Search This Blog

Tuesday, May 29, 2012

रोहतांग पास ( Rohtang Pass )→ बर्फीली घाटी की रोमांचक यात्रा (एक सुहाना सफ़र मनाली का....3)

Written by Ritesh Gupta
नमस्कार दोस्तों ! पिछले दिन 23 जून को हम लोगो ने मनाली के आस पास के दर्शनीय स्थलों की सैर की थी, जिसके बारे आप मेरे पिछले लेख “एक सुहाना सफ़र मनाली का..2 ” में पढ़ा ही होगा । आइये अब चलते हैं ” रोहतांग दर्रे की रोमांचक यात्रा “ की सैर पर ।

पिछ्ली रात हम लोग तय करके सोये थे कि अगले दिन हम लोगो को सुबह जल्दी उठकर रोहतांग दर्रा और सोलांग वैली देखने जाना हैं और अपने कल के इस कार्यक्रम से हमने अपने कार चालक को भी अवगत करा दिया था । उससे इस सम्बन्ध बातचीत भी हुई और उसने बताया की रोहतांग जाने के लिए बहुत जल्दी सुबह लगभग छह बजे की आसपास निकलना पड़ेगा, जिससे वहाँ पहुंचने में देरी न हो और रास्ते के जाम-झाम से बचा जा सके । दिनांक 24 जून 2010 का ठंडी सुबह का दिन था और सुबह-सुबह ही हल्की बारिश हो चुकी थी । हम लोग पौने पांच बजे के आसपास नींद से उठ गए और फोन करके कार चालक को भी उठा दिया था । हम लोगो ने जल्दी-जल्दी सुबह के अपने नित्यक्रम निपटाए । हमारे कमरे की बाथरूम में गीजर के द्वारा गर्म पानी की सुविधा होने से हम लोग नहा-धोकर तैयार हो गए थे ।
View from Manali→Rohtang Road , Manali (जी करता हैं पंक्षी बनकर उड़ जाऊ दूर गगन में )

रोहतांग के सफ़र में साथ ले जाने के लिए बच्चो के कुछ गर्म कपड़े, शाल और कुछ नाश्ता एक बैग में लगा लिया क्योंकि सफ़र के दौरान इनकी जरुरत पड़ ही जाती हैं । जगने से लेकर होटल से बाहर आते-आते हम लोगो को करीब एक घंटे का समय लग गया और नीचे आकार देखा की कार अभी पार्किंग से बाहर ही नहीं आई थी; कारण मालूम किया तो पता चला की हमारी कार पार्किंग सबसे पीछे और गाड़ियों के पीछे लगी हुई थी और उसका निकलना इतना आसान नहीं था । किसी भी तरह से होटल स्टाफ की साहयता से कार चालक ने आगे की कारों के बीच में इधर-उधर जगह बनाते हुए अपनी कार निकालने का रास्ता बना ही लिया । कार से पार्किंग से बाहर के बाद अब हम लोग प्रस्थान करने तैयार थे । सब लोगो के कार में बैठने की बाद लगभग पौने छह के आसपास हम लोग रोहतांग के सफ़र पर चल दिए । सुबह के भौर की हल्की मद्धम रौशनी चारो ओर छाई हुई थी । मौसम बिल्कुल साफ़ था और वातावरण में धीरे-धीरे रौशनी बढ़ने के साथ दूर-दूर तक के नज़ारे साफ़ नजर आ रहे थे । यदि बात हम मौसम की करे तो वातावरण काफी खुशमिजाज और ठंडा था और सुबह के समय हल्की बारिश हो जाने के कारण थोड़ा रूमानी भी हो गया था और उस समय हमारे जुबां पर एक प्यारा सा नगमा आ गया : ” ओ ! आज मौसम बड़ा…बेईमान हैं जरा…बेईमान हैं…आज मौसम……” ।


सुबह के समय माल रोड और उसके आसपास की सभी दुकाने बंद थी । गलियों में एकाद ठेल पर चाय और ब्रेड-मक्खन बेचने वाले अपने काम में व्यस्त थे और वे सुबह के समय राहगीरों और पर्यटकों को अपनी सेवा प्रदान कर रहे थे । हम लोगो ने भी इस ठन्डे मौसम में एक ठेल के पास गाड़ी रोककर गर्म-गर्म चाय, ब्रेड और हमारे पास थोड़ा बहुत खाने का सामान रखा हुआ था जो हम अपने साथ लाये थे, उससे सुबह का अपना हल्का-फुल्का नाश्ता किया । गर्म चाय के सेवन शरीर में थोड़ा सा गर्मी का अहसास हुआ । चाय पीने के बाद हम लोग माल रोड राष्ट्रीय राजमार्ग NH-21* से होते हुए व्यास नदी पर बने एक पुल को पार करने के बाद बायीं हाथ पर मुड़ने की बाद व्यास नदी की दाई तरफ के हाइवे पहुँच गए और मनाली-लेह मार्ग पर अपना सफ़र जारी रखा । हम सोच रहे थे कि हम लोग ही सबसे पहले जल्दी उठकर रोहतांग की ओर जा रहे हैं; पर सुबह की समय हाइवे पर काफी हलचल थी और मस्ती करते पर्यटको और घुमक्कड़ो से भरी बहुत सी छोटी-बड़ी गाड़िया  नजर आ रही थी ।
Manali to Rohtang Road Map.. (मनाली से रोहतांग का रास्ते का नक्शा )
मनाली (MANALI) → 12 किमी० → पलचान (PALCHAN) → 5 किमी० → कोठी (KOTHI) → 20 किमी० → मरही गांव (MARHI) → 15 किमी० → रोहतांग दर्रा (Rohtang Pass Top Point)

हाइवे पर व्यास नदी की साथ चलते हुए सारा रास्ता प्राकृतिक द्रश्यो से भरा पड़ा हुआ था । प्रकृति के गोद पड़ने वाले पहाड़, नदी, नाले, छोटे-छोटे घर, घने वन और हरियाली के बीच में बने होटल/रिसोर्ट, लहराती सड़को के द्रश्यो अपने आप में अनूठे थे । कुछ समय बाद सड़क से बहुत दूर बर्फ ढकी पहाड़ियों का खूबसूरत नजारा भी दिखना शुरू हो गया था । लगभग 11 किमी० चलने के बाद हाइवे बाद पलचान (PALCHAN) नाम की जगह से पहले यह हाइवे दो भागो में बट जाता हैं । बायीं तरफ वाला रास्ता सोलांग घाटी और धुंदी (DHUNDI) की तरफ और यहाँ से दाहिने हाथ वाला रास्ता रोहतांग-लेह की ओर चला जाता हैं । हम लोगो को पहले रोहतांग पास की तरफ जाना था सो हमने पहले दाहिने वाला ही रास्ता चुना और उस पर अपने सफ़र को जारी रखा । दाई ओर मुड़ने से पहले तक का रास्ता सपाट और थोड़ा बहुत उतार चढ़ाव वाला था; और यह सड़क भी काफी चौड़ी और अच्छी हालत में थी, परन्तु दाहिने मुड़ने और पलचान से कुछ आगे निकलने के बाद जबरदस्त पहाड़ी चढ़ाई शुरू हो गयी थी । आगे तीखे और घुमावदार कैची जैसे खतरनाक मोड़, जब इन मोड़ो से गाड़ी गुजरती तब अनायास एक डर मन में बैठ जाता था कि अब तो नीचे खाई में गए । कभी गाड़ी खाई की तरफ और कभी पहाड़ की तरफ चली जा रही थी । जब इन तीखे घुमावदार मोड़ो से कार गुजरती थी तब हम लोग भी अपने आप कार के गति के साथ-साथ कभी दांये और कभी बांये अपने आप तरफ सरक जाते थे, फिर अपने आप को सही स्थिति में लाते तब तक फिर सरक जाते थे । सारे रास्ते ऐसा ही सिलसिला चलता रहा और हम प्रकृति प्रेमी भी बड़े शान से इस रोमांचक सफ़र और नजारों का आनन्द लेते चले जा रहे थे ।

रास्ते में कई जगह हमें खाने-पीने और गर्म कपड़े, जूते और दस्ताने किराए पर उपलब्ध कराने वाली अनेको दुकाने नजर आई । खास बात यह की दुकाने नाम से होकर नम्बरों से थी, जिससे पर्यटक इन दुकाने को आसानी से याद रख सके और वापिसी में दुकान को पहचान का उनका किराये पर लिया हुआ सामान आसानी से वापिस कर सके । यह सभी दुकाने हिमाचल पर्यटन से अपने इन्ही नम्बरों से अनुबंधित होती हैं जिससे दुकानदार और पर्यटकों की बीच में किसी भी प्रकार की धोकाधड़ी न हो और राज्य में एक स्वस्थ पर्यटन होता रहे ।
Breathing Taking View, Rohtang Pass Road (ठंडी हवा में सुबह का यह सफ़र सुहाना )
View from Rohtang-Leh Road (एक तमन्ना ! छोटा सा घर हो यहाँ ........)
Panoramic Scene from Rohtang-Leh Road (यह वादियाँ और पहाड़ अक्सर याद जा आते हैं .....)
An Another View from Rohtang/Leh Road (बर्फ से ढके पहाड़ों का रूप ही निराला हैं......)
रोहतांग-लेह हाइवे पर सफ़र करते हुए अब हम लोग पलचान से ५ किमी० आगे ” कोठी “ नाम जगह के पास तक पहुँच गए थे । कोठी इस रास्ते में पढ़ने वाली एक खूबसूरत जगह हैं और यहाँ सड़क के दाहिने ओर सुन्दर वादियों में वन विभाग का एक रेस्टहाउस (P.W.D. Rest House) है । शायद इस रेस्टहाउस में ठहरने के लिए पहले से ही आरक्षण करना होता हैं । हमारे कार चालक ने कार को एक दुकान के पास थोड़ा विश्राम करने और चाय पीने के लिए रोक लिया । हमने जहाँ पर कार रोकी उस दुकान का भी एक अपना एक पहचान नंबर था इस दुकान के नीचे वाले भाग में किराए पर गर्म कपड़े, जूते और दस्ताने उपलब्ध थे । हम लोगो ने चाय बनाने के लिए दुकानदार को आदेश दे दिया था तभी उस दुकान में से एक महिला बाहर आई और हमसे आग्रह करके बोली ” रोहतांग के ठन्डे मौसम से बचाब के लिए हमारे पास गर्म कपड़े, दस्ताने और बर्फ में चलने के लिए जूते हैं । आप इन्हें हमारे यहाँ से सस्ते किराये में ले जाओ और लौटते समय इन्हें वापिस कर जाना ।” वैसे तो उस महिला ने यह बात अपने स्थानीय अंदाज में कही थी पर मैने यहां पर इसे अपने अंदाज में लिखा हैं ।

हमने अपने कार चालक से पूछा कि इन कपड़ो के वहाँ पर कोई जरूरत पड़ेगी तो उसने कहाँ “वहाँ पर ठण्ड तो होगी और बर्फीले पहाड़ पर चलने के लिए ट्रेकिंग जूते और गर्म कपड़ो की जरुरत तो पड़ेगी और मेरे ख्याल से इससे आगे अब दुकाने भी कम ही मिलेंगी । यदि आप लेना चाहो तो यही से ले लो ।” हमने उस महिला एक व्यक्ति के पूरे कपड़े का किराया पूछा तो उसने 300/- रूपये प्रति व्यक्ति बताया हमने कहा अरे ! यह तो बहुत महंगे हैं । काफी देर मोलभाव करने पर वह महिला 150/- रूपये प्रति व्यक्ति गर्म कपड़े पर मान गयी । हम लोगो ने अपने पसंद और नाप के गर्म कपड़े और जूते का चुनाव किया और उन्हें पहनकर रोहतांग की सर्दी से निपटने को तैयार हो गए । हम लोग इन मोटे कपड़ो को पहन कर थोड़ा फूल से गए थे । खैर हमने उस महिला को गर्म कपड़ो का 750/- रूपये किराये का भुगतान किया और गर्म-गर्म चाय पी; थोड़ा बिस्किट, नमकीन का नाश्ता किया और अपने आगे के रास्ते की ओर चल दिये । कोठी से आगे ऊँची-ऊँची पहाड़ियों से घिरा रास्ता बहुत सुन्दर और मनोहारी द्रश्य वाला था । हमारे कार चालाक ने बताया की इसको शूटिंग पॉइंट कहते हैं क्योंकि अधिकतर फिल्मो की शूटिंग इसी जगह के आसपास होती रहती है ।

सफ़र में चलते समय पहाड़ों के ऊंचाई में दिखती सड़क को देखकर ऐसा लग रहा था की किसी ने उसे आसमान की सबसे ऊंचाई पर ही बना दिया हो । हमारे मन में एक अजीब सा रोमांच का आभास हो रहा था कि अब हमें भी इसी ऊँची सड़क से गुजरना हैं । दूसरी तरफ गहरी-गहरी खाईयां उसके किनारे से गाड़ी को निकलते देख मन में अजीब-अजीब से ख्याल भी आ रहे थे । जैसे-जैसे हम लोग ऊँचाई की ओर चलते चले जा रहे वैसे-वैसे उसी अनुपात में पहाड़ों पेड़ों-पौधों की संख्या के साथ-साथ तापमान में भी गिरावट आती जा रही थी और सड़क पहले की अपेक्षा धीरे-धीरे संकरी हो रही थी । आगे के सफ़र में सड़क के संकरी होने जाने और कई जगह भूस्खलन के कारण रास्ता दलदली, उबड़खाबड़, फिसलन से भरा होने के कारण खतरनाक हो गया था । पहाड़ों में कई जगह तो रास्ता इतना संकरा हो गया था कि एक समय में एक तरफ की ही गाड़ी ही गुजर पा रही थी और वाहनों के दबाब के कारण जाम की स्थिति बन गयी थी । एक गाड़ी तो उबड़खाबड़ और ऊंचाई वाले रास्ते पर चालक की अनुभवहीनता के कारण बंद ही पड़ गयी थी, जैसे-तैसे वो चालक उस गाड़ी को वहाँ से निकालने ने सफल हो ही गया और रास्ता खुल ही गया था । रास्ते में कई जगह पीछे से आती कई स्थानीय गाड़ी जल्दी के चक्कर में बार-बार होर्न देकर ओवरटेक करने की कोशिश कर रही थी । वैसे पहाड़ों में स्थानीय चालक बाहर के वाहन चालक को पसंद नहीं करते । हमेशा आगे निकलने की होड़ में लगे रहते हैं और अपने आप को पहाड़ों का कुशल चालक मानते हैं । हमारी कार का चालक पूरे रास्ते भर बड़ी कुशलता, धैर्य और अनुभव से कार को एक सामान गति से सड़क और ट्रेफिक के अनुसार चला रहा था । हम लोगो को उसके पहाड़ों में गाड़ी चलाने के हिसाब से समझ गए कि यह बहुत ही अनुभवी कार चालक हैं, और हमें उस पर पूरा भरोसा था ।

रास्ते में एक जगह एक तेज गति से गिरता मनोरम पहाड़ी झरना नजर आया । झरने से आगे बढ़ने एक छोटी सी झील नजर आई जिसे छोटी नदी पर एक बाँध बनाकर बनाया गया था और यहाँ पर एक पिकनिक स्पोट भी बनाया गया था । कुछ किलोमीटर आगे बढ़ने पर तेज बहती व्यास नदी के ऊपर बने एक संकरे पुल को पार करने के कुछ देर बाद हम लोग इस इलाके राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-21*) पर पड़ने वाले अंतिम और सबसे ऊँचे गांव ” मरही (Marhi) ” पहुँच गए । इस गांव की समुद्र तल से ऊंचाई लगभग 3335 मीटर हैं । अत्यधिक ऊंचाई (पहाड़ों पर दस से ग्यारह हजार फुट से ऊपर के जगह पर वृक्ष रेखा समाप्त हो जाती हैं और केवल घास और पत्थर ही नजर आते हैं ।) के कारण इस गांव में पेड़ पौधे बहुत ही कम नजर आ रहे थे पर यहाँ का मौसम जबरदस्त ठंडा था । मनाली से मरही की गांव की दूरी लगभग 36 किमी० हैं । यह गांव पैराग्लाइडिंग का बेस कैम्प भी हैं और पैराग्लाइडिंग करने वाले उत्साही लोगो की इस रोमांचक खेल के लिए यहाँ पर बुकिंग की जाती हैं । मरही गाँव से आगे रोहतांग-लेह हाइवे के ऊँचे पहाड़ी स्थान से उड़कर (पैराग्लाइडिंग करके) आने वाले लोग इसी गाँव में उतरते हैं ।

जब हम मरही गाँव पहुंचे उस समय सड़क के दोनों विश्राम करने की लिए रुके यात्रियो की बहुत सी गाड़ियों सड़क दोनों ओर खड़ी हुई थी । जिससे आगे रोहतांग के ओर जाता हुआ रास्ता और भी संकरा ओर तंग हो गया था, और जाम के से हालात हो गए थे । हम लोगो का इस गॉव में रुकने का कोई इरादा नहीं था सो हम लोग जाम का सामना करते हुए अपनी मंजिल की ओर चल दिए । अभी हमारा रोहतांग का सफ़र यहाँ से लगभग 15 किमी० दूर था और आगे का रास्ता उबड-खाबड़, धूल भरा और खतरनाक हो गया था । कही-कही रास्ते दोनों ओर के पहाड़ों/चट्टानों को काटकर बीच में निकाला गया था । हमने सोचा की कैसे इन विषम परिस्थिर्यो में मजदूरो ने इतने इतनी ऊंचाई वाले खतरनाक परिवेश में (जहाँ आसानी से साँस लेना भी मुश्किल हैं ।) इस सड़क मार्ग का निर्माण किया होगा और विपरीत मौसम में मार्ग को सुचारू रखने के लिए कितने मेहनत करनी पड़ती होगी । खैर अब पहाड़ों पर यदा-कदा वर्फ दिखाना शुरू हो गयी थी और जैसे-जैसे आगे बढ़ते जा रहे थे वैसे-वैसे पहाड़ों पर बर्फ की मात्रा भी बढ़ती जा रही थी ।

कुछ किलोमीटर चलने की बाद रास्ते के दोनों ओर बर्फ नजर आना शुरू हो गयी थी और सड़क बर्फ पिघलने के कारण गीली हो गयी थी । कई जगह बर्फ काटकर रास्ते बनाये गए थे, तो कई जगह रास्ते के दोनो ओर बर्फ की दीवार की खड़ी थी । कभी-कभी हम बर्फ दीवारों से इतने नजदीक से गुजरे कि हाथ बढ़ाकर अपनी मुट्ठी में बर्फ को भर लेते थे और आपस में कार में ही छीटाकशी करते थे । बर्फ की इन दीवारों के बीच रास्ते से गुजरते हुए हमें फ़िल्म “जब वी मेट” में यहाँ पर फिल्माया गया एक गीत याद आ गया वो हम कुछ इस  प्रकार गुनगनाने लगे → “ये इश्क हाय…! बैठे बिठाये जन्नत दिखाए….ओ रामा…ये इश्क हाय… ।”  इन रोमांचक बर्फ से घिरे मार्ग से गुजरते हुए, ऐसा महसूस होता हैं की हम सपनो की सफ़ेद दुनिया जन्न्त में आ गये हो । कुछ किलोमीटर चलने के बाद हमने अपने कार चालक से पूछा कि “अभी रोहतांग कितनी दूर हैं ?” तो उसने बताया की “ऊपर सड़क का मोड़ जो उस पहाड़ी नजर आ रही बस उसी के पीछे हैं रोहतांग । मुश्किल से दो किलीमीटर ही होगा और कुछ देर में पहुँचने वाले हैं ।”

Scenic view of Rohtang Pass ( रोहतांग का एक नयनाभिराम द्रश्य )
Panoramic view of Rohtang Pass and Leh Road (स्वर्ग सा अहसास कराती रोहतांग की घाटियां )

रोहतांग दर्रा (Rohtang Pass)
एक परिचय रोहतांग दर्रे से । समुंद्र तल से लगभग 13050 फीट (3978 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध रोहतांग दर्रा हिमाचल प्रदेश के सबसे ऊँचे और मुख्य दर्रो में एक हैं । रोहतांग हिमालय पर्वत के पूर्वी पीर पंजाल श्रृंखला के अन्तर्गत आता हैं । रोहतांग दर्रे को लोग इसके पुराना नाम “भृगु-तुंग” नाम से भी जानते हैं और कुछ लोग तो इसे यहाँ के मौसम की विषमता (बर्फीले तूफान) के कारण ” मौत की घाटी ” तक कहते हैं । अत्यधिक ऊँचाई के कारण यहाँ हवा का घनत्व (विरलता) कम होता हैं इस कारण वातावरण में आक्सीजन की मात्रा घट जाती हैं । कभी-कभी साँस लेने में भी परेशानी उठानी पड़ती हैं और थकावट हो जाती हैं । रोहतांग मनाली-लेह राष्ट्रिय राजमार्ग 21* (NH-21*) पर पड़ता हैं और मनाली (जिला-कुल्लू) से लगभग 52 किलीमीटर दूर हैं । रोहतांग को लाहुल-स्पीति का प्रवेश द्वार भी कहा जाता हैं क्योकि लाहुल-स्पीति केवल इसी मार्ग से जाया जा सकता हैं । इस दर्रे का मौसम अक्सर बदलता रहता हैं और इसी मौसम के अत्यधिक बदलाव के कारण यह और भी अधिक प्रसिद्ध हो गया हैं । दोपहर बाद यहाँ का मौसम कब बिगड़ जाये पता ही नहीं चलता, कुछ देर पहले तेज धूप पड़ रही होती है तो कुछ देर बाद घने बादल आकार कुहरे सा आभास करा देते है । यहाँ पर अक्सर हड्डियों के भेदने वाली ठंडी हवा चलती रहती हैं । रोहतांग पर साल भर बर्फ पड़ती हैं और सर्दियो में (नबम्बर से अप्रेल तक) अत्यधिक बर्फ पड़ने के कारण रास्ते ढक जाते और रोहतांग दर्रे को छह माह के लिए बंद कर दिया जाता हैं । इन छह महीनो में लेह और लाहुल-स्पीति का सड़क संपर्क मार्ग बिल्कुल खत्म हो जाता हैं ।
A Snow Coverd Hill at Rohtang Point (मन को मंत्रमुग्ध करता रोहतांग में बर्फ का विशाल साम्राज्य )
रोहतांग आकार प्रकृति के विराट स्वरूप के दर्शन होते हैं और यहाँ के उन्मुक्त वातावरण में हम खो से जाते हैं । रोहतांग वास्तव में किसी स्वर्ग से कम नहीं हैं यहाँ से नजर आती बर्फ से ढकी सुन्दर हिमालय पर्वतमाला मन को मन्त्र-मुग्ध कर देती हैं । यहाँ अक्सर बादल पहाड़ों से नीचे नजर आते हैं और यहाँ जैसे विरल नज़ारे शायद ही किसी और जगह देखने को नजर आये । गर्मियों में यह स्थान हजारों पर्यटको और घुम्मकड़ो से आबाद हो जाता हैं । रोहतांग की ढलान पर दूर-दूर तक बर्फ का विशाल साम्राज्य देखकर उम्रदराज लोग अपने आप को जवान महसूस करते है, और नौजवानो के अंदर में बालपन जाग उठता हैं । यहाँ हर तरफ लोग खूब मौज-मस्ती करते और आपस पर एक दूसरे पर बर्फ के गोले बनाकर फेकते, हँसतें और यहाँ का भरपूर आनन्द नजर आ जाते हैं । पर्यटको के लिए रोहतांग में बर्फ में होने वाले साहसिक और रोमांचक खेल जैसे स्कीइंग, बर्फ के स्कूटर की सवारी, स्लेज से बर्फ पर चलना, ढलान से स्नोमीटर से फिसलना आदि की पूर्ण व्यवस्था हैं और विशेषज्ञ की देखरेख में इनका मूल्य चुकाकर अपना मनोरंजन किया जा सकता हैं ।
Anshita at Rohtang Pass Road ( बर्फीली हवा से बचाव के लिए गर्म कपड़े जरुरी हैं । )
अब चलते हैं अपने यात्रा वृतान्त की ओर । करीब पन्द्रह-बीस मिनिट सफ़र और तंग रास्ते के जाम को झेलते हुए हम लोग रोहतांग पहुँच गए । रोहतांग टॉप से कुछ पहले पार्किंग और वहाँ पर खच्चर से रोहतांग टॉप तक घूमने की अच्छी व्यवस्था थी । हम लोगो ने यहाँ पर नहीं रुके और लेह के रास्ते आगे चलते हुए सुबह के नौ बजे रोहतांग दर्रे के टॉप पर पहूँच गए । रोहतांग में बर्फ का विशाल साम्राज्य और पहाड़ों की खूबसूरती देखकर हम लोग मंत्रमुग्ध हो गए । हमने रोहतांग दर्रे और उससे पहले पड़ने वाली पहाड़ियों में कई जगह देखा की बर्फ का रंग आंशिक रूप काला पड़ गया था, और कारण था रोहतांग में डीजल गाड़ियों कि अधिक मात्रा में आवागमन से उनसे निकला काला धूआँ जो इन सफ़ेद बर्फ जमा होकर बर्फ के रंग काला कर देता हैं और दूसरा कारण पर्यटको के द्वारा अपने साथ लाए सामान की गन्दगी और कूड़ा का यहाँ पर छोड़ देना था । यह जानकारकर हमें दुःख हुआ की अत्यधिक पर्यटक दबाब के कारण रोहतांग की सुंदरता धीमे-धीमे समाप्त हो रही हैं । मेरी लोगो से अपील है की यदि आप लोग कही भी घूमने जाए तो इधर-उधर कूड़ा फेककर वहाँ की सुंदरता को नष्ट न करे ।

रोहतांग दर्रे की शुरुआत से ही बड़ी संख्या में सड़क पर लोगो ने अपने वाहनं सड़क के इधर-उधर खड़े किये हुए थे और बर्फ में अपने लोगो के साथ खेलने और सैर का आनन्द ले रहे थे । यहाँ के स्थानीय लोगो और फोटोग्राफरो ने बर्फ के पुतले, सुंदर रंगीन फूलो और कागजो से सजे मॉडलनुमा छोटे घर बना रखे थे और लोगो की इनके साथ खूबसूरत वादियों फोटो अपने कैमरे में कैद कर पर्यटकों को अपनी सेवा प्रदान कार रहे थे । रोहतांग में इस समय काफी संख्या में पर्यटक जमा थे और काफी भीड़-भाड़ थी । हमने अपने कार चालक से इसी सड़क पर और आगे चलने को कहा । कार चालक हमें रोहतांग दर्रे के अंत तक ले गया जहाँ से लेह और लाहुल-स्पीति के लिए सड़क की ढलान शुरू हो जाती थी । रोहतांग के इस हिस्से में भीड़भाड़ काफी कम थी और इस जगह हमको ताज़ी और साफ़ सुधरी बर्फ देखने को मिल गयी थी । हमने आपकी कार यही पर एक जगह सड़क के किनारे रुकवा दी ।
" Anuj Gupta " at Rohtang Pass ( रोहतांग की बर्फीली वादियों में सैर )
कार से निकलकर रोहतांग की धरती पर हमने पहला कदम रखा तो यहाँ के नज़ारे देखकर हम तो धन्य हो गए और मन में कहा कि रोहतांग वास्तव हमारे देश की धरती पर जड़ा हुआ एक अनमोल नगीना हैं । सड़क के दोनो ओर पहाड़ियों और ढलानों पर जहाँ देखो बर्फ का विशाल साम्राज्य फैला हुआ था । भटकते बादलों की बीच अवतरित होती दूर नजर आती बर्फ से ढकी हिमालय की खूबसूरत पर्वतमाला रोहतांग की सुंदरता भी चार चाँद लगा रही थी । प्रकृति की गोद में बसा रोहतांग एक अदभुत रमणीक स्थल हैं । बर्फ पर पड़ती लुकाछुपी करती सूरज की तेज किरण बर्फ पर पड़ने के बाद आँखों को चकाचौंध सी कर रही थी और वातावरण को और भी प्रकाशमान कर रही थी । रोहतांग पर कई छोटी-बड़ी बर्फ से ढकी पहाड़ियां और ढलान हैं जहाँ पर स्नोमीटर, स्किनिंग, बर्फ के स्कूटर आदि पर लोग अपना मनोरंजन कर रहे थे । रोहतांग पर भूख मिटाने के लिए स्थानीय लोगो के द्वारा बर्फ के ऊपर ही छोटी-छोटी खुली हुई स्टालनुमा दुकाने यहाँ सड़क के किनारे लगायी हुई थी । दुकान क्या एक मेज पर ही अपना बेचने का सारा सामान लगा रखा था और बगल में ही मेज-कुर्सी डाल रखी थी । इन दुकानों में बिस्किट, कोल्डड्रिंक, चिप्स, ब्रेड, अंडा, गरम चाय, काँफी, भुट्टे, मैगी नूडल्स, आमलेट आदि उपलब्ध थे ।
Waiting for Hot & Testy Breakfast, RohtanfPass ( बर्फ से घिरी वादियों में गर्म नाश्ते का मजा ही कुछ अलग होता हैं )
A Small Shop at Rohtang Pass (यहाँ पर स्थानीय लोगो के द्वारा खाने-पीने की अच्छी व्यवस्था भी हैं)
हमने सोचा की बर्फ में घूमने बाद में जायेगे पहले थोड़ी पेट-पूजा कर ले जाये और काफी देर चलते रहने के कारण अब हमें भूख भी लगाना शुरू हो गयी थी । सबसे पास की एक दुकान पर जाकर पूछा तो गर्म खाने में चाय, आमलेट और मैगी नूडल्स उपलब्ध थे । हमने नूडल्स और आमलेट के भाव पूछे तो थोड़े महंगे लगे (शायद ६० या ४० रूपये पर अब याद नहीं आ रहा हैं ) । महंगे हैं तो क्या हुआ यह सब हमें इतनी ऊंचाई और विषम परिस्थियों में उपलब्ध भी तो हो रहे थे । हमने दो कटोरा नूडल्स और एक आमलेट-ब्रेड बनाने का आदेश दे दिया और पास में रखी मेज-कुर्सी पर बैठकर प्रतीक्षा करने लगे । हमने अपने कार चालक से भी खाने के लिए पूछा तो उसने कहाँ की “मैं अपने पसंद का थोड़ी देर बाद में खा लूँगा” । हमने उसे खाने के लिए पैसे दे दिये और कहा ” तुम्हारा जब मन करे तब खा लेना ” । कुछ ही देर प्रतीक्षा के पश्चात गर्म-गर्म नूडल्स और आमलेट-ब्रेड आ गयी । मुझे नूडल्स जरा भी पसंद नहीं थे, सो मैंने आमलेट-ब्रेड पर ही धावा बोला और बाकी लोगो ने भी अत्यधिक भूख के दबाब में फटाफट नूडल्स फटाफट खत्म कर दिए । हमने एक कटोरा और नूडल्स बनाने का आदेश दे दिया । चारों ओर बर्फ से घिरी जगह के बीच में मनमोहक नजारों का आनन्द लेते हुए खाने का मजा अपने आप में एक न भुलाने वाला अनुभव था ।
A Small Spring between Snow hole (बर्फ पिघलने से बना एक गड्डा और उसमे बहता एक सुन्दर छोटा झरना )

Full Enjoy at Snow valley ( बर्फ से बनाया एक पुतला और उसका नाम रखा "लल्ला"...हा हा हा )
अपनी भूख को शांत करने के पश्चात हम लोग सड़क के दूसरी तरफ ऊपर की ओर नजर आ रही साफ़ और ताज़ी बर्फ से ढकी एक पहाड़ी की और चल दिए । इस पहाड़ी पर कोई भीड़भाड़ नहीं थी बस इक्का दुक्का लोग ही टहल रहे थे । बर्फ में थोड़ी से जूतों की साहयता से जगह बनाकर हम लोग इस पहाड़ी पर चढ़ गए । पहाड़ी के थोड़ा ऊपर और जाने पर रोहतांग से दिखने वाले नज़ारे और भी बेहतरीन हो गए जिन्हें आप फोटोओ में देख सकते हो । यहाँ की बर्फ साफ़ सुधरी और ताज़ी होने के कारण थोड़ी भुरभुरी थी ओर इस ताज़ी बर्फ पर पहले जूते के निशान हमारे ही बने थे । बर्फ ऊपर सावधानी से चलते हुए भी जूते कही-कही बर्फ में धंस जा रहे थे और बर्फ जूतों में अंदर घुस कार पैरों को सुन्न कर रही थी । अपना जूता उतारते बर्फ को निकालते और फिर दुबारा से पहनकर अपनी मस्ती में लग जाते थे । इतनी सारी बर्फ देखकर हमारे अंदर का बालपन जाग उठा और उछलने, कूदने और मस्ती करने को दिल मचलने लगा । हमने बर्फ में खेलते हुए एक छोटा सा बर्फ का पुतला बनाया उसके हाथ, पैर, नाक और एक मुँह भी दिया जो बार-बार बनाने पर गिर रहे । बड़ी मुश्किल से वो छोटा सा पुतला बन पाया और उसका बाकायदा नामकरण भी किया उसका नाम हमने रखा “लल्ला” । उस छोटे से सफ़ेद रंग के बर्फ पुतले साथ हमने ढेर सारी फोटो खींच डाली । लगी ने आपको न बच्चो जैसी बात पर ऐसा करके देखो, बड़ा मजा आता हैं और ये जिंदगी पल के हसीन पल बनकर कभी न भूलने वाली यादें बन जाती हैं ।
Amazing Hills View at great Rohtang Pass (यह वादियाँ ये रास्ते अक्सर हमें बुलाते हैं )
Clean & Fresh Snow at Rohtang Pass ( जहाँ देखो बर्फ ही बर्फ ....)
इस पहाड़ी की बर्फ पर टहलते हुए हम लोग और ऊँचाई पर चले गए । ऊपर बर्फ की बीच में हमें एक छोटा सी जगह मिली जो बर्फ से खाली थी और उसमे बर्फ के बीच में एक छोटा गड्डे का रूप ले लिया था । उस खाली जगह में छोटे-छोटे गोल पत्थर पड़े हुए और उन छोटे पत्थरों के बीच बर्फ से पिघलकर पानी बह रहा था । बर्फ से बहकर निकला पानी आगे जाकर बर्फ में गायब हो रहा था । कुछ फोटो हमने यहाँ की भी लिए और पास में एक पत्थर की ऊँची से चट्टान पर चढ़ कर रोहतांग क्षेत्र का अवलोकन भी किया ।
Snow Covered  field at RohtangPass (बर्फ का विशाल मैदान ......)
काफी समय इस पहाड़ी पर व्यतीत करने के पश्चात हम लोग नीचे उतरकर सड़क के दूसरी और ढलान पर पहुँच गए । इस तरफ की बर्फ थोड़ी गन्दी और मटमैले रंग की थी । लोगो के द्वारा स्कीइंग और स्नोमिटर चलाने के कारण बर्फ दब गयी थी और और लंबे-लंबे निशान से बन गए थे । हम लोग इस घाटी का आनन्द ले रहे थे तभी एक स्कीइंग कराने वाला आया और अपनी सेवा देने के लिए आग्रह करने लगा । हमने कहाँ ” कितने पैसे लोगो और कहाँ तक स्कीइंग कराओगे ” । वो बोला “वो सामने पहाड़ी तक के एक चक्कर के 300/- रूपये लूँगा ।” हमने कहाँ ” भाई ! यह तो बहुत महंगा हैं और हमें स्कीइंग करने भी नहीं आती गिर गए तो परेशानी हो जायेगी ।” वो नहीं माना और अब वो 150/- रूपये चक्कर पर आ गया । अंत में हमने उससे मना ही कार दिया क्योंकि हमने पहले स्कीइंग कभी नहीं की थी और गिरने का भय भी लग रहा था ।

कुछ समय यहाँ के मनोरम नज़ारे, लोगो को स्कीइंग करते हुए और स्नोमीटर चलाते हुए देखते हुए बिता दिया । अब हम लोग वापिस सड़क पर आ गए और देखा कि सड़क के किनारे एक भुट्टा वाला गर्म-गर्म भुट्टे भून कर बेच रहा था । वैसे पहाड़ी इलाके में भुट्टे मिलना आम बात हैं, यदि इतनी ऊँचाई पर भी मिल जाये तो मजा ही आ जाता हैं । मैंने उससे एक भुट्टे का भाव पूछा तो उसने 20/- का एक बताया । मैंने एक बड़ा सा सुन्दर बड़े दाने वाला एक भुट्टा छांटकर उसे भुनवाया । बर्फीले मौसम में गर्म-गर्म भुट्टे का स्वाद अलग ही आनन्द देता । भुट्टे का स्वाद लेते हुए हम लोग अपनी कार के पास आ गए ।
Me & My Family after enjoying at Rohtang (हम सब साथ-साथ हैं )
बर्फ में खेलते हुए हमारे किराये के गर्म कपड़े गीले हो गए थे । जूते के अन्दर बर्फ घुसने कारण जूते अंदर से गीले हो गये थे और पैर सुन्न से हो गए थे । हमने गीले कपड़े और जूते उतारकर कार की डिक्की में डाल दिया और अपने स्पोर्ट्स वाले जूते पहन लिए । दोपहर के बारह बजने वाले थे और यह तीन घंटे का समय कब व्यतीत हो गया की पता ही नहीं चला । इस समय रोहतांग के मौसम में थोड़ा बदलाव शुरू हो गया था और कुछ घने बादल रोहतांग की पहाड़ियों पर मडराने लगे थे । तेज गति से बहती बर्फीली ठंडी हवा शरीर को तीर की तरह से चुभो रही थी ।
"Akshat" on the Car Roof  (जहाँ मन करे, देखो ! चारों ओर सुन्दर द्रश्य ही नजर आयेंगे )
Every one is enjoying at Rohtang  Pass , Manali
(रोहतांग में बर्फ का पुतला और बर्फ से बनाई गई सुन्दर आकृति.....ये फोटो वापिसी में कार से लिया गया है )

काफी समय यहाँ पर व्यतीत हो जाने के कारण हमारे कार चालक ने यहाँ से वापिस चलने को कहा । अभी हमारा यहाँ से वापिस जाने को दिल नहीं कर रहा था पर हमें वापिसी का लंबा और खतरनाक रास्ता भी तय करना था और सोलांग वैली भी जाना था । रोहतांग की इन सुन्दर वादियों में फोटो खीचने का अपने आप में एक अलग अनुभव होता हैं, चारों ओर के द्रश्य सुन्दर नजारों से भरे पड़े हैं और यहाँ की फोटो भी बेमिसाल आते हैं । हमने तो यहाँ के ढेर सारे फोटो खींच डाली थी; कुछ फोटो इस लेख में भी लगाए हैं । आपको इनमे से कौन सा फोटो सबसे अच्छा लगा जरा बताइए तो ? लगभग सवा बारह बजे की आसपास हम लोग कार में सवार हो गए और रोहतांग में बिताए उन खूबसूरत पलो में मन में संजोकर वापस मनाली की ओर चल दिये ।

मैंने रोहतांग के उन खूबसूरत पलों को अपनी स्वयं लिखित कविता के रूप में कुछ इस प्रकार संजोया हैं :→
वो पल अक्सर याद आते हैं,
एक प्यारा अहसास दिला जाते हैं ।
सफ़ेद बर्फ से पटी पहाड़ियाँ,
वो बर्फीली सुन्दर घाटियाँ ।
हर पल बदलता मौसम यहाँ,
पहाड़ों में घने बादलों डेरा यहाँ ।
बर्फ में करते वो अठखेलियाँ,
वो आपस की हंसी ठिठोलिया ।
वो पल अक्सर याद आते हैं,
एक प्यारा अहसास दिला जाते हैं ।
मुझे लगता हैं कि यह लेख कुछ ज्यादा ही लंबा हो गया हैं । अब अपने इस रोहतांग की इस यात्रा लेख को यही विराम देता हूँ, और अगले लेख में “रोहतांग वापिसी, सोलांग वैली और मनिकरण की यात्रा ” के बारे में अपना अगला लेख प्रस्तुत करूँगा । आज रोहतांग दर्रे की रोमांचक यात्रा आपको कैसी लगी, आपकी प्रतिकिया और अगले लेख के लिए सुझावों का स्वागत हैं । अगले लेख तक के लिए आपका धन्यवाद !

नोट : ऊपर लगाये गए फोटो में दर्शाये गए समय और दिनांक वास्तविक हैं ।
▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬
6. मनिकरण → पवित्र स्थल का भ्रमण (एक सुहाना सफ़र मनाली का….6) 
▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬



21 comments:

  1. रितेश जी राम राम, सबसे पहले आपके बच्चो को उनके जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई, भगवान उन्हें जिंदिगी में हर सफलता दे, उनकी हर इच्छा पूरी करे, ये जिए हजारो साल, साल के दिन हो पचास हज़ार......और वाह रोहतांग को देख कर मुझे अपनी मनाली रोहतांग यात्रा की याद हो आयी. रोहतांग यानी रूहों का दर्रा, या आत्माओं का निवास, इसीलिए इसे मौत की घाटी भी कहते हैं. पर मौत की घाटी इतनी सुन्दर होगी, वंहा जाकर ही पता चलता हैं. जब हम पहली बार मन्नाली गए थे तो रोहतांग जाते हुए बर्फ़बारी के कारण बीच में ही फंस गए थे. पर तब भी बर्फ़बारी का आनंद लिया था. हम लोग दूसरी बार में रोहतांग पहुँच पाए थे. आपके फोटो शानदार हैं,फोटो तो हज़ारो खींच सकते हैं, लेकिन जी नहीं भरता हैं.इन फोटो में आपने व्यास मंदिर का फोटो नहीं लिया हैं, जो कि व्यास नदी का उद्गम स्थल हैं. खैर मज़ा आ गया, सुबह सुबह बर्फ कि ठंडी वादियों में जाकर, धन्यवाद...

    ReplyDelete
    Replies
    1. रवीन जी.... राम राम
      सुन्दर शब्दों के माध्यम से बच्चो को बधाई देने और टिप्पणी के लिए आपका ह्रदय से बहुत-बहुत धन्यवाद …..!
      रोहतांग के बारे में जो आपने बताया वो मुझे काफी अच्छा लगा .......लगता हैं आपने इस लेख के माध्यम से अपनी रोहतांग पुरानी यादो को ताजा किया हैं.....
      हम लोग व्यास मंदिर नहीं गए थे इसलिए उसका फोटो हमारे पास नहीं हैं ......
      धन्यवाद....!

      Delete
  2. कोठी की चाय मुझे आज तक याद है। रोहतांग का आलेख बेहतरीन लगा। चित्र भी शानदार हैं। देर सी ही सही बच्चों को जन्मदिन की हार्दिक बधाई।

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद मनीष जी....

      Delete
  3. Ritesh babu,bahut hi sundar barnan,Anshita & akshat ko bahut bahut badhai,dono lambi umar jiye.

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद अमन जी....

      Delete
  4. सबसे पहले बच्चो को जनम दिन की शुभकामनाए ..

    रोहतांग वर्णन देखकर मुझे 1995 की अपनी मनाली -रोहतांग यात्रा याद आ गई ..मेरे बच्चे भी छोटे थे और उस समय हम सिर्फ कोठी तक ही जा पाए क्योकि आगे हमें मिलिट्री ने जाने नहीं दिया था ...क्योकि रोहतांग को पार करते -करते एक गाडी खाई में गिर गई थी इस कारण किसी को आगे जाने नहीं दिया गया ..हा, घोड़े पर जाने दे रहे थे पर बच्चे छोटे होने के कारण हम भी जा नहीं सके .. गर्म कपडे उस समय हमने २० रु में किराए से लिए थे ..आज भी याददास्त बिलकुल ताजा हैं... उस समय के सारे सीन आँखों में घुमने लगे हैं ..हम भी ब्रेड और जाम साथ ले गए थे बच्चो को खिलाने के लिए वैसे वहां हमें उबले अंडे और चाय मिल गई थी ज्यादा तो कुछ नहीं था काफी साल पहले की बात हैं ...आपने बहुत बढ़िया लिखा हैं रितेश आगे साथ -साथ चल रहे हैं ....

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद....दर्शन जी.....

      Delete
  5. मित्रों चर्चा मंच के, देखो पन्ने खोल |
    आओ धक्का मार के, महंगा है पेट्रोल ||
    --
    बुधवारीय चर्चा मंच

    ReplyDelete
  6. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    पर भी पधारेँ।

    ReplyDelete
  7. No matter if some one searches for his necessary thing, so he/she needs to be available that in detail,
    thus that thing is maintained over here.

    my web page ... http://www.erovilla.com/

    ReplyDelete
  8. अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी खास पहचान बनाने वाला हिमाचल प्रदेश का छोटा शहर ’मनाली’ प्राकृतिक दृश्य का एक नायाब खजाना है, और देश व विदेश के सैलानियों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहा है। मनाली मनुआलय से बना है। ’मनुयालय का अर्थ मनुऋषि का घर है। मान्यता है कि यहीं से महाऋषि मनु ने सुष्टि की रचना शुरू की। कुल्लू मनाली में चारों ओर हरे-भरे वन तथा हिमाच्छादित पहाड़ों की चोटियाँ हैं, चाहे कोई भी ऋतु हो मनाली कर मौसम में आकर्षण है।
    http://www.aajkiawaaz.com/tour-and-travel/tour-and-travel-news/india-tour/775-manali-travel.html

    ReplyDelete
  9. श्रीराम......
    नमस्ते रितेश भाई ...फोटो तो बहुत बेहतरीन ही ...अपने रोहतांग ,कुलू मनाली कि यात्रा याद दिलायी .
    फिर मिलेंगे ...शुभ यात्रा .मुकुल MH -18

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद मुकुल जी........पोस्ट पर कमेंट करने और पसंद करने के लिए...

      Delete
  10. An impressive share! I've just forwarded this onto a coworker who was conducting a little research on this.
    And hhe in fact bought mee dinner simply because I
    found it for him... lol. So allow me to reword this.... Thank YOU for
    the meal!! But yeah, thanks for spending the time
    to discuss this issue here on your blog.

    my web-site - million contact lens

    ReplyDelete
  11. यह जगह दिल के बेहद करीब है,पोस्ट पढ़कर मजा आया गुप्ता जी

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद सचिन जी

      Delete
  12. यात्रा विर्तान्त बहुत ही बढ़िया लिखा है रितेश भाई, आज दुबारा पढ़ा।

    ReplyDelete
  13. बहूत ही लंबा लिखा है , ज्यादा फालतू डिटेल्स की दरूरत नहीं थी।

    ReplyDelete

ब्लॉग पोस्ट पर आपके सुझावों और टिप्पणियों का सदैव स्वागत है | आपकी टिप्पणी हमारे लिए उत्साहबर्धन का काम करती है | कृपया अपनी बहुमूल्य टिप्पणी से लेख की समीक्षा कीजिये |

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Ad.

Popular Posts