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Wednesday, September 19, 2012

नैनीताल ( Nainital ) → शहर के देखने योग्य सुन्दर स्थल (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…3)

आप लोगो ने मेरा पिछला लेख   (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..2) तो पढ़ा ही होगा, जिसमे मैंने नैनीताल के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ आपके सम्मुख रखी थी और इको केव पार्क की सैर का वर्णन किया था । अब अपनी इस कुमाऊँ की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए आज की इस लेख में आपको ले चलता हूँ, नैनीताल के पहाड़ों में बसे और भी विभिन्न → ” खूबसूरत स्थलों की सैर ” पर ।

इको केव पार्क का अवलोकन करने बाद हम लोग उसी कालाढूंगी वाले मार्ग से होते हुए लवर्स पॉइंट की तरफ चल दिए । नैनीताल का यह लहराता और घुमावदार रास्ता बड़ा ही सुहाना और मन को प्रसन्नचित्त करने वाला था । सड़क किनारे की पहाड़िया घने हरे-भरे पहाड़ी पेड़-पौधे लदे पड़े थे, ऐसा लग रहा था कि जैसे प्रकृति ने अपना सारा हरा रंग यही उढ़ेल दिया हो और उस हरियाली के बीच बने घर-स्कूल बड़े ही आकर्षक लग रहे थे । जब ठंडी हवा इन पहाड़ी पेड़-पौधे बीच से तेज आवाज के साथ गुजरती तब प्रकृति के एक मधुर संगीत का आभास हो जाता था ।
Amazing view of greenery nature of hills 
(हरियाली युक्त पहाड़ों के बीच बसे इन घरों में कौन नहीं बसना चाहेगा….)
लवर्स पॉइंट (Lover’s Point)
मार्ग की प्राकृतिक सुंदरता का रसपान करते हुए, हम लोग कुछ देर में मुख्य मार्ग से बाए मुड़कर लवर्स पॉइंट नाम की जगह पर पहुँच गए । लवर्स पॉइंट की नैनीताल के माल रोड से दूरी करीब तीन या साढ़े तीन किलोमीटर हैं । यह स्थान सड़क से बस थोड़ा सा नीचे चलकर बड़े-बड़े पत्थरों पर एक गहरी खाई के किनारे एक छोटा सा स्थान हैं । लवर्स पॉइंट पर पत्थरों के ऊपर लोहे की ग्रिल से सुरक्षित स्थान से गहरी खाई और सामने सर उठाये ऊँचे सुन्दर पहाड़ का बड़ा ही शानदार नजारा देखने को मिलता हैं, साथ-साथ ही पहाड़ी शुद्ध ठंडी हवा का आनन्द भी मिलता हैं । अगर आप पर समय हो तो काफी समय यहाँ के शांत वातावरण में प्रकृति का आनन्द लेते हुए बिताया जा सकता हैं । लवर्स पॉइंट के पास कई सारी स्थानीय फल, नीबूं पानी, गरम-गरम भुट्टे बेचने वालो की छोटी-छोटी दुकाने हैं ।

लवर्स पॉइंट से ऊपर पहाड़ की ऊँचाई पर स्थित टिफिन टॉप (डोरथी सीट) पर जाने वाला पगडंडी मार्ग यही से होकर जाता हैं । इस रास्ते से पैदल या घोड़े-खच्चर से घने वन के बीच जगंली परिवेश का मजा लेते हुए जाया जा सकता हैं । मैं अपनी सन् 1997 की नैनीताल यात्रा में घोड़े-खच्चर से टिफिन टॉप और डोरथी सीट तक घूम चुका हूँ, उस समय हमने घोड़े मल्लीताल से ही किये थे । टिफिन टॉप जंगली परिवेश में पहाड़ी हरियाली, घने पेड़ो के बीच बहुत ही सुन्दर छोटा सा खुला स्थान हैं । टिफिन टॉप के बाद पहाड़ी पर ऊपर की तरफ चलते हुए पहाड़ की चोटी पर डोरथी सीट नाम की जगह पर पहुँच जाते हैं । यहाँ पर एक अंग्रेज महिला (जिसका नाम “डोरथी सीट” था) की कब्र हैं, उसी के नाम पर इस पॉइंट का नाम पड़ा । इस स्थान से खूबसूरत नैनी झील और सामने के पहाड़ के विहंगम और नयनाभिराम द्रश्य नजर आता हैं । उस समय टिफिन टॉप तक जाने के लिए पहले घोड़े-खच्चर मल्लीताल से मिल जाया करते थे, पर अब घोड़े-खच्चरो के द्वारा सड़कों पर गंदगी फैलाए जाने के कारण नैनीताल स्थित उच्चन्यायालय आदेश पर यहाँ से इनका आवागमन बंद कर दिया गया हैं । अब टिफिन टॉप तक जाने के लिए घोड़े-खच्चर लवर्स पॉइंट से ही आसानी से उपलब्ध होते हैं ।
A Magnificent view from Lovers point
 (यहाँ से दिखती गहरी खाई और ऊँचे पहाड़ के मनोरम नजारे से दिल की हसरत भी जवां हो उठती हैं )
हम लोगो ने लवर्स पॉइंट पर कुछ समय बिताया साथ ही साथ सुन्दर घाटी का अवलोकन किया और वही पर कुछ अपने और सुन्दर घाटी के फोटो खींचे । उसके बाद सड़क पर वापिस आकार हम लोग अपनी टैक्सी में आकर बैठ गए और अपने अगले गंतव्य स्थल की तरफ चल दिए । थोड़ा सा चलने के बाद रास्ते में एक “बारा पत्थर” नाम की जगह आती हैं, यहाँ पर Nainital Mountaineering Club के द्वारा बड़े-बड़े झूलते हुए पत्थरों और एक कई फुट ऊँची कृत्रिम दीवार पर प्रशिक्षार्थियों को पहाड़ चढ़ने (Rock Climbing) का प्रशिक्षण दिया जाता हैं । हम लोग इस स्थान पर बिना रुके कालाढूंगी मार्ग पर चलते रहे, अब हमारे टैक्सी चालक ने पहाड़ की तरफ सड़क किनारे एक छोटे स्थान पर गाड़ी रोक दी । यहाँ पहाड़ के गहरी खाई के किनारे एक छोटी सी जगह हैं, जिसे नैनीताल में “खुरपाताल द्रश्य स्थल (Khurpatal View Point)” के नाम से जानते हैं ।

खुरपाताल द्रश्य स्थल (Khurpatal View Point)
खुरपाताल नैनीताल क्षेत्र में स्थित झीलों और तालो में सबसे छोटा ताल हैं । ऊपर से देखने पर इसका आकार बैल के खुर जैसा दिखता हैं, इसलिए इसे खुरपा ताल के नाम से जाना जाता हैं । नैनीताल की ऊँचाई के मुकाबले यह खुरपाताल पहाड़ की काफी गहराई में स्थित हैं और नैनीताल से कालाढूंगी मार्ग से होते हुए इसकी दूरी लगभग १० किमी० के आसपास हैं । खुरपाताल के आसपास का इलाका कुछ समतल होने के कारण यहाँ पर एक छोटा पहाड़ी गांव बसा हुआ हैं । ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण खुरपा ताल के आसपास विभिन्न फसलों, सब्जियों की खेती बहुतायत में की जाती हैं । नैनीताल के ऊपर की पहाड़ियों से देखने पर गाँव के घर और खेत बड़े ही सुन्दर और मनभावन नजर आते हैं ।
Impressive View of Khurpa Taal from View point ( नैनीताल का खुरपा ताल )
Closer View of Khurpa Taal (लगता हैं जैसे पहाड़ की गहराई में नीला आकाश समा गया हो…)
हम लोग कार से उतर का उस स्थान पर पहुंचे जहाँ से खुरपा ताल नजर आता हैं । पहाड़ की गहराई में स्थित खुरपाताल बहुत सुन्दर और छोटा नजर आ रहा था । दूर से देखने पर ऐसा लगता हैं कि मानो किसी ने एक कटोरे में पानी भर कर रख दिया हो । ऊपर से देखने पर इस ताल का पानी नीला रंग का नजर आ रहा था और ताल के आसपास का गाँव और खेत बड़े ही अच्छे नजर आ रहे थे । खुरपाताल द्रश्य स्थल पर ताल को देखने के लिए इस समय काफी लोग जमा थे और वो सभी खुरपाताल झील का दूर से दर्शन कर रहे थे ।

कुछ देर पहाड़ की ऊँचाई से खुरपाताल के दर्शन के बाद हम लोग वापिस टैक्सी में आकर बैठ गए और उसी कालाढूंगी-खुरपाताल मार्ग से होते हुए अपने अगले गंतव्य स्थल की तरफ चलते रहे । घुमावदार पहाड़ी रास्ता की ढलान से उतरते हुए हमे रास्ते में पहाड़ की बीच में हमें एक सुन्दर सी हरे रंग की पानी की “साडियाताल ” नाम की छोटी झील नजर आई । मार्ग से ही झील का अवलोकन करते हुए कुछ ही देर में हम लोग अपने गंतव्य स्थल “साडियाताल जलप्रपात (Sadiatal Cascade)” पहुँच गए ।
Entrance Gate of Sadiatal Cascade & Himalayan Botanic Garden 
(एक छोटी सी पहाड़ी पर बसा साडियाताल जलप्रपात और वनस्पति उद्यान का द्वार )
साडियाताल जलप्रपात और वनस्पति उद्यान (Sadiatal Cascade & Himayalan Botanic Gardens)

यह उद्यान-जलप्रपात कालाढूंगी मार्ग पर नैनीताल से करीब पांच किलोमीटर दूरी पर पहाडो के बीच शांत वातावरण में बहुत ही सुन्दर जगह हैं । यह उद्यान साडियाताल नाम की झील की नीचे के हरी-भरी पहाड़ियों में स्थित हैं । साडियाताल झील के बांध से छोड़ा गया पानी इसी उद्यान की पहाड़ियों से झरने के रूप में होता हुआ गुजरता हैं । पहाड़ियों के बीच से गुजरता हुआ यह झरना एक दो स्थान से ऊँचाई से गिरता हैं तो सुन्दर और मनमोहन जलप्रपात के रूप ले लेता हैं । जलप्रपात और झरने के साथ-साथ इस उद्यान में बड़े-बड़े पेड़ो की बीच वनस्पति विज्ञानं सम्बंधित कई प्रकार के जड़ी-बूटी, वनस्पतिक पौधे देखने को मिल जाते हैं । इस उद्यान में प्रवेश के लिए कुमाऊँ मंडल विकास निगम के वन विभाग के द्वारा प्रति व्यक्ति पांच रूपये का शुल्क लिया जाता हैं, जिसे इस उद्यान-जलप्रपात के विकास और देखरेख में खर्च किया जाता हैं ।
Beautiful Cascade flowing from Artificial Sadiatal Lake 
(साडियाताल झील से अवतरित सुन्दर झरना )
पौने दो बजे के आसपास हम लोग साडियाताल जलप्रपात पहुँच गए । पहाड़ के किनारे ही छोटी सी जगह पर गाड़ियों को खड़ा करने के लिए एक छोटी से पार्किग सुविधा द्वार के नजदीक ही हैं । पार्किंग गाड़ियों से लगभग पूरी भरी हुई थी, एक खाली जगह देखकर टैक्सी चालक ने गाड़ी को लगाया । उद्यान में प्रवेश करने के लिए काउंटर से हम लोगो ने पांच टिकिट ख़रीदे और उद्यान में प्रवेश किया । उद्यान एक पहाड़ी पर स्थित होने के कारण चलने के लिए पगडंडी बनी हुई थी और उद्यान के अंदर काफी हरे-भरे पेड़ पौधे लगे हुए थे जो तेज और ठंडी हवा चलने के कारण आवाज उत्पन्न कर रहे थे । इसी पगडंडी से चलते हुए हमें पहाड़ में पानी का एक बहता हुआ झरना नजर आया, थोड़ा और ऊपर चलने यही झरना कुछ ऊँचाई से गिरता जलप्रपात हुआ नजर आया । तेजी से बहते पानी के कारण दुधिया रंग का सुन्दर प्रपात मन को प्रफुलित कर रहा था । जलप्रपात के बहते पानी हमारा मन उसके नजदीक जाने को मचल उठा, फटाफट से हम लोगो ने अपनी पादुकाए एक तरफ उतारी और जलप्रपात के बिल्कुल नजदीक पहुँच गए । ठंडे पानी में नंगे पैर चलना बड़ा आनंद दे रहा था और जलप्रपात के उड़कर आई पानी की ठंडी-ठंडी फुआरे बड़ी ही अच्छी लग रही थी ।
Another Look of waterfalls after some climbing at hill 
(पहाड़ी पर थोड़ा और ऊपर चलने पर सुन्दर झरने का एक और रूप नज़र आता हैं )
कुछ देर यहाँ पर अठखेलिया करने के बाद हम लोग उसी घुमावदार पगडंडी से होते पहाड़ की ऊँचाई पर चल दिए । थोड़ा से चलने पर यही झरना फिर कुछ ऊँचाई से गिरता हुआ अलग ही रूप में नजर आया । यह झरना पहाड़ से बिल्कुल सीधे नीचे गिर रहा और इसके नीचे हल्का सा गड्डा होने के कारण पानी भर गया था । प्रपात पर काफी भीड़ थी और एक सरदारजी तो जलप्रपात के नीचे अपनी पूरे परिवार सहित अलग-अलग ढंग से फोटो खिचने पूर्णतः व्यस्त थे । काफी देर बाद जब वो वहाँ से नहीं हटे तो हमने उनसे कहा की कुछ फोटो हमे भी लेने दो तो वो बस थोड़ा सा खिसक गए और फिर वापिस उसी जगह आ गए । खैर जलप्रपात के ठन्डे पानी में टहलने और आसपास के कुदरत का नजारे का लेने और कुछ वहाँ की फोटो खींचने के बाद हम लोग समय अधिक हो जाने के कारण इस स्थान से वापिस चल दिए ।
हम लोग उसी पगडंडी से होते वापिस नीचे पार्किंग में आ गए । हमारा टैक्सी चालक हमारी ही प्रतीक्षा कर रहा था, हमारे कार में बैठते ही वह चल दिया । पार्किंग से निकलते ही एक जल्दबाज निजी कार चालक ने जल्दी निकलने के चक्कर में अपनी गाड़ी पहाड़ी रास्ते में गाड़ियों के बीच फंसा दिया जिससे दोनो तरफ जाम लग गया । जैसे-तैसे उस जाम से मुक्त होकर उसी कालाढूंगी वाले मार्ग से वापिस नैनीताल के तरफ अपने अगले गंतव्य स्थल की तरफ चल दिए ।
नैनीझील दर्शन पॉइंट (Naini Lake View Point,Kilbury Road)
कुछ किलोमीटर चलने के बाद नैनीताल के सूखाताल के पास से चालक ने टैक्सी को नैनापीक पहाड़ी के किलबरी रोड के तरफ मोड़ दिया । किलबरी रोड नैनीताल के नैनापीक की पहाड़ी पर से होकर गुजरता हैं । यह रास्ता थोड़ा संकरा हैं पर बेहद ही खूबसूरत हरे-भरे पहाड़ी के बीच से होकर गुजरता हैं । इस मार्ग से हर मोड़ से बहुत सुन्दर मनभावन नज़ारे नजर आते हैं । इस मार्ग पर चलते हुए नैनापीक पहाड़ की चढ़ाई शुरू हो गयी और जैसे-जैसे हम लोग इस रास्ते से गुजरते जा रहे, वैसे-वैसे पहाड़ की ऊँचाई में पहुँचते जा रहे थे । मार्ग से गुजरते समय नैनापीक पहाड़ के किलबरी मार्ग से बीच-बीच में पहाड़ों और पेड़-पौधों के बीच से पूरे नैनीताल शहर और नैनीझील का विहंगम द्रश्य नजर आ रहा था ।
कुछ देर चलने के बाद के चालक ने कार को मार्ग के बीच एक जगह पर रोक दिया जहाँ से नैनी झील और नैनीताल शहर का दूर तक का पूरा द्रश्य नजर आता हैं यहाँ पर इस स्थल को नैनी झील दर्शन स्थल (Naini Lake View Point) कहते हैं । मार्ग संकरा होने के कारण चालक ने टैक्सी को कुछ दूर आगे जाकर पहाड़ के किनारे खड़ा कर दिया और भी बहुत सी गाड़िया मार्ग के किनारे इधर-उधर खड़ी हुयी थी । पहाड़ की ऊँचाई से सड़क के किनारे के एक खाली स्थान (जहाँ पर पेड़ों की झुरमुट नहीं थे) से नैनीझील के सम्पूर्ण रूप के बहुत ही नयनाभिराम और बहुत ही खूबसूरत दर्शन हो रहे थे । इतनी ऊँचाई से देखने पर दूर तक फैली नयन आकार की नैनी झील का रूप मन को बहुत प्रफुल्लित कर रहा था । नैनी झील की पानी में चल रही हैं नावे ऊपर से ऐसे नजर आ रहे थे जैसे पानी पर छोटे-मोटे कीड़े-मकोड़े तैर रहे हो । नैनीझील के साथ-साथ झील के किनारे का बड़ा खाली मैदान, पार्किंग में लगी गाड़ियां, घर, दुकाने, नैनी झील के किनारे के पहाड़ों पर बसे घर, होटल आदि बहुत छोटे पर बहुत सुन्दर नजर आ रहे थे । इस स्थान पर लोगो की काफी हलचल थी और झील के इस अनोखे रूप को तरह-तरह से अपने कैमरे में कैद करने में लगे हुए थे ।
Full View of Amazing Naini Lake
 (किलबरी रोड, झील दर्शन पॉइंट से झील का नयनाभिराम सम्पूर्ण नैनी झील के दर्शन )
Beautiful & Magnificent View Naini Lake 
(नैनी झील का झलकता अनुपम और मदहोश कर देने वाला सौंदर्य )
Closer Full View of Naini Lake from Kilbury Road
 (अब थोड़ा पास करके देखे झील की सुंदरता को )
इस दर्शन पॉइंट पर सड़क के किनारे दूरबीन वाले और कुछ स्थानीय लोगो ने खाने-पीने की अस्थाई दुकान सड़क के किनारे की सीमेंट की मुंडेर पर बना रखी थी । हमारे बच्चो को झील देखते-देखते और दुकानों में मैगी बनते देख जोर की भूंख लग आई तो एक दुकान पर हमने दो प्लेट मैगी का आदेश दे दिया । एक प्लेट मैगी का मूल्य रू०25/- था और कुछ देर में ही मैगी तैयार हो गई । सब लोगो ने गर्म-गर्म मैगी का नाश्ता किया केवल मुझे छोड़कर क्योंकि मुझे मैगी ज्यादा अच्छी नही लगती, पर मैंने तो अपना काम बिस्कुट से ही चला लिया । हल्की पेट-पूजा करने के बाद और एक बार फिर से नैनी झील के दुबारा से दर्शन करने के बाद वापिस टैक्सी में बैठकर उसी किलबरी मार्ग से ओर ऊपर की तरफ अपने अगले गंतव्य स्थल को चल दिए ।

हिमालय दर्शन पॉइंट (Himalaya View Point ,Kilbury Road)

कुछ देर इसी मार्ग पर चलते हुए एक मोड़ के बाद एक ऐसा स्थान आया जहाँ पर सड़क के दोनो ओर काफी गाड़िया खड़ी हुयी थी । पता चला की हम लोग हिमालय दर्शन पॉइंट पहुँच गए हैं । लगभग तीन बज रहे थे ओर हमारे चालक ने टैक्सी को पॉइंट से कुछ आगे जाकर एक खाली जगह देखकर टैक्सी को रोक दिया था । यह स्थान भी सड़क के किनारे ही था और सड़क की चौड़ाई काफी कम थी, इसके साथ ऊपर से काफी गाड़ियो के आवागमन के कारण यहाँ जाम की सी स्थिति हो गयी थी । इस पॉइंट पर लोगो की काफी भीड़ थी और दूर तक नज़ारे दिखाने के लिए कई सारे भुट्टे वाले और दूरबीन वाले खड़े हुए थे ।
Awesome View from Himalaya Darshan Point, Kilbury Road 
(आसमान साफ़ हो बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियाँ नज़र आती हैं )
हिमालय दर्शन पॉइंट नैनापीक पहाड़ के किलबरी जाने वाले मार्ग नैनीताल से लगभग पांच किलोमीटर दूरी पर हैं । इस स्थान कि समुंद्रतल से ऊँचाई लगभग 2300 मीटर हैं । इस स्थान पर पहाड़ के एक खुले स्थान से (जिसे सीमेंट से और लोहे के तार बेरिकेटिंग कर सुरक्षित पॉइंट बना दिया हैं) सैकड़ों मील दूर स्थित बर्फ से ढकी हिमालय श्रृंखला की चोटियाँ और दूर तक फैले सुन्दर पहाड़, जंगल, हरी-भरी वादियों के नजारे देखने को मिलते हैं । इस स्थान से हिमालय पर्वत श्रृंखला की चौखम्बा, नंदादेवी, पंचचुली आदि की चोटियाँ जब बादल और धुंध न हो, तब बिल्कुल साफ़ और आलौकिक द्रश्य नज़र आता हैं । जब हम इस स्थान पर पहुंचे तो दूर तक के पहाड़ी का नयनाभिराम और बड़ा ही खूबसूरत द्रश्य नजर आया पर धुंध और बादलों के कारण हिमालय के दर्शन न हो सके । खैर सुन्दर सड़क मार्ग कि किनारे स्थित इस पॉइंट के शांत वातावरण में कुछ देर दूर तक नज़ारे देखने के बाद हम लोग वापिस टैक्सी में बैठकर किलबरी मार्ग से होते हुए आधा घंटे में नैनीताल के मॉल रोड होते हुए तल्लीताल के चौराहे पर पहुँच गए ।
नैनीताल के ऊपर बताये और हमारे द्वारा घूमे स्थलो के अलावा नैनीताल में और भी घूमने लायक अच्छे स्थल हैं, जहाँ हम लोग अपने इस यात्रा में समय की कमी के कारण नहीं जा सके पर उनके बारे में यहाँ पर बताना जरुरी समझता हूँ और इनमे से कुछ स्थल मैं अपने नैनीताल की पिछली यात्राओ में घूम चुका हूँ । तो चलते हैं, इन स्थलों की तरफ ।

1.) स्नो व्यू (Snow View point) → स्नो व्यू नैनीताल की एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित बहुत ही खूबसूरत और यहाँ का प्रसिद्ध स्थल हैं । समुंद्र तल से इसकी ऊँचाई करीब 2270 मीटर हैं । मल्लीताल से मॉल रोड मुख्य बाजार के अंतिम छोर से इसकी दूरी करीब तीन किमी० हैं और यहाँ आसानी से पैदल जाया सकता हैं । यदि पैदल नहीं जाना चाहते तो इसके लिए उड़नखटोले (Ropeway Trolly) की व्यवस्था मॉल रोड (मल्लीताल) के पास हैं । स्नो व्यू जाने के लिए उड़नखटोले का टिकिट वयस्क के लिए रू.150/- और बच्चो के लिए रू.100/- आना जाना हैं । भरे सीजन में कभी-कभी उड़नखटोले स्नो व्यू जाने के लिए अग्रिम आरक्षण करना पड़ता हैं । स्नो व्यू से नैनीझील, शहर और दूसरी तरफ हिमालय के नयनाभिराम और खूबसूरत दर्शन होते हैं । स्नो व्यू पर खाने-पीने, दूरबीन से नज़ारे देखने व फोटोग्राफी की अच्छी व्यवस्था हैं । स्नो व्यू स्थल पर पर एक सुन्दर मंदिर भी हैं ।

2.) नैनीताल चिड़ियाघर (Nainital Zoo) → नैनीताल चिड़ियाघर यहाँ की पहाड़ियों की सुन्दर वादियों में स्थित एक प्रसिद्ध स्थल हैं, जो नैनीताल बस अड्डे से डेढ़ किमी० की दूरी पर स्थित हैं । समुंद्र तल से इसकी ऊँचाई करीब 2100 मीटर हैं । यह चिड़ियाघर काफी अच्छे ढंग से व्यवस्थित और साफ सुधरा हैं । इस चिड़ियाघर में तरह-तरह के पहाड़ी जानवरों, सरीसृप, पंक्षी आदि देखने को मिल जाते हैं । इस चिड़ियाघर के अंदर जाने का प्रवेश शुल्क देना होता हैं और इसका समय सुबह दस बजे से शाम साढ़े चार बजे तक हैं । सोमवार को यह बंद रहता हैं ।

3.) राजभवन-गवर्नर हाउस (Rajbhawan- Governor House) →   राजभवन नैनीताल की पहाड़ियों में स्थित एक पुराना भवन हैं, जिसका निर्माण ब्रिटिशकाल में अंग्रेजो के द्वारा हुआ । ब्रिटिशकाल में इसे अंग्रेज गवर्नर के हेतु बनवाया गया था, इसलिए गवर्नर हाउस कहते हैं पर वर्तमान में यह राज भवन के नाम से प्रसिद्ध हैं । यहाँ पर राजभवन के साथ-साथ हरी-भरी पहाड़ियों के एक गोल्फ कोर्स और गोल्फ का सुन्दर मैंदान हैं । राजभवन में अंदर जाने के लिए प्रवेश शुल्क देना होता हैं और नैनीताल के बस अड्डे से कुछ किमी दूर स्थित हैं ।

4.) हनुमानगढ़ी मंदिर (Hanumangari Temple) →   श्री हनुमान जी समर्पित यह नैनीताल का सबसे प्रसिद्ध मंदिर हैं, जो नैनीताल के तल्लीताल से होते हुए वेधशाला वाले मार्ग पर करीब तीन किमी० दूर हैं । यहाँ पैदल या फिर गाड़ियों से आसानी से पहुंचा जा सकता हैं । यह मंदिर यहाँ के प्रसिद्ध संत बाबा नीम करोली जी के द्वारा बनवाया गया था । ये मंदिर नैनीताल की सुन्दर वादियों में बहुत ही रमणीक जगह पर स्थित हैं । हनुमानगढ़ी से शाम के समय दूर पहाड़ियों में डूबते सूर्यास्त का बड़ा ही खूबसूरत मनभावन द्रश्य नजर आ आता हैं । हनुमानगढ़ी मंदिर के अंदर फोटो लेना प्रतिबंधित हैं ।

5.) वेधशाला (OBSERVATORY) →   इस वेधशाला को नाम ARIES ( Aryabhatta Research Institute of Observational Sciences) हैं, जो नैनीताल की पहाड़ियों में मनोरा चोटी पर समुंद्रतल से 1950 मीटर ऊँचाई पर नैनीताल के तल्लीताल से होते हुए करीब चार या साढ़े चार किमी० दूर हैं । यहाँ पर भारत की सबसे आधुनिकतम टेलीस्कोप का उपयोग खगोल विज्ञान, भौतिकी और वायुमंडलीय विज्ञान में अनुसंधान और विकास के लिए किया जाता हैं ।


6.) नैना पीक (Naina Peak) नैना पीक नैनीताल की सबसे ऊँची चोटी हैं, समुंद्र तल से इसकी ऊँचाई करीब 2615 मीटर हैं । मल्लीताल से नैना पीक की दूरी करीब छह किलोमीटर हैं और यहाँ तक पहाड़ी, जंगली और खूबसूरत रास्ते, नज़ारे का आनंद लेते हुए घोड़े या फिर पैदल जा सकते हैं । नैना पीक को चाइना पीक के नाम से भी जाना हैं, कहते की यहाँ से तिब्बत (चाइना ) का बोर्डर दिखाई देता हैं । नैनापीक से नैनीताल और उसके आसपास के इलाको के साथ-साथ शानदार हिमालय के खूबसूरत स्वरूप के दर्शन होते हैं । नैना पीक पर रहने और खाने की कोई व्यवस्था नहीं हैं ।

7.) नैनादेवी मंदिर (Nainadevi Temple) →  नैनादेवी शक्तिपीठ मंदिर की यात्रा मैंने अपनी इसी सफ़र में की थी । मेरे आने वाले लेखो में आपको यहाँ के बारे में चित्र सहित जानने को मिलेगा ।

लगता हैं कि यह लेख अब काफी लंबा हो गया हैं, तो आज के इस लेख को अब यही विराम देते हैं । जल्द ही अपनी इस ” कुमाऊँ श्रृंखला ” के अगले यात्रा लेख के नई कड़ी में अपने अनुभव के साथ आपके समक्ष प्रस्तुत करूँगा । अगले लेख में आप लोगो को शहर के बाहर स्थित झीलों की सफ़र पर ले चलूँगा । आपको आज का यह लेख कैसा लगा, आपकी प्रतिक्रिया और सलाह का हमेशा स्वागत हैं । अगले लेख तक के लिए आप सभी पाठकों को धन्यवाद और राम -राम !
क्रमशः ………..
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Table of Contents  कुमाऊँ यात्रा श्रृंखला के लेखो की सूची :
4. भीमताल → सुन्दर टापू वाली कुमायूं की सबसे बड़ी झील (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..4)  
5. नौकुचियाताल→ नौ कोने वाली सुन्दर झील ( (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..5)   
6. सातताल → कुमाऊँ की सबसे सुन्दर झील  (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..6)
7. नैनीताल → माँ नैनादेवी मंदिर और श्री कैंची धाम (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..7)   
8. रानीखेत → हिमालय का खूबसूरत पर्वतीय नगर (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..8) 
9.  कौसानी → प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पर्वतीय नगर (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....9)
10. बैजनाथ (उत्तराखंड)→भगवान शिव को समर्पित अति-प्राचीन मंदिर (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....10) 
11. पाताल भुवनेश्वर → हिमालय की गोद में एक अद्भुत पवित्र गुफा (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....11) 
12. जागेश्वर धाम → पाताल भुवनेश्वर से जागेश्वर धाम यात्रा (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....12) 
13. जागेश्वर (ज्योतिर्लिंग)→कुमाऊं स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध धाम के दर्शन (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....13) 
14. नैनीताल → खूबसूरत नैनी झील और सम्पूर्ण यात्रा सार (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....14)  ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬   

23 comments:

  1. काफी जानकारी मिली उन जगहों की जहाँ मैं नहीं जा सका था। खुरपा ताल कालाढ़ूँगी से आते वक्त और भी खूबसूरत दिखता है।

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    1. मनीष जी.....लेख पर प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया ..!

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  2. हम्म..घूमे तो हम भी हैं लेकिन इतना नहीं घूम पाये थे जितना आपने घुमाया। ..वाह!

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    1. आपका ब्लॉग पर स्वागत हैं.....देवेन्द्र जी.....| आते रहिये | धन्यवाद |

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  3. aisa lag rahaa hai jaise koi movie series ho , pahla part badhiya , doosra us se bhi accha aur teesra un dono se badhiya ,
    and now we all are waiting for the 4th part of 'Kumaau' series. :)

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    1. ध्यानवाद जी..... आपको यह लेख अच्छा लगा ..जानकर और भी खुशी महसूस हुई...|

      अगला भाग जल्द ही प्रकाशित होगा...

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  4. Replies
    1. धन्यवाद....अरुण साथी जी

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  5. Replies
    1. धन्यवाद रमाकांत जी....आते रहिये...|

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  6. Replies
    1. धन्यवाद....डा० निशा जी....आपका स्वागत हैं....|

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  7. Jaankari ke liye shukriya Ritesh Bhai.

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    1. धन्यवाद धर्मेन्द्र भाई....

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  8. सुंदर चित्र के साथ विस्तृत यात्रा वृतांत.

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    1. धन्यवाद राकेश जी..

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  9. रितेश जी नैनताल एक बार 2007 में जाने का अवसर मिला है लेकिन इतना खूबसूरत है मैं नही देख पाया बहुत सी जगहें ! बहुत खूबसूरत तसवीरें दी हैं आपने ! दोबारा फिर से जाने का मन है ! आपने एक तरह से पूरा परिचय दे दिया अपनी पोस्ट में नैनीताल का !!

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    1. अपनी बात रखने और टिप्पणी के लिए धन्यवाद योगी जी |

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  10. Dil khush ho Gaya Ritesh ji apne bohot sari jankariya di Nainital k bare dhanyawad

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  11. शानदार जानकारियां

    चित्रों की चौडाई बढानी चहिये

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    1. धन्यवाद सर जी आपकी टिप्पणी के लिए ।

      फोटो की चौड़ाई बढ़ाने के लिये html को खागलना पड़ेगा फिर । अगली बार कोशिश करके देखते है

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