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Monday, July 9, 2012

मनिकरण ( Manikaran )→ पार्वती घाटी का पवित्र स्थल (एक सुहाना सफ़र मनाली का….5)

Table of Contents
मनाली, रोहतांग और मनिकरण यात्रा श्रृंखला के लेखो की सूची :
3. रोहतांग पास → बर्फीली घाटी की रोमांचक यात्रा (एक सुहाना सफ़र मनाली का....3)
4. मनाली →सोलांग घाटी की प्राकृतिक सुंदरता (एक सुहाना सफ़र मनाली का….4)
5. मनिकरण → पार्वती घाटी का पवित्र स्थल (एक सुहाना सफ़र मनाली का….5)
6. मनिकरण → पवित्र स्थल का भ्रमण (एक सुहाना सफ़र मनाली का….6)
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नमस्कार दोस्तों ! पिछले लेख में मैंने आप लोगो को मनाली के सोलांग घाटी (Solang Valley) के यात्रा के बारे में वताया था, जिसे आप मेरे पिछले लेख एक सुहाना सफ़र मनाली का….4 में पढ़ सकते हैं । आइये अब चलते हैं व्यास और पार्वती नदी घाटी के बीच बसे “पवित्र स्थल मनिकरण की यात्रा “ पर ।

View Kullu City from MDR-29 (व्यास नदी के पार नजर आता खूबसूरत कुल्लू नगर)
दिन शुक्रवार, 25 जून 2010 को हम लोग सुबह 7:00 बजे के आसपास नींद उठ गए और मनाली की इस सुबह का स्वागत हुआ मूसलाधार वारिश से । हम लोग लगभग एक घंटे में अपने नित्यक्रम से निवृत हुए, तब तक बारिश हल्की पड़ चुकी थी और कुछ बूंदाबांदी ही सी हो रही थी । तेज बारिश पड़ने से मनाली मौसम बहुत ही रूमानी हो गया था और हवा में नमी का इजाफा भी पहले के अपेक्षा अधिक हो गया था । हम लोगो ने आज वशिष्ठजी जाने और वही गर्म कुंड में नहाने की योजना बना रखी थी । कार चालक को जगाकर उसे चलने के लिए कहा तो उसने कहा की आज मनिकरण चलते हैं, वह जगह वशिष्ठजी से भी अच्छी हैं और कई गर्म पानी के कुंड भी वहाँ यदि एक-डेढ़ घंटे बाद भी हम लोग निकलेंगे तो सही समय पर मनिकरण पहुँच जायेगे । हमें उसकी बात जंच गयी । थोड़ी देर में चाय-नाश्ता करने के बाद होटल के कमरे में जाकर अपना सारा इधर-उधर बिखरा सामान समेटा और बैगो में जल्दी से पैक किया । होटल के काउंटर पर जाकर अपने दो दिन का हिसाब बनवाया और बिल भुगतान (कुल रु०1725/- का बिल बना जिसमे हमारे दो दिन का कमरे का किराया और कुछ चाय-कोफ़ी-दूध का भी हिसाब था ) करने के बाद होटल चेक आउट कर दिया । होटल के वेटरो की साहयता से सारा सामान कार की डिक्की में रखवाया, उनको टिप के रूप में कुछ रूपये दिए । चलने की पूरी तैयारी होने और सभी लोगो के कार में बैठने के बाद सुबह के लगभग 10:00 बजे के आसपास हम लोगो ने मनाली को अलविदा किया और सुहाने और भीगे मौसम का आनन्द लेते हुए, चल दिए नए स्थान पार्वती घाटी में स्थित पवित्र स्थल मनिकरण की ओर ।

Kullu City Behind Vyas River (पहाड़ों के साये में कुल्लू शहर का खूबसूरत नजारा और दिखता गुरुद्वारा )


Beauty of Nature, Kullu→Bhuntar (मन को मोह लेते हैं यह पहाड़ और यह नदिया )


मनाली(Manali)→50Km→भुंतर(Bhuntar)→29Km→कसोल(Kasol)→4Km→मनिकरण(Manikaran)

मनिकरण जाने का रास्ता मुख्यत रूप से भुंतर होकर जाता हैं तो इस बार हमने भुंतर (कुल्लू) तक जाने के लिए कुल्लू जाने वाले NH21* को न चुन कर व्यास नदी के दूसरी तरफ बने नए मनाली वाले रास्ते को चुना । माल रोड से आगे चलने पर व्यास नदी के पुल को पार करने के बाद बाई ओर का रास्ता (NH21*) सोलांग घाटी-रोहतांग-लेह की ओर चला जाता हैं, और दाई तरफ का रास्ता कुल्लू और भुंतर की ओर । नए मनाली से भुंतर तक के इस मार्ग का नाम MDR-29 (Major Districts Road ) हैं , जो मनाली से नग्गर, कुल्लू होते हुए भुंतर तक जाता हैं । हम लोगो में दाई तरफ का रास्ता चुना और भुंतर की तरफ चल दिए । यह रास्ता काफी साफ़-सुधरा, चौड़ा और बहुत ही अच्छी अवस्था में था । इस रास्ते में दाई ओर बह रही व्यास नदी और रास्ते में पड़ने वाले पहाड़, जंगल के प्राकृतिक द्रश्य अपनी अनुपम छंटा बिखेर रहे थे । कुल मिलाकर यह रास्ता बहुत ही खूबसूरत और नयनाभिराम द्रश्यो से भरा पड़ा हैं । रास्ते में सड़क के किनारे हमें एक फल की दुकान नजर आई, गाड़ी रोककर कुछ यहाँ के प्रमुख फल काफी मोलभाव करने के बाद ख़रीदे और अपने सफ़र को फिर जारी रखा । दोपहर लगभग 12:00 बजे की आसपास व्यास नदी की दूसरी ओर कुल्लू शहर नजर आने लगा था । दूर से दिखते कुल्लू शहर के सुन्दर घर, गुरुद्वारा, पुल, पहाड़ बहुत ही प्यारे और मन को लुभा रहे थे । नदी पार दिखते कुल्लू शहर के कुछ फोटो हमने चलती कार से खींचे थे, जो इस लेख में भी लगाये हैं ।

Way to Manikaran A View of Parvati Valley (पार्वती नदी घाटी का सुन्दर द्रश्य)
लगभग बीस मिनिट के सफ़र के बाद हम लोग भुंतर के पास पार्वती नदी पर बने पुल के टोल टैक्स पर पहुँच गए । इस पुल से आगे जाने के लिए टोल टैक्स देना होता हैं, जो हमने चुकाया पर कितना चुकाया यह अब याद नहीं । पार्वती नदी पर बना यह पुल बहुत खूबसूरत और अलग ही डिजायन का था । पुल पार के बाद MDR-29 यही खत्म हो जाता हैं और यही से रास्ता दो भागो में बंट जाता हैं । दाई तरफ का रास्ता भुंतर-कुल्लू की तरफ ओर बाई तरफ का रास्ता मनिकरण की तरफ, पुल से से मनिकरण की कुल दूरी लगभग 33 किमी० हैं । भुंतर से मनिकरण तक यह वाला मार्ग MDR-30 मनिकरण रोड कहलाता हैं । हम लोग इसी मनिकरण वाले मार्ग में चल दिए ।
Parvati River in Valley (कसोल के पास जाम में फँसे थे,उस समय कार से निकलकर कर पार्वती घाटी और नदी का यह फोटो लिया था )

अब हम कुल्लू घाटी से निकलकर पार्वती घाटी में प्रवेश कर चुके थे । एकमार्गीय (single root) मनिकरण मार्ग बहुत सुन्दर था और तेज गति शोर करके बहती हुई पार्वती नदी के किनारे मनिकरण तक जाता हैं । हिमालय के गोद में बसी पार्वती घाटी में पार्वती नदी के बहने का संगीत (शोर) हमेशा सुना जा सकता हैं और यह घाटी बहुत ही खूबसूरत, चारों ओर हरियाली, बड़े-बड़े पेड़ और सुन्दर द्रश्य से भरी पड़ी हैं । यह मार्ग काफी संकरा और बहुत सी जगह चट्टानें गिरने, वारिश से काफी उबड-खाबड़ हो गया था । कही-कही यह मार्ग तो पहाड़ों से बाहर के तरफ निकली चट्टान के कारण इतना संकरा हो जाता था, कि एक बार में एक ही तरफ की गाड़ी निकाली जाती थी तब तक दूसरी तरफ के वाहनों को अपनी बारी का इन्तजार करना पड़ता था । संकरा मार्ग होने के कारण यदि कोई बड़ा वाहन जैसे बस ट्रक आ जाए तो समझो लंबा जाम और लगता था कि जैसे समय ठहर गया हो और ट्रेफिक बेहद धीमे गति से गुजरता था । कही-कही इस संकरे मार्ग से सामने वाले वाहन को रास्ता देने लिए गाड़ी को बिल्कुल खाई के बिल्कुल मुहाने तक लाना पड़ जाता था ।

A Hill of Parvati Valley_ Just opposite previous picture (घाटी के हरियाली से भरपूर पहाड़ )

सवा बजे के आसपास हम लोग कसोल से चार-पांच किलोमीटर पहले एक इसी तरह के भयंकर जाम में फँस गए थे जैसे-तैसे एक घन्टे में कसोल को पार किया । कसोल के पार करने के बाद मणिकरण से दो किलीमीटर पहले फिर जाम में फँस गए । हमें ऐसा लगा था की जैसे आज हमारी किस्मत आज जाम ही जाम है और ऊपर से खराब रास्ता, पर क्या करते समय के अनुसार चलने को विवश थे पर गनीमत थी कि मौसम खुशगवार और ठंडा था और रास्ते में कही-कही हल्कीबारिश भी हो गयी थी । आखिरकार किसी तरह रास्ते की इन परेशानियो से निपट कर तीन बजे के आसपास हम लोग मनिकरण पहुँच ही गए ।
Parvati River,Mankaran View from Hotel Room (होटल के कमरे से दिखती तेज गति से बहती पार्वती नदी )

मनिकरण (Manikaran) Himachal Pradesh

मनिकरण सयुक्त रूप से हिन्दुओ और सिक्खों का एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल हैं । मनिकरण हिमाचल प्रदेश राज्य में हिमालय की गोद में पार्वती घाटी में पार्वती नदी और व्यास नदी के बीच पार्वती नदी के किनारे बसा हुआ हैं, इसकी समुंद्र तल से ऊँचाई लगभग 1760 मीटर हैं । कुल्लू से यह 45किमी०, मनाली से 88किमी० और भुंतर से 35 किमी० दूर हैं । मनिकरण मुख्यतः अपने खौलते हुए गर्म पानी के चश्मे (कुंड) और खूबसूरत प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध हैं । माना जाता हैं कि यह गर्म पानी गंधक युक्त हैं और इस पानी से स्नान करने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं । मनिकरण में भगवान रामजी, शिवजी, नैनाभगवती आदि के मंदिर और एक गुरुद्वारा हैं । यहाँ हमें प्रकृति का एक अदभुत चमत्कार देखने को मिलता हैं कि एक तरफ नदी में बहता बर्फ जैसा ठंडा पानी दूसरी और उसके किनारे खौलता हुआ गर्म पानी का कुंड, जो इतने गर्म हैं की कुछ मिनिटो में खाना पक जाये । मनिकरण आने पर नदी के बाए तरफ के हिस्से में मंदिर, गुरुद्वारा, धर्मशालाये, बाजार और गर्म पानी के चश्मे हैं, यहाँ पर केवल पैदल ही पुल पार करके जाया जा सकता हैं । नदी के दाई तरफ के हिस्से में टैक्सी, बस स्टैंड, रेस्तरा और होटल हैं । यही से आगे एक रास्ता मनिकरण से आगे खीर गंगा की तरफ चला जाता हैं ।

Parvati River from Manikaran Bridge (पहाड़ों के बीच बहती सुन्दर नदी)

Shri Ram Mandir at Manikaran (मनिकरण का प्राचीन भव्य श्री राम मंदिर )

मनिकरण का महात्य और इतिहास

मनिकरण मुख्यता दो शब्दों से मिलकर बना हैं पहला “मणि” यानि बहुमूल्य पत्थर और दूसरा “कर्ण” यानि कान । हिंदू धर्म के अवधारणा के अनुसार मनिकरण को ब्रह्मांड पुराण में सबसे उत्तम कुलान्त पीठ में स्थित श्रेष्ठ तीर्थराज माना जाता हैं । ब्रह्मांड पुराण में इस तीर्थ का नाम वेद ने हरी हरी कहा हैं और दूसरा नाम अर्धनारीश्वर और तीसरा नाम चिंतामणि हैं । एक बार भगवान आशुतोष भगवान शिवशंकर और माता पार्वती संसार भ्रमण करते हुए इस स्थान पर पहुंचे, इस स्थान का अनुपम सौंदर्य और प्रकृति की मनोहारी शोभा देखकर शिव पार्वती यहाँ रुक गए और हजारों वर्षों तक यहाँ तप और निवास किया । एक बार जलक्रीड़ा करते समय माता पार्वती जी की कान के आभूषण की मणि कही गिर कर गुम हो गयी तो माता पार्वती जी के अनुरोध पर भगवान शंकर के आदेश पर गणों ने मणि को सर्वत्र ढूंढा परन्तु मणि कही न मिली । इस पर भगवान शंकर क्रोधित हो उठे और उन्होंने अपना दिव्य नेत्र खोला । भगवान शंकर के तीसरे नेत्र से नैना माता प्रकट हुई, इसलिए मनिकरण को नैना माता की जन्मस्थली भी माना जाता हैं । सभी देवी देवता भयभीत हो गए और ब्रह्मांड कम्पामान हो उठा । पतालाधिपति शेषनाग जी ने जोर का फूंकार छोड़ा जिससे उबलते हुए गर्म जल की धारा उर्ध्वाधर फूट पड़ी । इस धारा में सहस्त्रो अन्य मणिया सहित माता पार्वती के कान के आभूषण की मणि भी निकल आई और भगवान शंकर का क्रोध शांत हो गया । इस कारण इसका नाम मनिकरण पड़ गया ।

यह स्थान भगवान शंकर को इतना प्रिय था कि काशी में गंगा किनारे एक घाट का नाम “मणिकर्णिका घाट” रखा । भगवान शंकर के महिमा के प्रत्यक्ष के रूप में भूमिगत किसी अज्ञात अदभुत शक्ति के कारण श्री मनिकरण में जगह जगह उबलते हुए जल (86°C – 96°C तापमान) के फव्वारे दर्शक का मन मोह लेते हैं । ऐसे ही गर्म फब्बारे के पास भगवान शिवशंकर का एक बहुत ही भव्य मंदिर स्थापित हैं जिसमे भगवान शंकर जी एक बड़े शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं और उनके मंदिर के ठीक सामने एक पीतल के नंदी की बड़ी सी मूर्ति भी हैं । बर्फीले ठन्डे पानी की पार्वती नदी मंदिर के बगल से ही बहती हैं और मंदिर का फर्श गर्म कुंड के कारण अक्सर गर्म ही रहता हैं । मुख्य मंदिर के बगल में ही शिवजी का एक छोटा मंदिर भी  हैं । मंदिर का रास्ता मनिकरण के मुख्य बाजार से होकर जाता हैं, एक छोटे से रास्ते से गुरुद्वारे भी जुड़ा हुआ हैं ।

Hot Spring at Raghunath Temple at Manikaran (प्रकृति का चमत्कार – उबलते गर्म पानी का एक कुंड )

Hot Water Spring at Raghunath Temple (ऊपर से लिया गया एक चित्र और गर्म कुंड का )

Bathing Hot Pond at Raghunath Temple (नहाने लायक गर्म पानी का एक स्नानागार, पर उसमे पानी अधिक गर्म होने के कारण बंद था ।)

View Entrance Gate & Open Hot water Pond from Gurudwara (एक सुन्दर नजारा गुरूद्वारे से )

सिक्ख धर्म के अवधारणा के अनुसार कलयुग में श्री गुरुनानकदेव जी ने अवतार लिया और सांसारिक जीवो का उद्धार करते हुए 15अस् 1574 विक्रमी संवत को मनिकरण पहुंचे और साथ ही साथ भाई बाला और मरदाना भी थे । यहाँ पहुँचने पर भाई मरदाना को भूंख लगी और गुरुजी को कहने लगा “मेरे पास आटा तो हैं पर आग और बर्तन का कोई साधन नहीं हैं ।” यह सुनकर गुरुजी ने मरदाने को एक पत्थर उठाने को कहा जब मरदाने ने पत्थर उठाया तो खौलते पानी का चश्मा प्रकट हुआ, गुरूजी ने मरदाने को रोटिया बनाकर खौलते पानी में डाल देने को कहा, जब उसने रोटिया डाली तो सभी रोटीया उस चश्मे में डूब गयी । यह देखकर मरदाना कहने लगा,”थोड़ा सा अनाज था वह भी वैसे ही चला गया ।” गुरूजी ने कहा.”मरदाने ! अरदास कर कि एक रोटी भगवान ले नाम को दूँगा ।” मरदाने के अरदास करने पर सभी रोटिया बाहर आ गयी । मरदाना भोजन करके तृप्त हुआ और खुश होकर कहने लगा,” गुरूजी आप यही ठहरे, आपको तो भूख लगती नहीं, मेरा काम इसी से चलता रहेगा ।” गुरूजी के प्रकट किये हुए चश्मे मे आज भी उसी तरह लंगर पकता हैं । सन 1940 में संत बाबा नारायण हरी जी ने इस स्थान की खोज की और निर्माण आरम्भ किया । सिक्ख धर्म की प्रमुख आस्था का प्रतीक एक भव्य गुरुद्वारा यहाँ शिवमंदिर के बगल में ही स्थापित हैं, जिसे मनिकरण साहिब के नाम से जाना जाता हैं । गुरूद्वारे में समयनुसार हमेशा लंगर आयोजन रहता हैं और लंगर का खाना शिव मंदिर में स्थित उबलते गर्म कुंड के पानी में ही पकता है ।

Inside Mankaran Sahib Gurudwara (गुरुद्वारे का अंदर का एक द्रश्य )

मणिकरण अपनी प्राकृतिक सुषमा और सुन्दर नजारों के लिए भी प्रसिद्ध हैं । मनिकरण का मौसम हमेशा सुहावना रहता हैं, मन को सुकुन देने वाला होता हैं । मनिकरण के दोनो और ऊँचे-ऊँचे हरे-भरे पहाड़ और पहाड़ों के बीच में तेज गति से पार्वती नदी बहती हैं । इसी पार्वती नदी के दोनो ओर मनिकरण बसा हुआ हैं । नदी पार करने के लिए दो पुल भी हैं जिनमे से एक गुरुद्वारे से और एक टैक्सी स्टैंड चौक से हैं । मनिकरण में कई सारी धर्मशालाएं हैं और कई छोटे बड़े होटलो की भी अच्छी व्यवस्था हैं । खाने के लिए छोटे बड़े ढाबेनुमा रेस्तरा हैं जहाँ आपको स्वादिष्ट खाना देर रात तक उपलब्ध हो जाता हैं । वैसे मनिकरण छोटी जगह हैं तो इसका बाजार भी जल्दी ही बंद हो जाता हैं ।

A View of Manikaran (शाम के समय होटल के तरफ के मनिकरण के पहाड़ों का द्रश्य )

आज मणिकरण के बारे में बस इतना ही । अगले लेख में मनिकरण के मंदिर, गुरुद्वारा और गर्म पानी के चश्मे आदि पर बिताए अपने बहुमूल्य और खूबसूरत समय के बारे में अपना अनुभव प्रस्तुत करूँगा । आज की मनिकरण की यात्रा आपको कैसी लगी, आपकी प्रतिकिया और अगले लेख के लिए सुझावों का स्वागत हैं । अगले लेख तक के लिए आपका धन्यवाद !

नोट : ऊपर लगाये गए फोटो में दर्शाये गए समय और दिनांक वास्तविक हैं ।

10 comments:

  1. बहुत सुंदर रहा मणिकर्ण का यह सफ़र ....1995 में हम स- परिवार यहाँ की यात्रा कर चुके है ....यहाँ का लंगर ला- जवाब था जो गर्म - कुण्ड में बनता है ...यहाँ कई छोटी -छोटी पोटलियों टगी हुई देखि थी जो आलू और चावल उबालने के लिए लोग रखते है ... और रितेश यहाँ सिख धर्म के अनुनायी गुरु गोविन्द सिंह जी नहीं बल्कि गुरु नानक देव जी अपनी यात्रा के दौरान आये थे ..और बाला- मरदाना उनके ही शिष्य थे

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    1. टिप्पणी के लिए धन्यवाद दर्शन जी....| आपने अपनी मनिकरण यात्रा 1995 की थी और हमने 2010 में | अब तो आपके हिसाब से मनिकरण काफी बदल गया हैं |
      मैंने मनिकरण का इतिहास और महात्य नेट से नहीं बल्कि वहाँ के गुरूद्वारे और मंदिर में लगे बोर्ड से लिखा हैं जिसकी फोटो भी मेरे पास हैं | फोटो देखने पर ज्ञात हुआ की मनिकरण सिख धर्म के अनुयायी गुरु गोविन्द सिंह जी नहीं बल्कि गुरु नानक देव गुरुनानक देव जी ही आये और यह गलती से लेख में टाइप हो गया हैं| अब उसे सही कर दिया गया हैं....| गलती की ओर ध्यान दिलाने के लिए धन्यवाद !

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  2. वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर प्रस्तुति
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |

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  3. वाह दोस्त वाह !गजब छायांकन ,चित्रण .

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  4. Virendra Sharma ‏@Veerubhai1947 29m
    ram ram bhai मुखपृष्ठ शनिवार, 15 जून 2013 मुरली

    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  5. bahut sundar yatra vivran....ek aisa sthaan jisake bare me asaani se pata nahi chalta ..

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  6. सुन्दर चित्रों संग पवित्र स्थान का यात्रा वर्णन बहुत बारिकियों को ध्यान में रखकर और निरंतरता अच्छी लगी

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  7. Bahut hi acchey dangh se likha aur ye hame apne toor karne me hepl karega.

    Thanks Bro

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  8. Apke ise article se bhut madad mili h. Bhut hi acchi trh se hr jagah k bare m btaya gya h.

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