने पहाड़ी पेड़-पौधे दिखने शुरू हो गये । यह रास्ता काफी खूबसूरत नजारों से भरा हुआ था पर इस समय मार्ग पर वाहनों का आवागमन लगभग शून्य ही था । सूर्य की रौशनी मद्धम पड़ चुकी थी और संध्याकालीन धुधलिका ने पहाड़ों के अपने आगोश में लेना शुरू कर दिया था । मौसम अपेक्षाकृत ठंडा हो चुका था, ठंडी हवा का आवागमन मन आत्मविभोर कर रहा था । ऐसे वातावरण में कुछ देर चलने के बाद पहाड़ की गहराई में एक खूबूसरत छोटी झील नजर आई जो घने जंगल, पेड़ पौधे के बीच एक वीराने में स्थित थी और मेरे ख्याल से शायद ही कोई वहाँ जाता हो । यह झील सातताल क्षेत्र में स्थित झीलों में एक झील हैं और इसका नाम गरुण ताल हैं । इसी सड़क के घुमावदार रास्ते से होते हुए हम लोग कुछ देर में सातताल की मुख्य झील स्थल तक पहुँच जाते हैं ।
हिमालय के कम ऊँचाई वाले इलाके में घने जंगलो के बीच सात तालो मतलब सात खूबसूरत झीलो (Seven Lakes) का एक समूह स्थित हैं । इसी सात झीलों के समूह को ही सातताल कहा जाता हैं । इस समूह में सात झीले हैं, जिनका नाम इस प्रकार (१)पन्ना या गरुण ताल (२) नल-दमयंती ताल (३) पूर्ण ताल (४) सीताताल (५) रामताल (६) लक्ष्मणताल (७) सूखा ताल । यह सभी झीले घने जंगलो के बीच आसपास ही स्थित हैं । सातताल की दूरी नैनीताल से 23 किमी०, भवाली से 10.50 किमी० और भीमताल से 12.50 किमी० हैं । सातताल की समुंद्रतल ऊँचाई लगभग 1300 मीटर (3900 फिट) हैं । यहाँ की मुख्य झील सीताताल, रामताल और लक्ष्मणताल है जो आपस में एक दूसरे से जुड़े हुये हैं । विभिन्न प्रजाति के घुमक्कड़ पक्षियों हेतु सातताल झील का इलाका उनके लिए स्वर्ग के समान हैं । कुमाऊँ मंडल विकास निगम ने यहाँ पर काफी विकास कार्य कराये हुए हैं, जैसे झील के किनारे बैठने के लिए सीढ़िया, झील के उस पार जाने के लिए पुल, सुन्दर फूलो के बगीचे, मनोरंजन हेतु बच्चो के पार्क, नौकायन के लिए नावों और खाने-पीने के लिए दुकानों की व्यवस्था आदि । यहाँ के शांत वातारवण में कुछ पल बिताने के लिये यहाँ पर कुछ रिसोर्ट और सरकारी गेस्ट हॉउस की भी व्यवस्था हैं ।
View of Most Beautiful Lake “Sattal” in the evening (संध्या के समय सात ताल का स्वरूप)
एक बात तो हैं की हमारे देश में जो स्थल हैं वो कही न कही से पौराणिक या एतिहासिक कथाओ से जुड़े हुए हैं, ऐसा ही कुछ सात ताल के साथ भी हैं । पौराणिक कथा के अनुसार महाभारत काल में एक प्रसिद्ध राजा थे जिनका नाम था “नल” उनकी पत्नी का नाम था “दमयन्ती” । किसी कारण से अपने भाई “पुष्कर” के द्वारा चौदह वर्ष के लिए राज्य निष्कासन की सजा सुनाये जाने के कारण “नल और दमयन्ती” गरीब और दयनीय हालत में दर-दर भटकते रहे । भटकते हुए उन लोगो ने सातताल क्षेत्र के शांत वातावरण में शरण ली और अपने वनवास के दिन व्यतीत करने लगे । उन्ही के नाम पर इस क्षेत्र में एक ताल भी जिसका नाम “नल-दमयन्ती ताल” हैं । अपनी पिछ्ली यात्राओ में मैं इस ताल तक जा चुका हूँ, यह ताल सातताल रोड पर महारा गाँव से लगभग तीन किमी० दूर हैं । बताते है कि पहले यह ताल काफी बड़ा था पर आबादी और समय के कालचक्र में अब यह एक छोटे से भाग में सिमट गया हैं । यह ताल चारों तरफ से पक्का बना हुआ हैं और इस ताल में विभिन्न प्रकार के छोटी-बड़ी मछलिया को मुक्त अवस्था में तैरते हुए देखा जा सकता हैं । इस ताल में मछलियो के अधिकता इतनी हैं की कोई खाने के की वस्तु डालो तो ऐसा आभास होता हैं कि पानी में एक छोटा सा भूचाल आ गया हो । कहते है कि बाद नल-और दमयन्ती के समाधी इसी ताल में बन गयी थी । सीताताल, रामताल और लक्ष्मणताल के बारे कहा जाता हैं की कभी यहाँ पर राम-सीता और लक्ष्मण रहे थे ।


Colorful Boat in the Lake (सातताल झील में नौकायन की अच्छी सुविधा हैं…..)

Bridge between two lakes of Sattal (सात ताल की दो झीलों के बिल्कुल बीच में बना छोटा पुल जो दूसरे तरफ की पहाड़ी से जुड़ा हुआ हैं )
अब चलते हैं अपने यात्रा वृतांत पर । कार को टैक्सी स्टैंड पर खड़ा करने के बाद हम लोग जल्दी से झील की तरफ चल दिए । झील तक जाने के लिए सड़क से चौड़ी सीढ़िया बनी हुयी हैं, सीढ़ियों के दायें तरफ लाइन से खाने-पीने व अन्य वस्तुओ दुकाने थी और बाए तरफ दुकानदारों कुर्सी मेज और बच्चो के मनोरंजन के लिए बिजली चलित झूलो कि व्यवस्था थी । जब हम यहाँ पहुंचे तो यह स्थल भीड़भाड़ बिल्कुल भी नहीं थी । झूले बंद पड़े हुए थे, दुकानों में लाईट जल चुकी थी, कुछ लोग (संभवतः वो भी हमारे ही तरह देर से झील का अवलोकन करने आये हो) झील के किनारे टहल रहे थे, कुछ लोग झील के किनारे बैठ झील का अवलोकन कर रहे थे तो कुछ लोग रेस्तरा में खाने का आनंद ले रहे थे ।
 
हम लोग भी सीढ़िया उतरते हुए झील के नजदीक तक पहुँच गए । झील के नजदीक पहुँच कर हमें लगा की वास्तव में यह कुमाऊँ के सबसे सुन्दर झीलों में से एक हैं । यहाँ ध्यान देखने पर पता चलता हैं की वास्तव में यहाँ पर तीन झीले (सीताताल, रामताल और लक्ष्मणताल) हैं, जो आपस में जुड़ी हुई हैं और रामताल और सीताताल के बीच झील संधि के ऊपर एक छोटा सा पुल बना हुआ हैं जो झील के उसपार के पहाड़ी टीले को जोड़ता हैं । झील के चारों तरफ घने पेड़ पौधों ओंक और पाइन का जंगल नजर आ रहा था जो झील की खूबसूरती में चारचांद लगा रहा था । शीतल हवा के चलने से झील का स्वच्छ पानी झलझला रहा था । झील के किनारे के हरे-भरे पहाड़ों और संध्याकालीन नीले आकाश के कारण झील का पानी कभी हरा तो कभी नीला सद्र्श्य उत्पन्न हो रहा था । संध्या हो जाने के कारण झील में नावों का आवागमन बिल्कुल बंद था और सभी नावे झील के एक किनारे लगी हुयी थी ।

Picture taken from end of the Bridge (पुल के दूसरे तरफ से दिखता संध्या के समय सात ताल के नजारा )
 
Another picture of Sattal Lake (सात ताल अन्य चित्र झील के मुख्य किनारे से )
हम लोग झील के शांत वातावरण में किनारे-किनारे टहलते हुए झील संधि के ऊपर बने लकड़ी और सीमेंट से बने सुन्दर पुल के ऊपर पहुँच गए । पुल के बीच से झील के दोनो तरफ का नज़ारा बड़ा ही शानदार था । धीरे-धीरे घिरता हुआ अँधेरा और चारों तरफ की शांति, एक रहस्मयी वातावरण उत्पन्न कर रही थी । झील का अच्छे से अवलोकन करने, फोटो खींचने और काफी समय व्यतीत करने के बाद हम लोग झील से वापिस चल दिये तभी मेरे छोटे बेटे “अक्षत” की नजर बंद झूलों पर पड़ गयी । हम तो जानते ही हैं कि बालपन बड़ा हठी होता हैं अगर एक बार जिद पकड़ ली तो जब तक काम पूरा न हो जाये उन्हें चैन नहीं मिलता तो ऐसी ही जिद मेरे छोटे बेटे में झूला झूलने पकड़ ली । हमने भी उसे एक बंद झूले पर बिठाया और एक दो चक्कर अपने हाथ से लगा दिए, तब जाकर शांति मिली ।
Good arrangements for entertainment on the lake (बच्चो के लिए मनोरंजन की अच्छी व्यवस्था )
यहाँ से निपटने के बाद हम लोग दुकानों के तरफ की सीढ़ियों पर आ गए । मैंने सुन रखा था की सातताल के “कड़ी-चावल” बहुत प्रसिद्ध हैं और सुबह से घूमने रहने के कारण अब भूख सताने लगी थी तो हमने एक रेस्तरा में खाने के लिए “कड़ी-चावल” के बारे में पूछा तो उसने कहा आप सामने मेज-कुर्सी पर बैठिये हम अभी आपसे आर्डर लेते हैं । हमने दो प्लेट “कड़ी-चावल” और एक प्लेट “दाल-चावल” का आदेश दे दिया । कुछ मिनिटो बाद ही ठन्डे मौसम में गर्म-गर्म “कड़ी-चावल” और “दाल-चावल” की प्लेट आ गयी । खाना वाकई में स्वादिष्ट था, खाना खाकर हम उठने वाले ही थे कि तभी रेस्तरा का एक लड़का सौफ-चीनी के साथ खाने का बिल ले आया । यहाँ का खाना बिलुकल महंगा नहीं था, बिल कुल रु०180/- का आया जिसमे एक छोटी कोल्डड्रिंक भी शामिल थी ।

सातताल  झील (SATTAL LAKE) से वापिसी   :→
हल्की-फुल्की पेट-पूजा करने के बाद हम लोग वापिस अपनी टैक्सी स्टैंड तक आ गए । इस समय बिल्कुल अँधेरा हो चुका था, टैक्सी चालक हमारी ही प्रतीक्षा कर रहा था । टैक्सी में बैठ कर हम लोग वापिस नैनीताल की तरफ चल दिए । लगभग आध-पौन घंटे में हम लोग नैनीताल पहुँच गए टैक्सी चालक ने हमें मॉल रोड के समीप उतार दिया । हमने उसके बाकी के टैक्सी के शेष किराये रू० 1600/- (पूरे दिन का टैक्सी किराया रू० 1800/- था) का भुगतान कर दिया । भुगतान करने के बाद हम लोग अपने होटल में जाने के वजाय बस स्टैंड और काठगोदाम रोड के बीच बने नैनीताल के पुराने स्थानीय बाजार के तरफ चल दिए क्योंकि सुबह घूमते समय मेरे सेंडिल में कुछ कमी आ गयी थी तो एक नए नई सेंडिल की जरूरत थी । इस बाजार से अपने लिए एक सेंडिल और बच्चो के लिए फल वगैरह खरीदने के पश्चात हम लोग होटल में वापिस आ गए । 

कुछ घंटे दिनभर की थकान उतारी, दिनभर जो घूमें उसकी चर्चा की और कल कहाँ जाना उसके बारे में अपास सलाह की । हमारे अगले दिन की योजना नैनीताल से श्री कैची धाम, रानीखेत, कौसानी, बैजनाथ, पाताल भुवनेश्वर, जागेश्वर और अल्मोड़ा होते हुए वापिस नैनीताल का था जिसमे तीन दिन और दो रात कर समय लगना था । हमने उन्ही सरदार (जो हमे काठगोदाम से नैनीताल लाए थे) से फोन किया और अपनी इस योजना के तीन दिवसीय यात्रा का टैक्सी खर्च की जानकारी मागी तो उन्होंने साढ़े दस हजार की मांग कर डाली जो हमारे के लिए बहुत अधिक था । हमने उनको साफ़-साफ मना कर दिया किया हम इतने अधिक भाड़े में नहीं जा सकते हैं । इसके बाद हमने दूसरा फोन उन सज्जन (Mr. D.S. Dhela) को लगाया जिसने आज की टैक्सी हमारे लिए कराई थी । उन्होंने कल सुबह बात करने की कह कर फोन रख दिया । खैर इस योजना को हमने अगले दिन के लिए छोड़ दिया । होटल की बालकनी से झील और नैनीताल शहर बड़ा ही शानदार नजारा नजर आ रहा था, अधियारी रात में सड़को, घरों और होटलों में जलते बिजली के बल्बों, ट्यूबलाईट, स्ट्रीट लाईट से सारा शहर जगमगा रहा था और उनका प्रतिबिम्ब झील में एक अलग ही नयनाभिराम द्रश्य उत्पन्न कर रहा था । ऐसा लग रहा था समूचा आकाश अपने तारामंडल सहित नैनीताल शहर में उतर आया हो । ऐसे खुशनुमा मौसम और शांत वातावरण में दुनियादारी से दूर काफी समय इस प्रकार के द्रश्य को देखते हुए ही बिता दिया ।

रात के लगभग दस बजे का समय हो रहा था और अब हमारे खाने का समय भी हो गया था । हम लोगों खाना होटल के कमरे में न मंगाकर बाहर मॉलरोड के किसी रेस्तरा पर जाकर खाने का निश्चय किया, सो हम लोग अपने होटल से निकलकर पहाड़ी रास्ते से होते हुए मालरोड पर पहुँच दिए । मॉल रोड की कुछ दुकाने खुल हुई और कुछ बंद होने की तैयारी कर रही थी, भीड़ का दबाब भी काफी कम था । रात के समय ठन्डे और खुशनुमा माहौल में झील के किनारे मॉल रोड पर टहलने का मजा ही कुछ अलग होता हैं । टहलते हुए और अच्छे से रेस्तरा को ढूंढते हुए हम लोग मॉल रोड के दूसरे छोर मल्लीताल तक पहुँच गए तभी हमे एक अच्छा सा भोजनालय “अन्नपूर्णा रेस्टोरेन्ट” नजर आया, जिस पर काफी भीड़ थी और रेस्तरा के बाहर गर्म-गर्म इमरती और रसगुल्ले बन रहे थे । रेस्तरा के अंदर जाकर खाली टेबिल मिल गयी जिस पर हमने फटाफट से अपना आसान जमा दिया । खाने का आदेश देने के पन्द्रह मिनट बाद खाना टेबिल पर आ गया । यहाँ का खाना काफी स्वादिष्ट और लज्जतदार था, बड़े स्वाद से पेट-पूजा कर वापिसी में रात अंधियारे में मॉल रोड का आनन्द लेते हुए होटल पहुँच गए । समय काफी हो चुका था सो फटाफट से बिस्तर पर पहुँचकर अगली सुबह के इंतजार में लंबी तान के सो गए ।

" एक रात और जाने को हैं, अभी तो एक नई सुबह का इंतजार बाकी हैं। 
चांदनी धरती पर पड़ चुकी, अभी तो सूरज की किरण का स्पर्श बाकी हैं ।
बीत गए जो प्यारे पल , अभी तो उनकी याद आना बाकी हैं ।
गुजर गयी कई मंजिले , अभी तो नए सफ़र का आगाज बाकी हैं । "
उपरोक्त स्वयं लिखित कविता के साथ ही आज का यह लेख और सफ़र का पहला दिन समाप्त होता हैं । जल्द ही अपनी इस “कुमाऊँ श्रृंखला” के अगले यात्रा लेख के नई कड़ी में अपने अनुभव आपके समक्ष प्रस्तुत करूँगा । अगले लेख तक के लिए आप सभी पाठकों को धन्यवाद और राम -राम ! वन्देमातरम  
क्रमशः ………..
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Table of Contents  कुमाऊँ यात्रा श्रृंखला के लेखो की सूची :
4. भीमताल → सुन्दर टापू वाली कुमायूं की सबसे बड़ी झील (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..4)  
5. नौकुचियाताल→ नौ कोने वाली सुन्दर झील ( (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..5)   
6. सातताल → कुमाऊँ की सबसे सुन्दर झील  (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..6)
7. नैनीताल → माँ नैनादेवी मंदिर और श्री कैंची धाम (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..7)   
8. रानीखेत → हिमालय का खूबसूरत पर्वतीय नगर (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..8) 
9.  कौसानी → प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पर्वतीय नगर (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....9)
10. बैजनाथ (उत्तराखंड)→भगवान शिव को समर्पित अति-प्राचीन मंदिर (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....10) 
11. पाताल भुवनेश्वर → हिमालय की गोद में एक अद्भुत पवित्र गुफा (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....11) 
12. जागेश्वर धाम → पाताल भुवनेश्वर से जागेश्वर धाम यात्रा (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....12) 
13. जागेश्वर (ज्योतिर्लिंग)→कुमाऊं स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध धाम के दर्शन (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....13) 
14. नैनीताल → खूबसूरत नैनी झील और सम्पूर्ण यात्रा सार (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....14)  ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ 

17 comments:

  1. गुप्ता जी राम राम, हमशा की भाँती सुन्दर चित्र और अच्छा वर्णन..धन्यवाद, वन्देमातरम...

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    1. लेख को सरहाने के लिए धन्यवाद....

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  2. बहुत मनमोहक चित्र देखकर ही जगह की सुन्दरता का अंदाज हो रहा है वर्णन भी काबिले तारीफ है

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    1. लेख को पसंद करने व उत्साहवर्धन के लिए आपका धन्यवाद |

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  3. आपके लेख काफी समय बाद आते है पर आते बढिया हैं मैने अपनी स्पेशल फ्रैंड लिस्ट में लगाया हुआ है । सातताल मैने पिछले महीने अपनी रूपकुंड यात्रा के दौरान देखा ।

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    1. धन्यवाद मनु जी....अब मैंने भी आपको अपनी विशेष मित्र ब्लॉग सूची में शामिल कर लिया हैं....|

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  4. बेहतरीन आलेख! सातताल की यादें ताजा होगयीं।

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    1. शुक्रिया मनीष जी....|

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  5. बहुत ही सुंदर जगह का विवरण देखने को और पढने को मिला ...खुबसूरत फोटू ...यहाँ हम जा नहीं सके इसका मुझे बहुत खेद है .....'अन्नपूर्णा रेस्टोरेंट ' का खाना वाकई में शानदार था हम जितने दिन रहे वही खाना और नाश्ता करते थे ...आगे की यात्रा पढने को बेताब हु----लिखते रहे ,,,धन्यवाद !

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    1. नमस्कार जी....
      लेख पर प्रशंसा युक्त टिप्पणी के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद....| चलो कोई बात अब अगले चक्कर पर यहाँ जरुर जाना....| आपने सही कहा कि अन्नपूर्णा रेस्टोरेंट ' का खाना वाकई में शानदार हैं |
      धन्यवाद

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  6. रितेश भाई हनुमान जी विशाल मूर्ती सच में बहुत ही लुभावनी है।

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    1. सच कहा आपने....संदीप भाई..| जय बजरंग बली ...

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  7. Very Good post Ritesh

    The Lord Hanuman statue looks awesome. Sattal lake is also very beautiful. I want to visit this Kumaon region once very soon. Lets see when. The picture of bridge is also wonderful. Thanks for sharing . Very helpful series for me.

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    1. Thank your very much Vishal Ji......for liking & commenting.
      I am ready for your help, when you'll plan to Kumayun....
      Thanks




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  8. माफ़ी चाहता हूँ , परीक्षाओं की वजह से थोड़ा देर से आ पाया | लेकिन आपका सफर कराने का अंदाज हमेशा की तरह बहुत अच्छा था |
    बढ़िया लेख |

    सादर

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    1. कोई बात नहीं आकाश ! प्रशंसायुक्त टिप्पणी के आपका धन्यावाद...!

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  9. बहुत मनमोहक चित्र देखकर ही जगह की सुन्दरता का अंदाज हो रहा है वर्णन भी काबिले तारीफ है .
    बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!शुभकामनायें.
    आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.
    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena69.blogspot.in/

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