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Sunday, September 2, 2012

नैनीताल ( Nainital ) → हिमालय पर्वत का शानदार गहना (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का….2)

नमस्कार मित्रों ! आप लोगो ने मेरा पिछला लेख ” सुहाना सफ़र कुमाऊँ का….1″   तो पढ़ा ही होगा,  जिसमे मैंने दिल्ली से काठगोदाम और काठगोदाम से नैनीताल तक अपने सफ़र का वर्णन किया था । अब अपनी इस कुमाऊँ की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए आज की इस भाग में आपको ले चलता हूँ, नैनीताल के विभिन्न खूबसूरत और रोमांचल स्थलों की सैर → ” नैनीताल दर्शन “ पर ।

भौगोलिक और पौराणिक द्रष्टि से नैनीताल →

यात्रा वृतांत को आगे बढ़ाने से पहले थोड़ा सा नैनीताल के बारे में जान ले । उत्तरभारत के हिमालय पर्वतमाला की सुरम्य वादियों में स्थित नैनीताल भारत के सबसे खूबसूरत और प्रसिद्ध पर्वतीय पर्यटन स्थलों में एक हैं, जो भारत के उत्तराखंड राज्य में कुमाऊँ मंडल के दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित हैं । नैनीताल की समुंद्रतल से ऊँचाई लगभग 1968 मीटर (6455फीट) हैं । समुंद्रतल से इतनी ऊँचाई और चारों हरियाली के कारण यहाँ का मौंसम हमेशा सुहावना और ठंडा बना रहता हैं । नैनीताल में प्रदेश का एक हाईकोर्ट भी स्थापित हैं जहाँ प्रदेश भर के वाद-विवाद का निपटारा किया जाता हैं । नैनीताल क्षेत्र में तालो और झीलों की अधिकता के कारण इसे झीलों की नगरी भी कहा जाता हैं । नैनीताल का मुख्य आकर्षण यहाँ की नैनी झील हैं, जो चारों ओर से हरे-भरे पेड़ो से लदे पहाड़ों से घिरा हुआ हैं । मुख्य नैनीताल शहर नैनी झील इर्द-गिर्द पहाड़ी पर बसा हुआ हैं । इन हरे-भरे पहाड़ों की परछाई हमेशा झील में पड़ती रहती हैं, जिस कारण से झील का स्वच्छ पानी हरे रंग का नजर आता हैं । प्रसिद्ध पर्यटक स्थल होने के कारण यहाँ पर साल भर सैलानियों का जमावबाड़ा लगा रहता हैं, मुख्तय गर्मियों के मौसम में यहाँ का मौसम सुहावना और ठंडा होने कारण लाखो के संख्या में यहाँ पर घूमने वालो की हलचल लगी रहती हैं ।

नैनीताल सबसे निकटवर्ती रेलवे स्टेशन काठगोदाम हैं । काठगोदाम रेलवे स्टेशन दिल्ली, बरेली, हावड़ा और लखनऊ रेल मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ हैं । काठगोदाम से नैनीताल लगभग 34किमी० की दूरी पर स्थित हैं, जिसे टैक्सी या लोकल बसों की सहायता से आसानी से पूरा करके यहाँ पहुंचा जा सकता हैं । नैनीताल के दूरी देश के मुख्य शहर आगरा से 376किमी०, दिल्ली से 320किमी०, अलमोड़ा से 68किमी०, पातालभुवनेश्वर 188किमी०, मुक्तेश्वर से 52किमी०, हरिद्वार से 234किमी०, कर्णप्रयाग से 185किमी० और बरेली से 190किमी० हैं ।

Naini Lake & Tiffin Top (Dorothy’s Seat) Hill View from Hotel Paryatak ( बड़े ही सुहाने लगते हैं यह झील और पहाड़ )


पुराणों के अनुसार नैनी झील का पानी पवित्र मानसरोवर झील के पानी के समकक्ष पवित्र माना जाता है । नैनी झील के दक्षिणी हिस्से को तल्लीताल और उत्तरी हिस्से को मल्लीताल के नाम से जाना जाता हैं । पुराणों में ऋषि अत्री ने उल्लेख किया है, पूल्सठया और पुलह इसी घाटी के भीतर ध्यान साधना की थी, और जब उन्हें पानी की आवश्यकता हुई तो पूरी घाटी में उन्हें कही पानी नहीं मिला तो उन्होंने स्वयं इस ताल का निर्माण किया और इसमें मानसरोवर झील के जल से भर दिया था । शक्तिपीठ की स्थापना जग-जाहिर कथा के अनुसार → नैनी झील की उत्पत्ति देवी सती की बाईं आंख से हुई थी । एक बार सती के पिता दक्ष प्रजापति ने एक भव्य हवन का आयोजन किया था, लेकिन उन्होंने ईर्ष्यावश अपने दामाद भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया था । देवी सती अपने पति भगवान शिव के इस अपमान को सहन न कर सकी और हवन को नष्ट करते हुए इस हवन के अग्नि में स्वयं कूद कर अपनी जान दे दी । इस भयंकर घटना के सदमे से भगवान शिव क्रोधित हो गए और अपने सभी कर्तव्यों को छोड़ दिया । उन्होंने देवी सती के जले शरीर के साथ ब्रह्मांड में विचरण शुरू कर दिया । इससे पूरे ब्रह्मांड का संतुलन डावाडोल हो गया । तब भगवान विष्णु ब्रह्मांड का संतुलन हेतु अपने सुदर्शन चक्र से देवी सती के जले शरीर कई भागो में विभाजित कर दिया और इस प्रकार भगवान शिव के सती वियोग के दर्द से राहत दे दी । देवी सती के जले शरीर के कुछ हिस्सों धरती पर कुछ स्थानों पर गिर गये और वो स्थान आज शक्ति-पीठ के रूप में जाने  जाता हैं । देवी सती की बाईं आँख नैनीताल में गिरी, जिस कारण यहाँ पर सुरम्य झील की उत्पत्ति हुई । देवी सती के नैनो से उत्पन्न झील का आकार कुछ नयन (नैनी यानी की आँखे) जैसा ही हैं, इसलिए इसे नैनी झील कहते हैं । नैनीताल नाम का उदभव इसी नैनी झील के नाम से हुआ हैं । झील के उत्तरी छोर पर शक्तिपीठ श्री माँ नयना देवी का बड़ा ही खूबसूरत और भक्ति भावना से ओतप्रोत दिव्य मंदिर स्थित है ।

A View of Bus Stand→Tallital→Nainital City (दूर से बड़े ही सुन्दर और रंग बिरंगे नजर आते हैं, यह पहाड़ों पर बसे घर )
अब चलते हैं अपने नैनीताल के यात्रा वृतांत की तरफ → 25-जून-2012 को हम लोग नैनीताल तो पहुँच गए,  अब जरूरत थी एक अच्छे से होटल में कमरे की तलाश करने की । झील को निहारने के पश्चात हम लोग मॉल रोड की तरफ चल दिए । मॉल रोड पर प्रवेश करते ही झील की तरफ बाई ओर के बेरिअर के पास एक छोटा सा पार्क हैं, जहाँ बैठने के लिए सीमेंट की कुर्सिया बनी हुई थी । अपने परिवार के लोगो को उस पार्क में सामान के साथ बैठाकर, मैं ओर मेरा छोटा भाई “अनुज” के साथ पार्क के सामने सड़क की दूसरी तरफ के पहाड़ी रास्ते पर होटल ढूंढने के लिए चल दिया । वैसे मैं पहले भी नैनीताल दो बार आ चुका हूँ । मुझे यहाँ के रास्ते थोड़ा बहुत ज्ञान भी था और पता था कि हमारे हिसाब के होटल कहाँ मिल सकते हैं । सामने पहाड़ी रास्ते पर पहुँचते ही दो तीन लड़के मिल गए और कमरे के लिए पूछने लगे । मैंने कहाँ कि एक हजार रूपये के अंदर में हमको चार बेड का कमरा चाहिये तो सुनते ही वो बोले,”अभी सीजन चल रहा हैं और इतने कम में होटल तो आपको पूरे नैनीताल में नहीं मिलेंगा ” और यह कह कर वापिस चल दिए । मैंने रोक कर कहाँ,”अरे ! जितने में हैं दिखा तो सही” । वह हमको पहाड़ी रास्ते से होते हुए नैनीताल के चिड़ियाघर घर वाले मार्ग पर ले आया और एक होटल में दूसरी मंजिल पर चार बेड कमरा दिखाया । उस समय कमरा खाली नहीं था पर खाली होने वाला था । हमने कमरा देखा तो कमरा काफी अच्छा और साफ़ सुधरा लगा हाँ, उस काठगोदाम मार्ग पर स्थित पहले वाले कमरे से कई गुना बेहतर था । अब हमने उससे किराया पूछा तो  किराया रु०2200/- बताया । हमने कहा रु०1800/- यह सुनकर वो किसी से फोन पर बात करने लगा और बात करने के बाद बोला रु०2000/- दे देना । हमने कहा,”यह कमरा दूसरी मंजिल पर हैं और मॉल रोड काफी दूर भी हैं, तो हमें यह कमरा नहीं चाहिये “।

हम लोग मॉल रोड की तरफ दूसरे से रास्ते उतरते हुए दूसरे होटल की तलाश में चल दिए । तभी हमें एक होटल नजर आया जिसमे मैं अपनी पिछ्ली यात्रा में ठहर चुका था । होटल के अंदर प्रवेश करने के बाद हमने चार बेड के कमरे के लिए पूछा तो उसमे हमें अपने होटल में एक मंजिल नीचे उतर कर एक कमरा (यह एक दो कमरे का सुईट जैसा था) दिखाया । कमरा देखकर याद आया कि मैं पहले भी इस कमरे में ठहर चुका हूँ । हमें कमरा पसंद आ गया, काउंटर पर जाकर कमरे के किराए बारे में पूछा तो उसने भी हमें रु०2200/- बताया । मुझे लगा कि जैसे यहाँ के सारे होटल वालो ने एक सलाह कर कर रखी हैं की चार बेड के कमरे के रु०2200/-और डबलबेड के रु०1500/- किराया । अब हमारा समय था उससे कमरे के किराए में मोलभाव करने का । मैंने कहाँ,”हम आपके इस होटल में पहले भी रुक चुके, अब दूसरी बार आये तो कुछ किराया तो कम करो, ऐसा करो हमें यह कमरा रु.1800/- में दे दो “। काफी देर ना-नुकर करने के बाद वो राजी हो गया । फटाफट से किराए की राशि देकर कमरा आरक्षित कराया और अपना सामान और अपने परिवार के लोगो को लेने मॉल रोड के उसी पार्क पर चल दिए ।

A Picture of Hotel Paryatak from Taxi Stand (हमें अच्छा लगा यह साफ-सुधरा होटल )
अब मैं आपको उस होटल का नाम विज्ञापन हेतु नहीं बल्कि अपने घुमक्कड़ साथियो के भविष्य की यात्रा के सहूलियत हेतु बता देता हूँ → ” होटल पर्यटक (Hotel Paryatak)” और यह नैनीताल के तल्लीताल नाम की जगह पर चिड़ियाघर (Nainital Zoo) मार्ग पर पड़ता हैं । होटल का संपर्क सूत्र टेलीफोन नंबर 05942-235815 & 9358690245 हैं । यह एक साधारण श्रेणी का छोटा बजट होटल हैं । बस स्टैंड से यहाँ पैदल पहुँचने में करीब पांच से दस मिनिट का समय लगता हैं । इस होटल में एक पांच-छह कार के लायक पार्किंग की भी अच्छी व्यवस्था हैं । होटल के कमरे और बालकनी से पूरे नैनीताल के पहाड़ी इलाके के साथ-साथ नैनी झील का बड़ा ही खूबसूरत द्रश्य नजर आता हैं । अब बात करते हैं अपने कमरे की, हमने जो कमरा पसंद किया था वो एक दो कमरे का सुईट जैसा था जिसमे पहले कमरे में एक डबलबेड, रंगीन टेलीविजन, सोफा, एक मेज और जमीन पर एक पुराना सा कालीन था । अंदर के दूसरे कमरे में एक डबलबेड, एक मेज और जमीन पर कालीन था । उसके बाद सबसे अंत में एक साफ़ सुधरा मगर छोटा भारतीय प्रारूप का बाथरूम था, जिसमे गर्म पानी की व्यवस्था थी । हाँ एक बात और यहाँ का मौसम हमेशा सुहावना होने के कारण कमरे में पंखे की व्यवस्था नहीं थी । बालकनी में कुछ कुर्सिया पड़ी हुयी थी और इन पर बैठकर झील और नैनीताल शहर का मनभावन द्रश्य आनन्द लिया जा सकता हैं ।

Beautiful Naini Lake from Right side of Hotel (नैनीताल की आत्मा नैनीझील का अनुपम सौंदर्य लोगो बरबस ही अपनी तरफ खींच लेता हैं )

View of Naina Peak & Camel Back Hills from Hotel Parking & Solar Plant of Hotel for using to Hot Water & Other (बादलों की लुकाछिपी से और भी खिल उठती हैं नैनीताल की सुन्दर वादियाँ)
मॉल रोड पर स्थित पार्क पहुँच कर हमने अपना सामान समेटा । हमारे सामान में कुल तीन नग थे, जिसे हम स्वयं ही लेकर चल दिए तभी पहाड़ी रास्ते पर एक कुली आया और बोला,”मैं आपका सारा सामान होटल तक पहुंचा देता हूँ ।” हमने पूंछा,” क्या लोगे इस सेवा का ?”, उसने कहा,” सौ रूपये दे देना “, हमने कहा,”सौ रूपये ! हम खुद ही ले जायेगे, तू जा अब ” । अपना सामान स्वयं लेकर लगभग दस मिनिट में हम लोग पहाड़ी रास्ते से होते हुए अपने होटल कमरे में पहुँच गए । कमरे में पहुँचकर अपना सारा सामान एक तरफ लगाया । होटल की बालकनी से नैनीताल का बहुत खूबसूरत नजारा नजर आ रहा था, यह नजारा देख लगभग हमारी आधी थकावट दूर हो गयी थी ।

Me at Hotel Paryatak Gallery opposite Room ( यह शमा ये खूबसूरत वादियां फिर पता नहीं कब मिलेगा मौंका )
आज की हमारी योजना नैनीताल और उसके आसपास के दर्शनीय स्थलों की सैर की थी और घूमने के लिए एक टैक्सी की जरुरत थी । टैक्सी के लिए हमने होटल के काउंटर पर जाकर पूछताछ की…तो उन्होंने एक ट्रेवल एजेंसी के एक सज्जन जिनका नाम देहला जी (Mr. D.S. Dhela Mobile No.09690252676 ) हैं, को फोन लगाकर बुलाया और कहा की आप लोग इनसे अपना नैनीताल घूमने का कार्यक्रम की रुपरेखा तय कर लीजिए । हम लोगो ने आपस में मिलकर नैनीताल के मुख्य दर्शनीय स्थलों और आसपास की झीलों को देखने का कार्यक्रम बनाया और उनसे टैक्सी का खर्चा पूछा तो सारे रास्ते के खर्चे सहित रु०2200/- बताया । इसमें हमने थोड़ा मोलभाव किया तो तो रु० 1800/- में तैयार हो गये और उन्होंने कहा कि, ” आपने सीधे मुझसे सम्पर्क किया हैं, इसलिए इतना कम इसलिए मूल्य लगा रहू हूँ ” और उन्होंने कहा कि, “वैसे मेरे पास खुद की अल्टो है जो मैंने एक महीने पहले खरीदी, पर अभी तक उसका टैक्सी परमिट नहीं आया हैं, शायद कल तक आ जाए । आज के लिए मैं आपका एक टैक्सी का प्रबन्ध करा देता हूँ “। इतना कहकर उन्होंने एक जगह पर फोन लगाया और एक टैक्सी (अल्टो) का प्रबन्ध करा दिया और उस टैक्सी के चालक को दोपहर के बारह बजे समय दे दिया । हमने उन्हें दो सौ रूपये अग्रिम किराये के रूप में दे दिए और तैयार होने अपने होटल के कमरे में चले गए । लगभग साढ़े ग्यारह बजे तक हम लोग नहा-धोकर तरोताजा हो गए और हल्का-फुल्का नाश्ता करके कमरे का ताला लगाकर पूर्ण रूप चलने के तैयार हो गए । होटल के पार्किंग पर पहुंचे तो टैक्सी तैयार खड़ी थी । फटाफट टैक्सी में बैठे और नैनीताल के माल रोड होते हुए सबसे पहले यहाँ के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल इको केव पार्क पहुंचे ।
रोमांचित करती नैनीताल के गुफाए इको केव पार्क में (ECO CAVE PARK) →

इको केव पार्क नैनीताल के मल्लीताल में सुखाताल नाम के जगह पर कालाडूंगी मार्ग पर माल रोड से करीब एक किमी० दूर स्थित हैं । इस पार्क में प्रवेश करने का शुल्क लगता हैं । यह पार्क एक पहाड़ी पर विकसित और कुमाऊँ मंडल विकास निगम द्वारा संरक्षित और व्यवस्थित हैं । इस पार्क के पहाड़ में प्राकृतिक रूप से निर्मित छह छोटी-बड़ी गुफाए हैं, जो एक अलग ही रोमांच का अनुभव कराती हैं । हर गुफा को उसकी संरचना के आधार पर जंगली जानवरों का एक नाम दिया गया हैं → टाइगर केव, पेंथर केव, एप्स केव, बेट्स केव, फोक्स केव और पोर्कुपाइन केव (Tiger cave, Panther cave, Bats cave, Porcupine cave, Flying fox cave and Apes cave) । गुफा के आसपास हरे भरे पेड़, वनस्पिति पौधे, छोटे-छोटे घास के पार्क, मूर्तियों और यहाँ के दिशा निर्देशों से भली-भांति सुजज्जित किया गया हैं । पार्क में गुफाओं के बाद प्रकृति के सानिध्य में सबसे ऊपर संगीतमय फाउंटेन, फूलो के बगीचे और खाने-पीने के लिए एक केंटिन की व्यवस्था हैं । संगीतमय फाउंटेन को शाम के समय चलाया जाता हैं । एक प्रकार से व्यस्को और बच्चो के लिए पूर्णत मनोरंजन की व्यवस्था थी ।

Entrance gate of Eco Cave Park (प्रकृति के सानिध्य में स्थित के गुफा पार्क का प्रवेश द्वार )
हमारा टैक्सी चालक कुछ गुमसुम प्रकृति का था, जब पूछो तभी कुछ बताता था अन्यथा अधिकतर चुप ही रहता था और गाड़ी तो कुछ ज्यादा ही धीमे चला रहा था, अब समझो सामान्य से भी धीमे । खैर सवा बारह के बजे के आसपास हम लोग यहाँ पहुँच गए थे । वैसे मैं नैनीताल पहले भी दो बार आ चुका हूँ, पर इस स्थान पर पहली बार आया था, सो कुछ जिज्ञासा मेरे मन में इसके बारे में अभी बाकी थी । टैक्सी को थोड़ा आगे सड़क के किनारे लगाने के बाद जब हम लोग यहाँ पहुंचे, उस समय टिकिट काउंटर पर काफी भीड़ थी, पार्क में प्रवेश करने के लिए हमने थोड़ी देर पंक्ति में प्रतीक्षा करके प्रवेश टिकिट खरीदा । व्यस्क के लिए एक टिकिट का मूल्य रु.35/- और बारह साल तक के बच्चो का टिकिट मूल्य रु.20/- था । पार्क के गेट पर टिकिट चेक कराकर हम लोग पार्क में कुछ ऊँचाई तक जाती सीढ़ियों के द्वारा प्रवेश किया ।

Colors of Eco Cave Park ( गुफा पार्क के कुछ आकर्षक चित्र )
पहाड़ी पर बने सीढ़ियों के बीच-बीच में कुछ सीमेंट/मिटटी की बहुत ही सुन्दर ग्रामीण परिवेश की मानव मूर्तिया बनी हुई थी, जैसा कह रही हो कि आइये आपका इस हरे-भरे, खुशनुमा स्वच्छ माहौल में आपका स्वागत हैं । कुछ फोटो हमने उनके साथ भी लिए और पार्क के अंदर अपने कदम बढ़ाना जारी रखा । अंदर से पार्क काफी घने पेड़-पौधे से हरा-भरा और साफ़ सुधरा था, जगह-जगह लोहे की सुन्दर रेलिंग पहाड़ी गड्डे से सुरक्षा हेतु लगी हुयी थी और चलने हेतु पत्थरो के रास्ता घने पहाड़ी पेड़-पौधे के बीच बना हुआ थे ।

Caves in the name of wild animal (जंगली जानवरों के नाम से संबोधित गुफाए )
दिशा-निर्देशों के अनुसार हम लोग चलते हुए, यहाँ की गुफाओं तक पहुँच गए । यहाँ छह छोटी-बड़ी गुफाए हैं जो एक दूसरे अलग हैं और उनका प्रवेश द्वार भी अलग-अलग है । इन गुफाओं में प्रवेश बड़ी सावधानी से कही झुककर तो कही लगभग घुटनों के बल लगभग लेट कर करना होता हैं । हमारे सामने सबसे पहली गुफा टाइगर केव और उसके साथ ही पेंथर केव थी । गुफा के प्रवेश पर काफी भीड़ थी क्योंकि कुछ लोग सावधानी और डर के वजह से धीरे-धीरे चल रहे थे । ऊँचे-नीचे कूदते पहाड़ों के संकरे गलियारों के मध्य इन गुफाओं से गुजरना एक अलग ही रोमांच का अहसास करा देता हैं । इन गुफाओं में रोशनी और ताज़ी हवा की काफी अच्छी व्यवस्था थी । कुछ लोग तो गुफा की गहराई, उबड़खाबड़ और दम घोटूं रास्ते को देखकर बीच में से ही वापिस हो लेते थे । एक करके हमें सभी गुफाओं का अवलोकन किया । इन सभी गुफाओं में सबसे छोटा रास्ता बेट्स केव का था, जिसमे घुटनों के बल अपना सर बचाकर प्रवेश करना होता था । कुछ दो गुफाए आपस में अंदर से जुड़ी हुई भी थी । इसी तरह डगमगाते, डरते, चिल्लाते हम लोगो ने सभी गुफाओं के आनन्द लिया । हाँ ! एक बात तो हैं, इन गुफाओं के सफ़र में हमारी पूरी कसरत हो गई थी ।

                           Fountain in the end of Eco Cave Park (कुल मिलाकर रोमांचित कर देता हैं यह पार्क )
गुफाओं के अवलोकन के बाद हम लोग पार्क में सुन्दर बगीचों के बीच सीढ़ियों से और अधिक ऊँचाई तक चलते रहे । सबसे ऊँचाई पर खाने-पीने के लिए एक कैन्टीन और वादियों की खूबसूरती निहारने के लिए झोपड़ीनुमा वाच टॉवर बने हुए थे । केंटिन के पास एक पानी का फुव्वारा भी चल रहा था, यह एक संगीतमय फुब्बारा था जो शाम के समय संगीत के आधार पर सुन्दर द्रश्य प्रस्तुत करता हैं । जब हम देख रहे थे उस समय केवल फुब्बारा ही चल रहा तो कोई संगीत की आवाज नहीं आ रही थी । हमें पार्क में घूमते हुए काफी समय हो चुका था और समय लगभग एक बजे से ऊपर ही हो चुका था । अगले दर्शनीय स्थल जाने के लिए हम लोग अब पार्क से बाहर आ गए । कुछ खाने-पीने का सामान वही पार्क की आसपास बनी दुकानों से लिए और टैक्सी में बैठकर अपने अगले स्थल की तरफ चल दिए ।

आज के इस लेख को अब यही समाप्त करते हैं । जल्द ही अपनी इस ” कुमाऊँ श्रृंखला ” के अगले यात्रा लेख के नई कड़ी में अपने अनुभव के साथ आपके समक्ष प्रस्तुत करूँगा । अगले लेख में आप लोगो को शहर के और भी विभिन्न स्थल पर ले चलूँगा । आपको आज का यह लेख कैसा लगा, आपकी प्रतिक्रिया और सलाह का हमेशा स्वागत हैं । अगले लेख तक के लिए आप सभी पाठकों को धन्यवाद और राम -राम !
क्रमशः ………..
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Table of Contents  कुमाऊँ यात्रा श्रृंखला के लेखो की सूची :
4. भीमताल → सुन्दर टापू वाली कुमायूं की सबसे बड़ी झील (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..4)  
5. नौकुचियाताल→ नौ कोने वाली सुन्दर झील ( (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..5)   
6. सातताल → कुमाऊँ की सबसे सुन्दर झील  (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..6)
7. नैनीताल → माँ नैनादेवी मंदिर और श्री कैंची धाम (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..7)   
8. रानीखेत → हिमालय का खूबसूरत पर्वतीय नगर (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..8) 
9.  कौसानी → प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पर्वतीय नगर (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....9)
10. बैजनाथ (उत्तराखंड)→भगवान शिव को समर्पित अति-प्राचीन मंदिर (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....10) 
11. पाताल भुवनेश्वर → हिमालय की गोद में एक अद्भुत पवित्र गुफा (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....11) 
12. जागेश्वर धाम → पाताल भुवनेश्वर से जागेश्वर धाम यात्रा (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....12) 
13. जागेश्वर (ज्योतिर्लिंग)→कुमाऊं स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध धाम के दर्शन (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....13) 
14. नैनीताल → खूबसूरत नैनी झील और सम्पूर्ण यात्रा सार (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का.....14) ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ 

17 comments:

  1. यात्रा के बहुत सुंदर चित्र ....

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    1. धन्यवाद....चैतन्य...

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  2. बहुत ही सुन्दरता से लिखा है सारा यात्रा -वृतांत ....होटल तो महंगे ही है ..हमने भी सूट्स ही लिया था ...ठीक माल रोड पर ही और 1500 रु में ...आप एक महीने बाद गए इसलिए और महंगे हो गए होगे ...यही मौसम होता है इन लोगो का भी कमाई का ..खेर ,केव -गार्डन की तस्वीरो से याद ताजा हो गई ...आगे की यात्रा जानने की उत्सुकता बनी हुई है ....

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    1. धन्यवाद दर्शन जी..... यह सीजन की कहानी तो सभी जगह ऐसी ही हैं.....इस सीजन के नाम पर पैसा तो हम और आप जैसे घूमने वालो के खर्च होते हैं....|
      उत्सुकता बनाए रखिये.....
      धन्यवाद...!

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  3. रितेश जी,

    काफी बेहतरीन वर्णन और सुंदर चित्रा हमेशा की तरह, वैसे तो मैं भी नैनीताल दो बार गया हूँ और यहाँ की खूबसूरती देखने लायक हैं।
    शायद आप भीमताल भी गए होंगे अगर नहीं तो कभी जरूर जाना।

    मुझे आपकी कौसनी की यात्रा का बेसब्री से इंतज़ार हैं॥!!!

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    1. धन्यवाद योगेश जी.....
      वो तो हैं....नैनीताल की खूबसूरती देखने लायक हैं..| हम भीमताल, नौकुचियाताल और सात ताल भी गए थे....उसका विवरण आपको अगले लेख में पढ़ने को मिलेगा.....|

      कौसानी भी जल्द आएगा....

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  4. kumau yatra 1 se jyada ruchikar .
    badhai.

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    1. अच्छा लगा जानकर कि यात्रा एक से भी यह भाग आपको अधिक रुचिकर लगा....धन्यवाद...!

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  5. रितेश जी, मुझे लगता है कि ऑफ सीज़न में जाने के चक्कर में हमें हरियाली देखने को नहीं मिलती, हां सब चीज़ें सस्ती जरूर मिल जाती हैं। कश्मीर, शिमला, मसूरी यदि मार्च में जायें तो पतझड़ ही पतझड़ मिलती है। आप सीज़न में गये तो प्रकृति के सौन्दर्य का पूरा आनन्द ले पाये जो आपके मनभावन फोटो में भी देखने को मिल रहा है। आज के आपके लेख से मैने यही सर्वप्रमुख शिक्षा ग्रहण की है। धन्यवाद ! जब घूमने का शौक है तो फिर खर्च से क्या घबराना ! सीज़न का अर्थ ही है कि पर्यटन स्थल अपने पूरे सौन्दर्य और शबाब पर होगी !

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    Replies
    1. प्रिय सुशान्त जी....
      आपने सही कहा...सीजन का मतलब ही होता है....भरपूर हरियाली और सुविधाए....जो आफ सीजन में लगभग नदारत ही रहती है....|
      यहाँ तक आने और लेख पर टिप्पणी के लिए धन्यवाद....

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